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पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह इस समय आगामी आम चुनाव और पांच प्रदेशों के चुनाव परिणामों को लेकर बुरी तरह बौखला गये हैं। ऐसे में वो जो भी चाल चल रहे हैं वो उल्टी ही पड़ रही है। मध्यप्रदेश में बुरी हार दिख रही है इसी लिये तीन केन्द्रीय मंत्री और चार सांसदों को विधायकी का टिकट दे दिया है। वहीं सीएम शिवराज सिंह चौहान का नाम लिस्ट में नहीं आया है। इसलिये उनकी सांसें भी अटकी हुई हैं। इससे जाहिर हो रहा है कि मोदी और को शिवराज सिंह और स्थानीय लीडरशिप पर भरोसा नही है। इन हालातों में यह लगने लगा है कि भाजपा अपनी जिद के आगे किसी की सुनने को तैयार नहीं है चाहे इसके लिये चारों प्रदेश में हार ही का सामना क्यों न करना पड़े।
नाराज भाजपा और आरएसएस से भी खतरा
इसके अलावा बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की मनमानी से स्थानीय भाजपाइयों में भारी नाराजगी है। यहां तक कि पूर्व सीएम उमा भारती और पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन भी अपनी उपेक्षा से काफी नाराज हैं। इस बात को दोनों बीजेपी नेताओं ने प्रेस के सामने जताया है। इस बात का अंदाजा मोदी और शाह को भी है लेकिन फिर भी उन्होंने दोनों वरिष्ठ नेताओं को मनाने की कोशिश नहीं की है।

इसके अलावा मध्यप्रदेश में आरएसएस के नेता भी केन्द्र सरकार और भाजपा के रवैये नाखुश नजर आ रहे हैं उन्होंने यह भी ऐलान कर दिया है कि वो आने वाले चुनावों में केन्द्रीय भाजपा को सबक सिखाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि केन्द्र सरकार और भाजपा मध्यप्रदेश में प्रयोग कर रही है उससे वो एक पंथ दो काज कर रही है एक तरफ वो वरिष्ठ बीजेपी नेताओं को किनारे लगा रही है वहीं वो सेकिंड लाइन लीडरशिप बना रही है ताकि वो मोदी शाह के मुरीद बने रहें। इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भारी संख्या में टिकट दे रही है। इस तरह वो पुराने नेताओं को संदेश दे रही हैं कि चुनाव जिताओ या संगठन में जाओ।
राजस्थान में भी नाराजगी, वसुंधरा रूठी
राजस्थान में भी भाजपा में अंदरूनी कलह सामने आ गयी है। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और मोदी शाह के बीच तलवारें खिंची हुई हैं। जहां अमित शाह और पीएम मोदी वसुंधरा को सीएम उम्मीदवार बनाने के पक्ष नहीं हैं वहीं वसुंधरा मोदी शाह के काबू में नही आ रही हैं। उन्होंने सीधा ऐलान कर दिया है कि वो राजस्थान से बाहर नहीं जायेंगी। हाल ही मे बीजेपी की कार्यकारिणी में वसुंधरा को पुराने पद उपाध्यक्ष पर रखा। उकना मानना था कि शायद वसुंधरा इससे मान जायेंगी लेकिन हुआ उल्टा ही वो और भी ज्यादा बिफर गयीं। प्रदेश में जब भाजपा जनसंपर्क रैलियां निकाल रही थी तब वसुंधरा दिल्ली में रूठी बैठी थी। उन्होंने मोदी या शाह से मिलने की कोई कोशिश नहीं की। मोदी शाह को वसुंधरा की यह गुस्ताखी चैन नहीं लगने दे रही है।

वसुंधरा ने दिखायी अपनी ताकत
वसुंधरा राजे ने पीएम की रैली के ठीक पहले अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने आवास पर अपनी महिला कार्यकर्ताओं को रक्षा सूत्र कार्यक्रम में बुलाया और साफ कर दिया कि आपके साथ और सहयोग का मैं आभार प्रकट करती हूं। आपको विश्वास दिलाती हूं कि मैं यहां से कहीं जाने वाली नहीं हूं। मैं राजस्थान को छोड़ कर जाने वाली नहीं जाने वाली। आप लोग ही मेरी ताकत हो और मेरा विश्वास। इस बात से भाजपा में खलबली मच गयी है। पीएम मोदी की रैली में आयोजकों ने उनकी सीट ठीक पीएम के बगल में लगा कर नाराजगी दूर करने की कोशिश भले की हो लेकिन वसुंधरा के तेवर में कमी आयेगी इस बात की गुंजाइश कम दिख रही है।








