Edited By Khushendra Tiwari | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:
राजस्थान की सियासत किस करवट लेगी, इसे तय करना अभी मुश्किल है। प्ल-पल बदलती प्रदेश की राजनीति में हर रोज नया मोड सामने आने लगा है। एक बार फिर सचिन पायलट और अशोक गहलोत की ओर से विधायकों को अपनी ओर खींचने के प्रयास बढ़ने लगे हैं। इस संबंध में दोनों की खेमों से सूचना आ रही है कि विधायक उनके संपर्क में हैं। आपको बता दें कि कल जैसे ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेका रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पायलट खेमे में तीन विधायक अगले 24 घंटे में हमारे साथ होंगे , तो पायलट खेमे की ओर से भी उनके 13 विधायकों के होने का दावा कर दिया गया। वहीं राजस्थान के मौजूदा सियासी हालात में राज्यपाल की ओर से विधानसभा सत्र के लिए 21 दिन का नोटिस देने की बात कहने के बाद गहलोत सरकार ने वर्तमान परिस्थितयों से राष्ट्रपति को अवगत करवाने के साथ उनसे दखल की गुहार लगाई है।
अपडेट @ 10.00 AM : विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर राज्यपाल की आपत्तियों पर चर्चा आज
गहलोत सरकार लगातार इस कोशिश में जुटी हुई है कि जल्द से जल्द विधानसभा का सत्र बुलाया जाए। राज्यपाल की ओर से संशोधित प्रस्ताव में भी जताई आपत्तियों पर कांग्रेस की ओर से आज चर्चा की जाएगी। सीएम आवास पर होने वाली इस चर्चा में सचिवालय के काम काज और प्रदेश सरकार के कोरोना प्रबंधन को लेकर भी बात होगी। मंत्रियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।
अपडेट @ 08. 25 AM :गहलोत ने विधानसभा सत्र देरी को बताया साजिश
राज्यपाल कलराज मिश्र की ओर से प्रस्ताव लौटाने के बाद लगातार मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। इसी बीच गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा सत्र में देरी के लिए साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा जितनी ज्यादा देरी होगी, विधायकों को तोड़ना उतना ही आसान होगा। गहलोत ने अपने बयान में कहा कि बीजेपी का एकमात्र मकसद है कि किसी तरह भी हॉर्स ट्रेडिंग के जरिए विधायकों को तोड़ा जाए।
अपडेट @ 08. 15 AM : तीन पूर्व कानून मंत्रियों ने राज्यपाल से आग्रह
राजस्थान में विधानसभा सत्र को बुलाए जाने को लेकर हुई तनातनी के बाद अब यूपीए सरकार में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद और अश्वनी कुमार ने भी राज्यपाल को चिट्ठी लिख सत्र बुलाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं करने पर संवैधानिक संकट पैदा हो जाएगा।
अपडेट @ 08.10 AM :सात दिनों में एक सत्र बुलाने के बाद विश्वास मत लेने की हो सकती है तैयारी – सूत्र
सूत्रों ने कहा कि गहलोत सरकार की ओर से भेजे गए ताजा प्रस्ताव में सात दिनों के नोटिस पर एक सत्र बुलाया जा सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि सत्र एक बार शुरू होने के बाद दोबारा विश्वास मत को लेकर प्रयास किए जा सकते हैं।
अपडेट @ 08.08 AM :शॉर्ट नोटिस में विधानसभा सत्र बुलाने से राज्यपाल ने किया इनकार
गहलोत सरकार की ओर से संशोधित कैबिनेट प्रस्ताव भेजे जाने के बाद राज्यपाल में दो दिन के शॉर्ट नोटिस पर सत्र बुलाने से इनकार करते हुए प्रस्ताव लौटा दिया है। राज्यपाल के कुछ शर्तों के साथ सत्र बुलाने की मंजूरी दी है, जिसमें 21 दिन के नोटिस के अलावा , विश्वास मत की वीडियो रिकॉर्डिंग और सोशल डिस्टेसिंग अनुपालना जैसे कई बिन्दुओं को जोड़ा गया है। इन सभी बिन्दुएओं के पालन के बाद विधानसभा में कोरोना महामारी और राज्य के वित्त व अन्य विधेयकों को पारित करने को लेकर चर्चा की जा सकेगी।







