रिलायंस-फ्यूचर ग्रुप की डील पर अमेजन का अड़ंगा बरकरार है। इस बीच, मुकेश अंबानी की रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (आरआरवीएल) ने फ्यूचर ग्रुप के साथ अपने सौदे को पूरा करने के लिए लॉन्ग-स्टॉप की तारीख बढ़ा दी है। रिलायंस रिटेल ने इसे छह महीने बढ़ाकर अगले साल 31 मार्च कर दिया है। लॉन्ग स्टॉप वो समय सीमा होती है, जिसमें सौदे की सभी शर्तें पूरी होती हैं और लेनदेन भी पूरा हो जाता है। एक तरह से ये डील कंप्लीट होने की आखिरी डेडलाइन होती है।

पिछले साल हुई थी डील: आपको बता दें कि पिछले साल अगस्त में रिलायंस रिटेल ने फ्यूचर ग्रुप के साथ करीब 25 हजार करोड़ की डील की जानकारी दी थी। कंपनी ने बताया था कि वह 24,713 करोड़ रुपये में फ्यूचर ग्रुप के रिटेल, होलसेल बिजनेस, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग बिजनेस का अधिग्रहण करेगी। इस डील को लेकर अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ने आपत्ति जताई।

अमेजन क्यों कर रहा विरोध: अमेजन ने फ्यूचर ग्रुप की सब्सिडरी कंपनी फ्यूचर कूपन के निवेशक के तौर पर इस डील का विरोध किया है। दरअसल, फ्यूचर की गैर-सूचीबद्ध फर्म, फ्यूचर कूपन लिमिटेड में अमेजन की 49 फीसदी हिस्सेदारी है। इसका हवाला देते हुए अमेजन का दावा है कि फ्यूचर रिटेल के अधिग्रहण का पहला अधिकार उसका है। अमेजन का आरोप है कि इस डील के बारे में फ्यूचर समूह ने अमेजन को जानकारी नहीं दी। इसके बाद अमेजन ने सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (एसआईएसी) के मध्यस्थता अदालत का दरवाजा खटखटाया। 

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अदालत ने अमेजन के पक्ष में फैसला सुनाया। अमेजन के अलावा फ्यूचर समूह ने भी इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट सहित भारतीय अदालतों में मुकदमे दायर किए हैं। शीर्ष अदालत ने हाल ही में अमेजन के पक्ष में टिप्पणी देते हुए कहा था कि मध्यस्थता अदालत के फैसले भारतीय कानूनों के तहत वैध और लागू करने योग्य हैं।



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