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सात जुलाई बुधवार शाम छह बजे मोदी सरकार ने महा फेरबदल कर 78 सदस्यीय मंत्रिमंडल का गठन किया। इसमें पीएम ंने लोकजन शक्ति पार्टी के अध्यक्ष पशुपति नाथ पारस को खाद्य व प्रसंस्करण विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया है। इससे एलजेपी सांसद चिराग पासवान को भारी झटका लगा है। शपथ समारोह के पहले चिराग पासवान ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर यह अनुरोध किया था कि वो अपने मंत्रिमंडल में उनके चाचा पशुपति नाथ पारस को शामिल न करें। एलजेपी ने पारस को पार्टी से निकाल दिया है। लेकिन पीएम मोदी उनके चाचा को कैबिनेट मंत्री बना कर यह जता दिया है कि राम शक्तिहीनों का साथ नहीं देते है। उनके चाचा पारस के साथ चार और सांसद है। इससे एनडीए और भी ज्यादा मजबूत हो जायेगा। बुधवार को ही चिराग पासवान ने पारस के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक शिकायत दर्ज की है। लेकिन पीएम मोदी ने साफ कर दिया है कि संकट के समय में राम हनुमान के साथ नहीं खड़े हैं। इससे लग रहा है कि आगे अब राम और हनुमान के बीच राजनीतिक द्वंद्व देखने को मिल सकता है।
ताजा हालात में यह माना जा सकता है कि हनुमान का अब अपने राम से मोहभंग हो गया है। क्यों कि अब तक चिराग इस भ्रम में थे कि पीएम मोदी चिराग पासवान के बुरे समय में उनके साथ खड़े होंगे। चिराग ने पार्टी में दरार पैदा करने के लिये पहले नितीश कुमार को जिम्मेदार माना था। उन्होंने इस फूट में बीजेपी का हाथ होने से इनकार किया था। लेकिन अब उन्हें भी लगेगा कि लोक सभा स्पीकर ने उनकी पार्टी के पांच सांसदों के कहने पर उनकी पार्टी को मान्यता दे दी और सदन में नेता प्रतिपक्ष पद से चिराग को हटाते हुए पशुपति नाथ पारस को बना दिया। अध्यक्ष ने इतना बड़ा फैसला बिना मोदी और शाह की सहमति से नहीं लिया जा सकता है। मोदी सरकार में मंत्री बनने के बाद पारस ने कहा कि वो चिराग से राजनीति के हर मुकाबले के लिये तैयार है।
पांच जुलाई को चिराग पासवान ने अपने पिता राम बिलास पासवान की जयंती पर बिहार के हाजीपुर से आशीर्वाद का आयोजन किया था। इसमें भारी संख्या में उनके समर्थक जमा हुए। उनका मानना है कि उनकी ही पार्टी रियल लोजपा है। दूसरी ओर पारस ने लोजपा कार्यालय में राम बिलास पासवान की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित जिसमे काफी कम लोग ही जुट पाये थे। पीएम के इस रुख से साफ हो गया है कि बिहार की राजनीति में तेजस्वी ओर चिराग की जुगलबंदी देखने को मिल सकती है जिसका संकेत तेजस्वी ने पांच जुलाई को दे दिया था।








