Rajasthan Crisis Latest Update: बीएसपी विधायकों के कांग्रेस में विलय को लेकर मामला गरमाता जा रहा है। राजस्थान हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई हैं, एक याचिका बीजेपी विधायक मदन दिलावर ने दायर की है, जबकि दूसरी याचिका बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा ने दायर की है। इस बीच विलय करने वाले विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।
Edited By Ruchir Shukla | भाषा | Updated:
- राजस्थान में सियासी घमासान का दौर लगातार जारी
- कांग्रेस में विलय करने वाले बीएसपी के 6 विधायक पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
- विधायकों की राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित अयोग्यता याचिका को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की अपील
- राजस्थान हाईकोर्ट में दायर की गई हैं दो याचिकाएं
नई दिल्ली
राजस्थान में जारी सियासी घमासान (Rajasthan Political Crisis) थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP MLA) के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस में शामिल होने वाले 6 विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख किया है। उन्होंने सर्वोच्च अदालत से अनुरोध किया है कि पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने को लेकर उनके खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित अयोग्यता याचिका को अपने पास ट्रांसफर कर लें।
अयोग्यता याचिका को ट्रांसफर करने की अपील
बीएसपी विधायकों ने दलील दी है कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता पर सवाल उठाने वाली इसी तरह की याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इसलिए, राजस्थान उच्च न्यायालय में उनके खिलाफ दायर याचिका शीर्ष कोर्ट में स्थानांतरित की जानी चाहिए। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि यह न्याय के हित में होगा कि यह विषय सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित किया जाए। वहां दायर इसी तरह की याचिकाओं के साथ उसकी भी सुनवाई की जाए।
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6 विधायकों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में दो याचिकाएं
राजस्थान हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई हैं, एक याचिका बीजेपी विधायक मदन दिलावर ने दायर की है, जबकि दूसरी याचिका बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा ने दायर की है। मदन दिलावर ने बीएसपी विधायकों के कांग्रेस में विलय को चुनौती देते हुए विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के उस आदेश पर सवाल उठाए हैं जिसके तहत उन्होंने उनका पक्ष सुने बगैर उनकी शिकायत खारिज कर दी। सतीश मिश्रा ने विधायकों के दल-बदल को चुनौती दी है लेकिन उन्होंने इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट स्थानांतरित किए जाने की मांग नहीं की है।
बीएसपी विधायकों के कांग्रेस में विलय को लेकर विवाद
वहीं विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के फैसले से नाखुश दिलावर ने इस आधार पर रिट याचिका दायर की है कि बीएसपी का कांग्रेस में विलय नहीं हुआ है। इस तरह 10वीं अनुसूची के तहत यह अपवाद का विषय नहीं हो सकता। बीएसपी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा कि दिलावर और अन्य प्रतिवादियों ने यह सवाल उठाया है कि इस तरह की याचिकाएं पहले से उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे विधायकों ने याचिका में क्या कहा
याचिका में कहा गया है, ‘इस बात का जिक्र करना भी जरूरी है कि 10वीं अनुसूची के चौथे पैराग्राफ का दायरा और अभिप्राय के संबंध में कानून को स्पष्ट करने की जरूरत है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि संविधान की व्याख्या के संबंध में विरोधाभासी फैसले नहीं हैं।’ इसमें कहा गया कि मौजूदा मामले में बीएसपी का समूचा विधायक दल कांग्रेस विधायक दल में विलय कर गया और इसलिए 10वीं अनुसूची के चौथे पैराग्राफ में निर्धारित प्रावधान अयोग्यता का मार्ग प्रशस्त नहीं करता है। हाईकोर्ट ने बीएसपी विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने को चुनौती दने वाली याचिकाओं पर 30 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष और इसके सचिव का जवाब मांगा था।
बीएसपी के ये विधायक 2019 में हुए थे कांग्रेस में शामिल
संदीप यादव, वाजिब अली, दीपचंद खेरिया, लखन मीणा, जोगेंद्र अवाना और राजेंद्र गुढ़ ने 2018 का विधानसभा चुनाव बीएसपी के टिकट पर लड़ा था लेकिन बाद में वे दल-बदल कर सितंबर 2019 में कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने कांग्रेस में विलय के लिये एक अर्जी भी दी और स्पीकर ने उनके कांग्रेस में शामिल होने को दो दिन बाद अनुमति दे दी। इस विलय से राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार को मजबूती मिली और 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस की संख्या बढ़ कर 107 हो गई। इस बीच, सचिन पायलट और 18 अन्य विधायकों के बगावत करने के बाद राज्य में जारी राजनीतिक संकट शुरू हो जाने के बाद यह घटनाक्रम हुआ है।







