Edited By Shatakshi Asthana | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:
इस्लामाबाद
पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC in Ladakh) पर चीन के साथ सैन्य टकराव को लेकर बातचीत की कोशिश के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया। इसी कड़ी में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लद्दाख जा पहुंचे जहां से उन्होंने बिना नाम लिए चीन को लताड़ डाला। इधर लद्दाख में पीएम ने दौरा किया, उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक सुरक्षा बैठक कर डाली। बैठक के बाद बयान जारी कर कहा गया कि पाकिस्तान ‘अपनी संप्रभुता की रक्षा की क्षमता रखता है’। पाक की इस बैठक को भारत-चीन सीमा तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
‘पाक के पास है इच्छाशक्ति और क्षमता’
पाक के पीएम इमरान खान ने इस्लामाबाद में आंतरिक और बाहरी सुरक्षा स्थिति का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय रक्षा बैठक की अध्यक्षता की और देश की संप्रभुता की हर कीमत पर रक्षा करने का संकल्प लिया। एक बयान में बताया गया है, ‘संकल्प लिया गया कि पाकिस्तान अपने पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण सह अस्तित्व पर यकीन रखता है लेकिन हमारे लोगों और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए हमारे पास इच्छाशक्ति और क्षमता, दोनों हैं।’
‘पाकिस्तान की संप्रभुता की रक्षा का संकल्प’
एक सरकारी बयान में बताया गया कि बैठक में रक्षा मंत्री परवेज खट्टक, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी जनरल नदीम रज़ा और सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि समीक्षा के बाद, प्रतिभागियों ने हर कीमत पर पाकिस्तान की संप्रभुता की रक्षा करने का संकल्प लिया। बैठक में नौसेना प्रमुख एडमिरल जफर महमूद अब्बासी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल मुजाहीद अनवर और आईएसआई के निर्देशक फैज़ हामिद ने भी हिस्सा लिया।
भारत पर मढ़ा कराची हमले का आरोप
बैठक में पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज पर आतंकी हमला नाकाम करने के लिए कानून प्रवर्तक एजेंसियों की तारीफ की। स्टॉक एक्सचेंज पर इस हफ्ते हमला हुआ था जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले के बाद इमरान ने सीधा-सीधा आरोप भारत पर लगाया था और कहा था कि उनके कैबिनेट को इसकी जानकारी दो महीने पहले से थी। भारत ने कहा था कि पाक अपनी घरेलू परेशानियों का जिम्मा भारत पर न डाले।
FATF-US ने की थी पाक की आलोचना
कुछ दिन पहले ही फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखने का फैसला किया था क्योंकि वह लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को पहुंचने वाली फंडिंग पर नकेल नहीं कस पाया है। इससे पहले अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की ‘कंट्री रिपोर्ट्स ऑन टेररिज्म’ में कहा गया था कि भारत को निशाना बना रहे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को पाकिस्तान ने अपनी जमीन से ऑपरेट करने दिया।
पीएम के विस्तारवादी हमले से चीन को लगी मिर्ची
पीएम मोदी के दौरे से चीन को भी बुरी तरह छटपटाहट हो रही है और वह ‘दोस्ती’ का राग अलाप रहा है। भारत में चीन के राजदूत जी रॉन्ग ने कहा है, ‘ चीन ने अपने 14 में से 12 पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण समझौतों से सीमांकन किया है और जमीन पर सीमा को दोस्ताना सहयोग में बदला है। ऐसा कहना कि चीन विस्तारवादी है, पड़ोसियों के साथ मनगढ़ंत तरीके से विवाद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना आधारहीन है।’ दरअसल, पीएम मोदी ने अपने भाषण में बिना चीन का नाम लिए कहा था कि विस्तारवादी नीतियों अब नहीं चलेंगी।
इमरान खान







