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हार कर जीतने वाले को जादूगर कहते हैं
राजस्थान की राजनीतिक दुनिया में एक बार से ट्विस्ट आने वाला है। ऐसा राजनीतिक पंडित कयास लगा रहे हैं। यह आशंका जतायी जा रही है कि चुनाव भले ही बीजेपी ने जीता हो लेकिन वहां के सीएम का ऐलान दिल्ली दरबार नही कर पायेगा। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का दिल्ली जाना लोगों में यह अटकलें लगने लगी कि शायद महारानी मोदी शाह से मिलने गयी हैं। लेकिन महारानी ने साफ कर दिया कि वो अपनी बहू से मिलने दिल्ली गयी हैं। उन्हें इस बात की भनक लग गयी है कि दिल्ली दरबार उन्हें सीएम नहीं बनाने वाला है। इसलिये उन्होंने प्लान बी भी तैयार कर रखा है। इसके लिये उन्होंने पहले ही सेटिंग कर ली है। यह बात तो पहले से चर्चा में थी कि महारानी किसी भी सूरत में मोदी शाह के आगे झुकने नहीं वाली। आजकल कर उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमे वो किसी कांग्रेसी नेता को बधाई दे रही हैं। लोग बता रहे हैं वो सचिन पाइलेट से बात कर रही हैं। वैसे उनके रिश्ते पूर्व सीएम अशोक गहलौत से भी मधुर है। चुनाव से पहले भी वसुंधरा राजे ने लोकसभा में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि राजे और कांग्रेस के बीच में पहले से ही खिचड़ी पक रही थी। यह भी चर्चा है कि वसुंधरा कांग्रेस के साथ मिलकर प्रदेश की सरकार बनाने जा रही हैं। ताजा मामला यह है कि भाजपा के 60 विधायक गायब हैं। ये सभी विधायक वसुंधरा समर्थक हैं। इन सभी की मांग है कि मोदी शाह महारानी को सीएम बनायें अन्यथा प्लान बी तैयार है।

अब कोई गहलौत प्रदेश में सीएम नहीं बनेगा—पीएम मोदी
दिल्ली दरबार सीएम के लिये केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, ओम बिडला, अश्विनी वैष्णव, राज्यवर्धन सिंह राठौर, गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ योगी बालक नाथ राजकुमारी दीया व सीपी जोशी के नाम पर विचार कर रहा है। इन सबमे बालक नाथ का नाम सबसे ऊपर दिख रहा है उसके पीछे कारण यह है कि यूपी में योगी अदित्यनाथ बालकनाथ को काफी पसंद करते हैं और बालक नाथ योगी का सम्मान करते है। मोदी शाह की सोच है कि जिस तरह योगी यूपी में अजेय हो गये ठीक उसी तर्ज पर योगी बालक नाथ राजस्थान में अपना वर्चस्व करने में कामयाब हो जायेंगे। मोदी ने भी चुनावी सभा में यह कहा कि अब कोई अशोक गहलौत राजस्थान में सीएम नहीं बनने वाला है।
तीन प्रदेशों में सीएम का एलान क्यों नहीं किया
तीन दिसंबर को राजस्थान विधानसभा के चुनाव परिणाम घोषित हुए और इसमे कांग्रेस को भारी झटका लगा। भाजपा को बहुमत मिला। बीजेपी दिल्ली दरबार को लगा कि अब तो राजस्थान में जो वो चाहेंगे वो वही होगा। वहां की कमान कौन संभालेगा मोदी शाह तय करेंगे। लेकिन कभी कभी मनुष्य जो सोचता है वो उसका उल्टा होता है। आठ तारीख होने के बाद भी दिल्ली दरबार ये सोच नहीं पाया कि राजस्थान की कमान किसे सौंपी जाये। ऐसा ही कुछ हाल मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में हालात है। तीनों प्रदेश में किसे सीएम बनाया जाये मोदी शाह चार दिन बाद भी तय नहीं कर पाये हैं। रमन सिंह और शिवराज ने तो दिल्ली दरबार के आगे सिर झुका ही दिया है। लेकिन राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा ने अपने तेवर दिखा दिये हैं कि वो मोदी शाह के इशारों पर नहीं नाचेंगी। इस बात के संकेत उन्होंने चुनाव से पहले ही दिखा दिये थे। चुनाव परिणाम के बाद वसुंधरा समर्थक 60 विधायक जीत कर आये हैं इससे महारानी के तेवर और भी सख्त हो गये हैं। यह भी चर्चा है कि कांग्रेस वसुंधरा को समर्थन दे कर सीएम बनाने को तैयार हैं बशर्ते महारानी कांग्रेस मे शामिल हो जायें। कांग्रेस का बदला भी पूरा हो जायेगा। 2020 में भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को तोड़ कर मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरायी थी। इस बार कांग्रेस महारानी को अपने पाले में ला कर भाजपा को सबक सिखायेगी।







