Modi Shah & yogi are so upset about next Gen. elections due to failior of delivery in UP
Modi Shah & yogi are so upset about next Gen. elections due to failior of delivery in UP

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पिछले काफी समय से यह देखा जा रहा है कि मीडिया की छवि आम जनता में धूमिल होती जा रही है। पिछले साल जब किसानों का आंदोलन शुरू हुआ तो मेन स्ट्रीम मीडिया ने उसे दिखाना ठीक नहीं समझा। उसे कमतर आंक कर जनता के सामने गलत तरीके से दिखाना शुरू कर दिया। पहले तो यह लगा कि एक आध महीने में आंदोलन खत्म हो जायेगा। किसानों की भीड़ वापस घर चली जायेगी। लेकिन नौ माह बीतने के बाद भी किसान दिल्ली बार्डर पर डटे हुए हैं। मजबूरन किसान आंदोलन को कवरेज करना शुरू कर दिया है। लेकिन वो समाचार को किसान विरोधी बता कर दिखाना शुरू कर दिया है। इससे इन न्यूज चैनलों की कवरेज से किसान और भी ज्यादा नाराज हो गये। किसान नेताओं ने साफ कह दिया कि वो ऐसे चैनलों के रिपोटर्स को बाइट देना बंद कर दिया। धरना स्थल पर पहुंचने वाले सरकार समर्थक टीवी चैनलों के रिपोर्टर्स को बैन कर दिया। यू ट्यूबर्स और सोशल मीडिया ने किसान आंदोलन को प्रमुखता से चलाया। इसके पीछे चैनल की टीआरपी भी माना जा सकत है। बहुत से नये सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनलों को स्थापित कर दिया।
बडे मीडिया हाउस सिर्फ सरकार के स्पोक्समैन बन कर किसान विरोधी कार्यक्रम चला रहे हैं। यही मीडिया हाउस किसानों को कभी खालिस्तानी और किराये के आदमी बताते हैं। इनकी डिबेट में सत्ता पक्ष के लोग किसानों को आतंकवादी बता कर किसानों को बदनाम करने का प्रयास किया जाता है। लेकिन किसान अपनी बात पर अड़ गये हैं। उनका कहना है कि किसान आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार तीनों काले कृषि कानून वापस नहीं लेगी। इन हालातों में पत्रकारों को भ आत्म मंथन करना चाहिये। यह सोचना होगा कि कब तक वो अपने प्रोफेशन से मुंह मोड़ कर जनता को बरगलाते रहेंगे।
किसान संगठनों ने यह ऐलान कर दिया कि वो पूरे देश में वो किसान महापंचायत करके मोदी सरकार और भाजपा के खिलाफ प्रचार करेंगे। पांच विधानसभा चुनावों में किसान नेताओं ने बीजेपी के खिलाफ जमकर विरोध प्रचार किया। नतीजा यह हुआ कि पांच में से एक जगह ही भाजपा अपनी साख बचा सकी। अन्य चार जगहों पर भाजपा की करारी हार हुई। अगले साल 2022 में पांच प्रदेशों यूपी, पंजाब, मणिपुर गोवा, उत्तराखंड और हिमाचल में चुनाव होने हैं। किसानों ने भी ये ऐलान कर दिया है कि वो इन पांचों प्रदेशों में घूम घूम कर भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। भले ही भाजपा किसानों के आंदोलन को विफल बताती घूम रही लेकिन किसानों के आंदोलन का प्रभाव इन सभी चुनावों साफ दिखने लगा है।
यूपी में किसान महापंचायत में उमड़ने वाली भीड़ को नकारा नहीं जा सकता है। यूपी विधानसभा चुनाव भाजपा के लिये प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। मोदी सरकार ने अपने बहुत सारे मंत्रियों और सांसदों की फौज को जीत के लिये मैदान में उतार दिया है। यूपी फतेेह करने के लिये मोदी ने आधा दर्जन मंत्री यूपी से बनाये हैं। भाजपा ने इसके अलावा दलित कार्ड भी खेला है। मोदी सरकार अब यूपी के दलित वोटर को साधने में जुट गयी है। लेकिन किसान आंदोलन उनके मंसूबों पर पानी फेरते दिख रहा है। किसानों की माने तो यूपी के हर गांव गांव में यूपी सरकार और भाजपा के खिलाफ प्रचार करेंगे। साथ ही यह भी अपील करेंगे कि भाजपा के खिलाफ मतदान करें।
वैसे भाजपा ने भी किसानों के आदोलन से निपटने के लिये पूरे प्रदेश में जातिगत और प्रबुद्ध वर्गों के सम्मेलन करना शुरू कर दिया है। भाजपा को लग रहा है कि ऐसे सम्मेलनों से लोग उनके साथ जुड़ेगे। एक बार फिर प्रदेश में भाजपा की सरकार बन जायेगी। लेकिन विपक्ष भी यूपी के ब्राह्मण समाज को लुभाने के प्रयास में जुटे हैं। समाजवादी पार्टी और बसपा ने भी पूरे प्रदेश के ब्राह्मणों को रिझाने के लिये सम्मेलनों का आयोजन शुरू कर दिया।

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