अरबपति उद्योगपति मुकेश अंबानी की नवगठित ऊर्जा कंपनी रिलायंस न्यू एनर्जी सोलर लि. (आरएनईएसएल) ने अपना पहला अधिग्रहण करने की घोषणा की है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी आरएनईएसएल ने 77.1 करोड़ डॉलर में आरईसी सोलर को खरीदा है। कंपनी ने रविवार को यह जानकारी दी।
     
कंपनी ने एक बयान में कहा , ”आरएनईएसएल ने चाइना नेशनल ब्लूस्टार (ग्रुप) लि. से 77.1 करोड़ डॉलर के उपक्रम मूल्य पर आरईसी सोलर होल्डिंग्स एएस (आरईसी ग्रुप) की 100 प्रतिशत शेयरधारिता का अधिग्रहण किया है।” अंबानी ने बयान में कहा, ”यह (अधिग्रहण) इस दशक के अंत तक 100 गीगावॉट स्वच्छ और हरित ऊर्जा को हासिल करने के रिलायंस के लक्ष्य को पाने के लिए नई और उन्नत प्रौद्योगिकियों और परिचालन क्षमताओं में निवेश करने की हमारी रणनीति के अनुरूप है।”
     
उन्होंने ने कहा, ”हाल में हमारे दूसरे निवेशों के साथ, रिलायंस अब वैश्विक स्तर पर एकीकृत फोटोवोल्टिक गीगा फैक्ट्री स्थापित करने और भारत को सबसे कम लागत और उच्चतम दक्षता वाले सौर पैनलों का विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए तैयार है।” उन्होंने आगे ने कहा कि उनकी फर्म भारत और विदेशी बाजारों में ग्राहकों को विश्वसनीय और सस्ती बिजली देने के लिए वैश्विक खिलाड़ियों के साथ निवेश और सहयोग करना जारी रखेगी।

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आरईसी का मुख्यालय नॉर्वे में है। इसका परिचालन वाला मुख्यालय सिंगापुर में तथा क्षेत्रीय केंद्र उत्तरी अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया-प्रशांत में हैं। आरईसी ग्रुप एक अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा कंपनी है। यह अपने प्रौद्योगिकी नवोन्मेषण के जरिये उद्योग की अगुवाई करती है। इस 25 साल पुरानी कंपनी के तीन विनिर्माण संयंत्र हैं। इनमें से दो नॉर्वे में हैं जहां सौर ग्रेड पोलिसिलिकॉन बनाया जाता है। एक संयंत्र सिंगापुर में है जहां पीवी सेल्स और मॉड्यूल्स बनते हैं। 
     
बयान में कहा गया है, ”रिलायंस मजबूती से आरईसी के विस्तार की योजना का समर्थन करेगी। इसमें सिंगापुर में 2-3 जीडब्ल्यू सेल्स और मॉड्यूल क्षमता, फ्रांस में नयी 2 जीडब्ल्यू सेल्स और मॉड्यूल इकाई तथा अमेरिका में एक अन्य 1 जीडब्ल्यू मॉड्यूल संयंत्र शामिल हैं।” भारत में रिलायंस की योजना उद्योग की इस अगुवा प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल अपने जामनगर के धीरूभाई अंबानी हरित ऊर्जा गीगा परिसर में करने का है। 
     
आरईसी के अधिग्रहण से रिलायंस को वैश्विक स्तर पर तैयार मंच उपलब्ध होगा और वह दुनियाभार में महत्वपूर्ण हरित ऊर्जा बाजारों में विस्तार कर सकेगी। इन बाजारों में अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के अन्य स्थान शामिल हैं।

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