Sr. Advocates Mehmood Parcha & Bhanu Pratap lead protest against evm & Election Commission
Sr. Advocates Mehmood Parcha & Bhanu Pratap lead protest against evm & Election Commission

#Election Commission of India# Ban Demand of EVM# Sr. SC Advocate Narendra Mishra writ# Sureme Court# MP, Rajsthan & Chhattisgarh Elections 2023# Forgery in Vote Counting# Modi Govt.#

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेशए छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनावों में ईवीएम में धांधली और चुनाव आयोग की मनमानी की शिकायत की है। उन्होंने मांग की है कि जब तक चुनाव आयोग 15 हजार शिकायतों का निस्तारण नहीं करता और ईवीएम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध नहीं लगाता है तब तक चुनाव परिणामों को रोक लगा दे। वकील नरेंद्र मिश्र कहते हैं सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पिटीशनर को हक है कि चुनाव आयोग से जानकारी मांग सकता है कि ईवीएम पर जब सवालिया निशान लग रहे हैं तो वो ईवीएम के बारे में पूरी जानकारी दे कि इसमें किस प्रकार का चिप लगा है इसमे किस प्रकार का टूल इस्तेमाल किया जा रहा है। श्री मिश्र ने कहा कि एक जगह चुनाव में धांधली पकड़ में आयी है कि वोटर मात्र 90 थे। ईवीएम में वोट 170 पाये गये। इसी प्रकार की शिकायते चंडीगढ़़ मध्यप्रदेशए राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मिली है।

Affter demostration against evm ECI has started working process of EVM in public place
Affter demostration against evm ECI has started working process of EVM in public place

दिलचस्प बात यह है कि नरेंद्र मिश्र जो डाटा प्रेस के सामने रख रहे हैं वो सभी चुनाव आयोग की वेबसाइट से ही लिये गये हैं। चुनाव आयोग से श्री मिश्र ने यह मांग की है कि इन आंकड़ों को वेबसाइट पर सही कर डाला जाये। साथ ही वो देशवासियों से इस प्रकार की धांधली के लिये माफी मांगे। अगर ऐसा हो रहा है तो साफ हो गया है कि इस तरह की धांधली कर सत्ताधारी दल को जिताने की साजिश कर रहा है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी प्रश्न लग रहा है।
हाल ही में पिछले साल नवंबर में राजस्थानए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव हुए जिनका रिजल्ट 3 दिसंबर को चुनाव आयोग ने ऐलान किये। इन तीनों प्रदेशों में भाजपा की सरकारें बनीं। लेकिन रिजल्ट के ठीक एक दिन बाद सुप्रीम कोर्ट के एक वकील नरेंद्र मिश्र ने चुनाव में भारी धांधली का आरोप लगाते हुए सुप्रीमकोर्ट में एक रिट सबमिट की है रिट में सुप्रीमकोर्ट ने शिकायत को दर्ज भी कर लिया है। चुनाव परिणाम आने के बाद आयोग के डिजिटल डाटा भी पूरी तरह फेक पाया गया।

AAP workers protested for ban EVM at Jantar mantar
AAP workers protested for ban EVM at Jantar mantar

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर आंकड़े फरेबीःऐडवोकेट नरेंद्र मिश्र
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील नरेद्र मिश्र ने यह बताया कि उन्होंने पिछले कई माह तक चुनाव आयोग की वेबसाइट के चुनावी परिणाम के आंकड़ों का अध्यन किया और यह निष्कर्ष निकाला कि दिये गये आंकड़े और सूचनाएं ठीक नहीं हैं। इसके अलावा तीन राज्यों के चुनाव प्रचार के दौरान चुनाव आयोग से धांधली और अनियमितताओं की 15 हजार शिकायतें मधप्रदेश पोर्टल पर की गयी थी। लेकिन चुनाव आयोग ने किसी भी शिकायत पर कोई सुनवायी नहीं की। इसके उलट तीन दिसंबर को चुनाव के परिणाम घोषित कर दिये। इन्ही सब शिकायतों को ले कर एडवोकेट नरेंद्र मिश्र सुप्रीम कोर्ट पहुंच गये। सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी शिकायत पर गंभीरता से ध्यान देने का अश्वासन दिया। यह साथ उनकी शिकायत पर सुनवायी करने की बात कही। अब यह बात और हे कि सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग पर कार्रवाई क्या करता है या अन्य मसलों की तरह ढीला ढाला रवैया अपनाता है।
आंकड़ो ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता की पोल खोली
नरेंद्र मिश्र ने अपनी रिसर्च के आधार पर बताया कि तीनों प्रदेशों में चुनावों के जो परिणाम चुनाव आयोग ने अपनी वेबसाइट पर दिखाये हैं। वो वास्तविकता से परे हैं। श्री मिश्र ने कहा कि चुनाव आयोग ने तीन प्रकार गल्तियां की पहला चुनाव के दौरान आयोग ने काफी लापरवाही बरतीं ओर सत्ता पक्ष को सहूलियतें प्रदान कीं। दूसरी यह कि आयोग ने चुनाव प्रचार के दौरान अनियमितताओं की शिकायत पर कोई कार्रवाई नही की। तीसरा ये कि ईवीएम में जो साफ्टवेयर के जरिये जो धांधली की उस पर आयोग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके साथ ही ईवीएम की शिकायतों पर आयोग कभी संजीदा नहीं दिखा और न ही उस पर कोई खुलासा किया गया। श्री मिश्र ने चुनाव आयोग पर यह भी आरोप लगाया कि आयोग ने भयमुक्त और पारदर्शी चुनाव नहीं कराया। एडवोकेट नरेंद्र मिश्र ने कहा कि मध्य प्रदेश में चुनाव आयोग ने 230 सीटों पर कराया। परिणाम में 153 सीट पर भाजपा के प्रत्याशी जीते बताये गये। जबकि 69 सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशियों को जीता बताया गया। श्री मिश्र ने ख्ुालासा किया कि आयोग ने जिस तरह वोटों का डाटा अपने पोर्टल पर डाला वो पूरी तरह से फेक मिला। मिश्र ने चुनाव आयोग से कहा कि आपके दिये गये चुनाव परिणाम के डाटा में भारी अनियमितताएं हैं उन्हें सही कर लें। लेकिन चुनाव आयोग ने इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। यह भी कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला था। अतः दोनों दलो के जीते हुए प्रत्याशियों के बीच का अंतराल एक होना चाहिये। लेकिन आपकी वेबसाइट पर वोटों का अंतराल लाखों में देखा जा रहा है।

राजस्थान में 199 सदस्यों की विधानसभा है जिसमें 115 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई। जबकि 69 सीटो पर कांग्रेस के उम्मीदवार जीते हैं। बीजेपी के उम्मीदवारों को 44 लाख वोट मिले हैं लेकिन कांग्रेस के उम्मीदवारों को लगभग 28 लाख वोट मिले हैं। भाजपा को 199 सीटों पर 1 करोड़ 56 लाख वोट मिले हैं जबकि कांग्रेस को 199 सीटों पर अंतराल 9 लाख का मार्जिन मिला है। ठीक ऐसा ही कुछ हाल मध्यप्रदेश और छत्तीस गढ़ में धांधली पायी गयी है। नरेंद्र मिश्र ने कहा कि परिणाम में यह देखने को मिला है बहुत प्रत्याशी 500 से कम वोटों से हार गये ओर सत्ताधारी दल के उम्मीदवार जीत गये हैं।

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