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मोरबी में झूला पुल टूटे लगभग दस दिन हो चुके हैं। मुख्य आरोपी के खिलाफ न तो पुलिस ने कोई कार्रवाई और नही सरकार ने यह बताया कि उन्होंने ओरेवा कंपनी को पुल की मरम्मत का ठेका क्यों दिया। इस मामले में सरकार को कांग्रेस और आम आदमी पार्टी गुजरात सरकार की जमकर निंदा कर रही हैं। पुलिस ने दिखावा करने के लिये कंपनी के कुछ लोगों को गिरफ्तार जरूर किया है जिनमें दो मैनेजर, दो गार्ड, दो क्लर्क और तीन अन्य लोगों को गिरफतार किया है। इनमे पांच को रिमांड पर और अन्य को जेल भेज दिया है। इसके अलावा मोरबी नगर पालिका के मुख्य अधिकारी को भी सस्पेंड कर दिया है। किसी भी बड़ी मछली को छूने का प्रयास नहीं किया गया है। सिर्फ खानापूरी के लिये मजदूर और कुछ सामान्य कर्मचारियों को पकडा गया है। लेकिन न तो डीएम के खिलाफ कोई ऐक्शन लिया गया और नही किसी प्रशासनिक अफसर के खिलाफ कोई कार्रवाई की है। वैसे पुलिस के एक रिटायर वरिष्ठ अफसर के अनुसार इस मामले की प्राथमिक जांच कुछ घंटों में की जा सकती थी लेकिन सरकार और पुलिस जांच के नाम पर समय काट रही है और मुख्य आरोपियों को बचा रही है। इस मामले में जो भी लापरवाही की जा रही है वो विधानसभा चुनाव को देखते हुए की जा रही है। भाजपा और सरकार को इस भयानक कांड से कोई लेना देना नहीं उसे तो सिर्फ इस बात की चिंता है कि चुनाव प्रचार कर किसी तरह एक बार फिर से प्रदेश में अपनी सरकार बनाना है।
अनुभवहीन कंपनी को ठेका क्यों?
सरकार और मोरबी नगर पालिका इस बात का जवाब अभी तक नहीं दे पायी है कि एक ऐसी कंपनी जो इस फील्ड में कोई अनुभव नहीं रखती है उसे पुल की मरम्मत का ठेका देने की क्या मजबूरी थी। ओरेवा पिछले कई दशकों से घडियां, कैलकुलेटर और टेलिफोन बना रही है। उसने कभी भी किसी पुल की मरम्मत का काम नहीं किया था। फिर भी मोरबी नगर पालिका ने उसे ठेका देने का काम क्यों किया। यह सवाल सभी राजनीतिक दलों की ओर से उठाया जा रहा है। यह भी सरकार से सवाल किया जा रहा है कि इस ठेके के आवंटन में सीवीसी की गाइड लाइंस का उल्लंघन किया गया है। यह भी खुलासा हुआ है कि इस कंपनी को बिना टेंडर निकाले ही काम देने का फैसला किया गया है। इस कंपनी को काम देने के लिये कमेटी के कुछ सदस्य सहमत नहीं थे। इसके बावजूद बिना टेंडर स्वीकृत किये ही ओरेवा कंपनी को पुल की मरम्मत करने का काम आवंटित कर दिया गया।
पुल पर सैकड़ों लोगों किसने जाने दिया
इस काम के लिये कंपनी को दो करोड़ रुपये खर्च करने थे। लेकिन कंपनी ने मात्र 10—12 लाख खर्च कर ही पुल को 26 अक्टूबर को खोल दिया। यह भी जानकारी में आया है कि इस पुल की क्षमता 100 लोगों की थी। इसके बावजूद पुल पर सैकड़ों लोगों जाने की अनुमति किसने दी। इस बात पर भी सरकार और स्थानीय प्रशासन जवाब नहीं दे पा रहा है। बस वो यह कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं कि पुल उनकी अनुमति के खोल दिया गया। आश्चर्य की बात यह है कि इस पुल पर 12 हजार से अधिक लोग टिकट खरीदकर आ चुके थे। इतना सब कुछ होने के बाद भी मोरबी प्रशासन और नगर पालिका को इस बात की भनक तक नहीं लगी। यह भी लापरवाही का एक उदाहरण है।
प्रशासन और नगर पालिका का झूठ पकड़ा गया
हैरानी की बात यह है कि 26 अक्टूबर को ओरेवा कंपनी का मालिक जयसुख पटेल ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर इस पुल को खोलने का ऐलान किया था। इस अवसर पर पूरे मोरबी में पीएम मोदी, अमित शाह, सीएम भूपेंद्र पटेल और जेपी नड्डा के पोसटर लगाये गये थे। ऐसे जिले के डीएम और प्रशासन को इस बात का इल्म नहीं था ये बात किसी के गले से नहीं उतर रही है। यह बात भी सामने आयी कि कंपनी ने नगर पालिका और गेरा का एनओसी भी नहीं ली थी। यह साफ झलक रहा है कि इतने लोगों की दर्दनाक मौत से भी गुजरात सरकार और बीजेपी को अफसोस नहीं हो रहा है। वो अपने अधिकारियों और नेताओं को बचाने की कवायद कर रही है।हैरानी की बात यह है कि 26 अक्टूबर को ओरेवा कंपनी का मालिक जयसुख पटेल ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर इस पुल को खोलने का ऐलान किया था। इस अवसर पर पूरे मोरबी में पीएम मोदी, अमित शाह, सीएम भूपेंद्र पटेल और जेपी नड्डा के पोसटर लगाये गये थे। ऐसे जिले के डीएम और प्रशासन को इस बात का इल्म नहीं था ये बात किसी के गले से नहीं उतर रही है।
पुल के हादसे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिना फ़िटनेस सर्टिफ़िकेट के इस ब्रिज को खोला गया? साथ ही, क्या पुल को मरम्मत के लिए निर्धारित समय से पहले जनता के लिए खोल दिया गया था?
ओरवा ग्रुप और मोरबी नगरपालिका के बीच 300 रुपये के स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर किए गए चार पन्नों के समझौते में टिकट की दरों का विवरण है.
बता दें कि इस पुल की मरम्मत में 8 से 12 महीने लगने का अनुमान था, फिर भी समझौते के सातवें महीने में ही इसे खोल दिया गया.
ओरेवा ग्रुप ने हादसे पर क्या कहा?
इन सवालों को लेकर ओरेवा ग्रुप के प्रमुख जयसुखभाई पटेल ने कहा, “ये लगभग 150 साल पुराना सस्पेंशन ब्रिज है जो मोरबी के राजा के समय का है. इसे रख-रखाव, संचालन और सुरक्षा के लिए 15 साल के लिए हमारी कंपनी को सौंपा गया. सरकार और मोरबी नगरपालिका के बीच चार पन्नों के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं.”
जयसुखभाई ने कहा, “ये सस्पेंशन ब्रिज मोरबी की पहचान है. पिछले छह महीने से ये मरम्मत के लिए बंद था. इसे बैठक के दिन जनता के लिए खोल दिया गया था.”
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