राजस्थान में सियासत (Rajasthan news) में पल- पल बदलती राजनीति लगातार राजनैतिक माहौल में गर्माहट पैदा कर रह है। सचिन पायलट खेमे (sachin pilot)में न्यायालय (rajasthan high court ) की ओर से 24 जून तक राहत मिलने के बाद अब पायलट खेमा भी गहलोत सर्मथक विधायकों (gehlot sarkar) को घेरने में लग गए हैं। वहीं राज्य सरकार (rajasthan government )भी केन्द्र (modi sarkar) की ओर से पूछे जा रहे सवालों को जवाब देने में जुटी है।
Edited By Khushendra Tiwari | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:
जयपुर।
प्रदेश के सियासी संग्राम के बीच जहां राजस्थान हाइकोर्ट (rajasthan high court ) की ओर से पायलट खेमे को 24 जुलाई तक फौरी राहत मिल गई है। वहीं प्रदेश के ऐसे कई सियासी घटनाक्रम है, जो तेजी से बदल रहे हैं। हाइकोर्ट की ओर से 24 जुलाई तक फैसले को सुरक्षित रखने का सूचना के बाद सीएम अशोक गहलोत ने विधायकों को यह सूचना दी है कि फिलहाल अभी भी उन्हें कुछ दिनों बाड़ाबंदी में ही रहना होगा। मिली जानकारी के अनुसार विधायक दल की बैठक में उन्होंने विधायकों से यह बात कहीं। वहीं इस मामले में अब पायलट खेमा भी विधायकों को घेरने में जुट गया है।
अपडेट 9.00 नोटिस देने पर कोर्ट का हस्तक्षेप करना संसदीय लोकतंत्र के लिए खतरा- जोशी
राजस्थान में सियासत हाईकोर्ट की ओर से फैसला के बाद फिर नए रंग में बदलती नजर आ रही है। अब विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह साफ कर दिया है कि वो राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। सियासी संग्राम के बीच जोशी ने भी चुप्पी तोड़ते हुए मीडिया के सामने यह साफ किया है कि उन्होंने कांग्रेस के बागी विधायकों को नोटिस क्यों दिया था। जोशी ने कहा कि नोटिस देना स्पीकर का काम है। मैंने सिर्फ कारण बताओ नोटिस दिया था, इसमें निर्णय नहीं लिया गया था, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण जिसे लेकर पायलट खेमा हाईकोर्ट दिया था। वहीं यह मामला पहले सिंगल बेंच से डिविजन में चला गया। समझने की जरूरत यह है कि कोर्ट ने जो भी जजमेंट दी, मैंने उसका सम्मान किया , लेकिन स्वीकार्यता में अगर एक अथॉरिटी दूसरी अथॉरिटी के रोल में अतिक्रमण करें, तो यह संसदीय लोकतंत्र के लिए यह खतरा है। लिहाजा इस तरह के कॉन्स्टीट्यूशनल क्राइसेस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी लगाने को लेकर विचार कर रहा हूं। मेरा मानना है कि अथॉरिटी की गरिमा को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। अगर विधानसभा स्पीकर निर्णय कर ले , तो दूसरी अथॉरिटी के पास जाना उचित है। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष पद की गरिमा को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
अपडेट 9.00 राज्य़ सरकार ने भेजा केन्द्र को फोन टैपिंग मामले का जवाब
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से प्रदेश के सियासी संग्राम के बीच फोन टेपिंग मामले में की रिपोर्ट राज्य सरकार की ओर से दे दी गई है। केन्द्र सरकार की ओर से तीन दिन पहले इसकी रिपोर्ट मांगी गई थी। राज्य सरकार की ओर से भेजे गए जवाब के बाद में कहा गया है कि फोन टेपिंग में सरकार पूरी प्रक्रिया की पालना करती है और गृह सचिव से अनुमति लेने के बाद ही पुलिस फोन टेप करती है। आपको बता दें कि विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर तीन ऑडियो वायरल हुए थे, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने मुख्य सचिव को इस संबंध में नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।
अपडेट 8.40 मंलिगा को सचिन पायलट ने भेजा मानहानि का नोटिस
प्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच जहां गहलोत और पायलट खेमे अब एक दूसरे पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, वहीं धौलपुर के बाड़ी के कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा के सचिन पायलट पर सीधे सरकार गिराने के लिए करोड़ों रूपए ऑफर करने का आरोप लगाने के बाद अब सचिन पायलट की ओर से मंगलवार को मलिंगा को लीगल नोटिस भेजा गया। मीडिया रिपोटर्स के अनुसार सचिन के नजदीकी सूत्रों ने मानहानि के नोटिस देने की पुष्टि कर दी है।
अपडेट 8.30 कुछ दिन और बाड़ेबंदी में रहना होगा – गहलोत
हाईकोर्ट की ओर से नोटिस मामले में फैसला सुरक्षित रखने के साथ ही सीएम अशोक गहलोत ने भी विधायकों को कुछ दिन और बाड़ाबंदी में गुजारने की गुजारिश की। उन्होंने विधायकों से कहा कि कुछ दिन और बाड़ाबंदी में रहना होगा, डटे रहें, जीत हमारी ही होगी। मीडिया रिपोटर्स की मानें, तो गहलोत ने कहा कि सत्य ईश्वर है और ईश्वर ही सत्य है। सत्य हमारे साथ है, लिहाजा हर हाल में जीत हमारी होगी।







