सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बीते साल मार्च में तब्लीगी जमात में इकट्ठे हुई भीड़ के कारण कोरोना विस्फोट का उदाहरण देते हुए केंद्र सरकार से सवाल किया कि अब आंदोलन कर रहे किसानों को कोरोना से बचाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आंदोलन करने वाले किसान भी एक जगह इकट्ठा हैं ऐसे में सरकार ने प्रदर्शनस्थल पर कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए क्या गाइडलाइंस जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को इसका जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। 

तीन जजों की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, ‘ठीक ऐसी ही समस्या किसानों के प्रदर्शन के दौरान भी पैदा हो सकती है। हमें नहीं पता कि किसानों को कोरोना से बचाया जा रहा है या नहीं। कोरोना को फैलने से रोकने के लिए आपने क्या दिशानिर्देश जारी किए हैं। क्या आपने जमात वाले अनुभव से कुछ सीखा है? क्या आपको पता है कि यह कैसे हुआ?’

सरकार की ओर से तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि जमात वाले मामले की जांच अभी तक चल रही है। उन्होंने ज्यादा संख्या में लोगों के इकट्ठा होने को लेकर कोरोना गाइडलाइंस का जिक्र करते हुए दो हफ्ते का समय मांगा। 

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने जम्मू-कश्मीर की वकील सुप्रीया पंडिता की ओर से जमात मामले की सीबीआई जांच की मांग के लिए दायर की गई जनहित याचिका के दौरान यह सवाल किया।



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