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पंजाब के नये सीएम चरणजीत सिंहफ चन्नी बन चुके हैं। चन्नी के सीएम बनने के पीछे पीसीसी चीफ नवजोत सिंह सिद्धू की सिफारिश कांग्रेस आला कामान ने पूरी तरह से मान ली है। इतना ही नहीं सुखजिंदर सिंह रंधावा को भी उपमुख्यमंत्री बनवाने में सिद्धू सफल हुए हैं। यह दोनों नेता अमरिंदर सिंह के खिलाफ बगावत करने में सबसे आगे थे। दोनों ही सिद्धू के करीबी हैं। अब सिद्धू की जिम्मेदारी बनती है कि वो पंजाब में दोबारा कांग्रेस की सरकार बनवायें। आलाकमान यह मान ले कि पंजाब में कैप्टेन साहब आगामी चुनाव में सरकार बनवाने में कोई योगदान करेंगे। क्यों कप्तान साहब ने साफ तौर पर यह कहा कि उन्हंे अपमानित करने की साजिश की गयी है। वो उसे भुला नहीं सकते हैं। आला कमान से उन्होंने साफ कह दिया कि सिद्धू को अगर पंजाब का फेस बनाया गया तो वो उसका पुरजोर विरोध करेंगे।
पिछले चार माह से पंजाब कांग्रेस सरकार हिचकोले खा रही थी। पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह और पीसीसी चीफ नवजोत सिद्धू के बीच 36 का आकंड़ा चल रहा था। कैप्टेन इतना ज्यादा परेशान हुए कि उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा ही दिया। उन्होंने आला कमान सोनिया गांधी से चिट्ठी लिखकर कह दिया कि मैं इस्तीफा दे रहा हूं अब जिस पर विश्वास हो उसे सीएम बना लें। मुझसे इतनी जिल्लत अब बर्दाश्त नहीं होती है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वो अभी भी कांग्रेस में हैं। लेकिनं पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आगे की राजनीति के लिये अपने दोस्तों और समर्थकों से सलाह करने के बाद तय करेंगे। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अमरिंदर सिह पिछले 52 सालों से राजनीति में रहे हैं वो इतनी आसानी से राजनीति से बाहर होंगे। वैस्े उन पर हमेशा यह आरोप लगा है कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अकाली दल के बादलों के खिलाफ कोई सख्त ऐक्शन नहीं लिया। वो अकाली दल में भी शामिल हो सकते हैं। लेकिन इसकी उम्मीद काफी कम दिख रही है। भाजपा के बडे़ नेताओं और मंत्रियों से भी उनकी अच्छी बनती है। यह भी कयास लग रहे हैं कि वो भाजपा में भी जा सकते है। लेकिन अभी यह दूर की कौड़ी है। तीसरा विकल्प यह कि वो अपनी ही कोई पार्टी बना कर आगामी विधानसभा चुनाव उतर जायें। लेकिन उसके लिये अमरिंदर सिंह के पास समय नहीं है कि वो कांग्रेस, आप और अकाली दल को टक्कर दे सकें। आलाकमान को भी कप्तान की बातों का मतलब समझ में आ रहा है। इसलिये बहुत ही सोच समझ कर पार्टी की ओर से बयान दिये जा रहे हैं। सीधे तौर पर कप्तान साहब को निशाना नहीं बनाया जा रहा है।








