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पंजाब में कांग्रेस की हालत सांप छछूंदर की हो गयी है। सिद्धू का इस्तीफा स्वीकार करें तो एक तेज तर्रार नेता कम हो जायेगा। और न माने तो पार्टी के अंदर कलह और भी बढ़ जायेगी। पंजाब में कई मंत्रियों और नेताओं ने सिद्धू के समर्थन में इस्तीफे दे दिये हैं। इन हालातों में कांग्रेस के लिये आगामी चुनाव में जीत हासिल करना असंभव है। दो माह पहले कांग्रेस यह मान कर चल रही थी कि पंजाब में उनकी दोबारा सरकार बनने जा रही है लेकिन आज के परिवेश में कांग्रेस को अपनी साख बनाये रखना भी मुश्किल हो रही है। 20-25 दिनों के भीतर पंजाब कांग्रेस में हड़कंप मच गया है।
पंजाब के सीएम ने यह कहते हुए पद से इस्तीफा दे दिया कि उनका अपमाल किया जा रहा है। 52 साल की राजनीति में उन्हें इतना शर्मिंदा कभी भी नहीं होना पड़ा। केन्द्रीय नेतृत्व पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी में सीनियर नेताओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है जो उन्हें बर्दाश्त नहीं है। आगे की योजना वो अपने साथियों और कार्यकर्ताओं से मिलकर बनायेंगे। फिलहाल वो कांग्रेस में हैं। लेकिन कैप्टेन की बातों में कितनी सच्चाई रही, यह उनके हाल के दिल्ली उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर एक घंटे बातचीत की। कहने को तो यह कहा कि उन्होंने पंजाब के किसानों और 3 कृषि कानूनों को लेकर बात की। लेकिन सियासी जगत में यह चर्चा तेज है कि कैप्टेन साहब अपनी अगली पारी भाजपा के साथ शुरू करने की जमीन तलाश रहे है।
भाजपा के लिये भी पंजाब में अपनी पार्टी को जमाने के लिये कैप्टेन सरीखा अनुभवी और रसूखदार नेता मिल सकता है। वहीं कैप्टन साहब के लिये एक एसी पार्टी मिल जायेगी जिसकी केन्द्र में सरकार है। पार्टी का संगठन और कार्यकर्ता भी कैप्टन की मदद करने को तैयार रहेंगे। आगामी चुनाव में एक बार फिर कैप्टन अपनी योग्यता सिद्ध कर सकते हैं। इस तरह से अमरिंदर सिंह कांग्रेस को भी मुंह तोड़ जवाब दे सकते हैं कि आदमी अपने बल पर भी सत्ता प्राप्त कर सकता है। वहीं बीजेपी को भी पंजाब में अपनी जड़े मजबूूत करने का सुनहरा मौका मिल सकता है।








