Edited By Sudhakar Singh | टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

1990 में आडवाणी ने शुरू की रथयात्रा
हाइलाइट्स

  • 1984 तक राम जन्मभूमि का मुद्दा बीजेपी के मूल मुद्दों में नहीं था
  • आम चुनाव के बाद बीजेपी ने हिंदुत्व की सियासत पर फोकस किया
  • 1986 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में खुला विवादित स्थल का ताला
  • 1989 में आडवाणी बने बीजेपी अध्यक्ष, 1990 में रथयात्रा से बना माहौल

लखनऊ

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की 6 अप्रैल 1980 को स्थापना हुई थी। इसके चार साल बाद 1984 तक ‘राम जन्मभूमि की मुक्ति’ के बारे में पार्टी ने कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई थी। उस वक्त विवादित जमीन पर बाबरी मस्जिद थी। 1984 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी।

1984 के आम चुनाव में बीजेपी को महज दो सीटें हासिल हुईं। वहीं, कांग्रेस ने 414 सीटों पर कब्जा जमाते हुए अभूतपूर्व जीत हासिल की। उस वक्त पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी ने हिंदुत्व की सियासत पर फोकस किया। चुनाव में लगे बड़े झटके के बाद बीजेपी ने अपने वैचारिक करीबी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ राम मंदिर आंदोलन में पूरी ताकत झोंक दी।

मंदिर आंदोलन जैसे-जैसे परवान चढ़ा, कांग्रेस ने 1986 में विवादित स्थल के ताले खुलवा दिए। इस कदम से आंदोलन और तेज होता चला गया। हकीकत में राम मंदिर आंदोलन के इतिहास में 22-23 दिसंबर 1949 के बाद ताला खुलना सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव था। मुस्लिम पक्ष का आरोप था कि इस दौरान बाबरी मस्जिद की मुख्य गुंबद के नीचे चुपके से राम की मूर्तियां रख दी गईं।

1989 के पालमपुर अधिवेशन में बीजेपी ने राम जन्मभूमि को मुक्त कराने और विवादित स्थल पर भव्य राम मंदिर के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया। राम मंदिर के मुद्दे को बीजेपी ने अपने मुख्य राजनैतिक अजेंडे में शामिल किया। इसके साथ ही कट्टर हिंदुत्व का चेहरा माने जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। इसके साथ ही आडवाणी ने राम मंदिर के पक्ष में माहौल बनाने के लिए 1990 में रथयात्रा शुरू कर दी।

1990 में राम मंदिर आंदोलन में टर्निंग पॉइंट आया जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने राम जन्मभूमि में इकट्ठा कारसेवकों पर फायरिंग का आदेश दिया। उसी दौरान बिहार के तत्कालीन मुख्मंत्री लालू प्रसाद यादव ने रथयात्रा को समस्तीपुर में रुकवा दिया। आडवाणी गिरफ्तार कर लिए गए।

बीजेपी बड़ी राजनैतिक छलांग लगाने की ओर बढ़ रही थी लेकिन इसी बीच 1991 के आम चुनाव के दौरान राजीव गांधी की हत्या हो गई। नतीजों में बीजेपी 123 सीटों पर ठहर गई। हालांकि इसी दौरान बीजेपी ने फायरब्रैंड कल्याण सिंह के नेतृत्व में यूपी में सरकार बना ली। इसके बाद राम मंदिर के लिए आंदोलन का नया मंच तैयार हो गया। 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों की उन्मादी भीड़ ने विवादित स्थल को तोड़ दिया। इसके बाद जो हुआ वह इतिहास है।



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