बाबरी विध्वंस के वक्त नरसिम्हा राव थे पीएम

युसरा हुसैन, लखनऊ

अयोध्या में पांच अगस्त को होने वाले राम मंदिर भूमि पूजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ था। उस वक्त पीवी नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री थे। बताया जा रहा है कि नरसिम्हा राव ने राम मंदिर प्रॉजेक्ट के मुख्य शिल्पकार चंद्रकांत भाई सोमपुरा से मस्जिद को लेकर सवाल पूछा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस वक्त नरसिम्हा राव ने पूछा था कि क्या मस्जिद भी इस प्लान का हिस्सा हो सकती है। राव ने पूछा कि क्या बाबरी मस्जिद और राम मंदिर दोनों एक-दूसरे के अगल-बगल नहीं हो सकते हैं।

राव के इस सवाल पर 77 साल के शिल्पकार सोमपुरा ने अपनी राय देते हुए इशारा किया था कि मस्जिद जहां है वहीं बरकरार रखी जा सकती है। वहीं राम मंदिर का निर्माण राम चबूतरा के आगे से हो सकता है। लेकिन इस विचार पर आगे बात नहीं बढ़ सकी क्योंकि विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने इसका विरोध किया।

अहमदाबाद से चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने मुझे फोन किया। उन्होंने मुझसे पूछा कि तीन खास गुंबदों वाली बाबरी मस्जिद क्या राम मंदिर के साथ डिजाइन का हिस्सा हो सकती है। मैंने वीएचपी को इस विचार के बारे में जानकारी दी, जिन्होंने मुझे इस प्रॉजेक्ट के काम में लगाया था। लेकिन वीएचपी ने इस सुझाव का विरोध किया और वह विचार उसी वक्त दफन हो गया।’

सोमपुरा ने साथ ही कहा, ‘वीएचपी इस बात पर अड़ी थी कि अगर 6×3 फुट की खटिया (बिस्तर) वाली जगह राम मंदिर के केंद्र में नहीं होगी तो फिर इस बात के कोई मायने नहीं हैं कि कहां राम मंदिर बनता है। उनका मानना है कि भगवान राम का जन्म इसी स्थान पर हुआ था। वीएचपी का कहना था कि राम मंदिर उसी जगह पर बनना चाहिए जहां विवादित ढांचा था। वे मानते हैं कि भगवान राम का जन्म मुख्य गुंबद के ठीक नीचे वाले हिस्से में हुआ था।’

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दशकों से चले आ रहे राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में फैसला सुनाया था। अदालत ने 2.77 एकड़ की जमीन राम मंदिर के पक्षकारों को सौंपने और राम मंदिर के लिए ट्र्स्ट बनाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय को मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन विवादित स्थल से अलग देने का फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनाया। इस ट्र्स्ट की तरफ से 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन का कार्यक्रम रखा गया है। इसमें पीएम नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत 200 बड़ी हस्तियों के हिस्सा लेने की संभावना है।



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