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बेकिंग न्यूज—सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को पुलिस ने डिटेन किया, हंगामा
6 जनवरी को पटियाला हाउस के गेट पर सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन करने के आरोप में हिरासत में ले लिया। इसका वहां मौजूद लोगों ने जमकर विरोध किया। शनिवार को सुबह से ही पटियाला हाउस कोर्ट के गेट पर वकीलों का जमावड़ा लग रहा था। सुप्रीमकोर्ट के सीनियर वकील भानुप्रताप और महमूद पारचा के आह्वान पर वकीलों का चुनावों में ईवीएम पर बैन लगाने को मोर्चा निकाला जाना था। लेकिन दिल्ली पुलिस ने महमूद पारचा और भानु प्रताप समेत भारी तादाद में वकीलों को निजी वाहन में जबरन खींच कर बैठा लिया। भानुप्रताप ने कहा यह हमारी खुद की लड़ाई नहीं बल्कि जनता के अधिकारों की लड़ाई है। मौजूद सरकार जनता के सभी मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है। महमूद पारचा और अन्य सीनियर वकील ईवीएम पर सवाल उठाते रहे हैं। 6 जनवरी को इन्होंने पटियाला कोर्ट से चुनाव आयोग के दफ्तर तक मोर्चा निकालने का आह्वान किया था। लेकिन पुलिस ने उन्हें मोर्चा निकालने से पहले ही हिरासत में ले लिया। महमूद पारचा ने बस में बैठने के बाद वहां मौजूद मीडिया से कहा सरकार के इशारे पर दिल्ली पुलिस उन्हें न जाने कहां ले जा रही है। हो सकता है कि उनका इनकाउन्ंटर कर दिया जाये। उन्हें इस बात की चिंता नहीं है। भानु प्रताप ने कहा कि आज का विपक्ष सरकार के आगे नतमस्तक हो गया है। जो काम विपक्षी नेताओं को करना है वो हम वकीलों को करना पड़ रहा है। मोदी सरकार की पुलिस हमें जेल भी भेज दे तो भी हम जनहित में संघर्ष जारी रखेंगे। वैसे कांग्रेस समेत अनेक राजनीतिक दल भी ईवीएम हैक होने की शिकायत चुनाव आयोग को कर चुके हैं लेकिन चुनाव आयोग सत्ता के आगे नतमस्तक है विपक्ष की शिकायत को सिरे से नकार चुकी है। कांग्रेस व इंडिया गठबंधन के दिग्गज नेताओं ने चुनाव आयोग से अपनी बात कहने को अगस्त 2023 से समय मांगा है लेकिन चुनाव आयोग ने समय नहीं दिया है। ये देखा जा रहा है कि सत्ताधारी दल जितनी सीटों का ऐलान करते हैं परिणाम भी लगभग उतना ही आता है।

ईवीएम हैक करके दिखाने का दावा
मोर्चा निकालने वाले महमूद पारचा और भानुप्रताप व उनके साथियों का दावा है कि वो चुनाव आयोग के सामने 50 इलैक्ट्रानिक वोटिंग मशीन को हैक कर दिखाया जायेगा। वकीलों का कहना है कि वो संवैधानिक संस्थाओं और संविधान को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। निर्धारित कार्यक्रम के तहत जंतर मंतर पर वकीलों के बीच कुछ विशेषज्ञों ने ईवीएम को हैक कर दिखाया भी। मौके पर ही कुछ लोगों से वोट डालवा का दिखाया कि आप का डाला गया वोट किस तरह से दूसरी पार्टी के हक में चला जाता है। किस तरह ईवीएम के अंदर साफ्टवेयर को चेंज कर वोटों की ठगी की जा रही है। जंतर मंतर मौजूद लोगों यह बस देख कर मन बना लिया है कि वो ईवीएम को हटा कर बैलट पेपर से वोटिंग करवाया जायेगा। सरकार और चुनाव आयोग को जनता की मां मानने पर मजबूर कर दिया जायेगा। सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के प्रोटेस्ट के समर्थन में आम आदमी पार्टी और टीएमसी कार्यकर्ताओं ने ईवीएम के खिलाफ मोर्चा निकाल कर चुनाव आयोग और मोदी सरकार की करतूतों की निंदा की। ऐसे में पुलिस और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई बाद में पुलिस ने उन्हें डिटेन कर लिया।

ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाये
पिछले साल से भी सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील महमूद पारचा और भानुप्रताप चुनावों में ईवीएम के इस्तेमाल पर विरोध जता रहे हैं। उनका कहना है कि जिन देशों से मोदी सरकार ने ईवीएम खरीदी हैं वहां भी इनका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। क्यों कि इनके साफ्टवेयर को हैक करने की खबरें आ रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भी ईवीएम के छेड़छाड़ की शिकायत की थी लेकिन चुनाव आयोग ने शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की है। चुनाव आयोग हमेशा एक ही राग अलाप रहा है कि ईवीएम हैक नहीं की जा सकती है। सुप्रीमकोर्ट से भी विपक्ष को ईवीएम मामले में राहत मिलती नहीं दिख रही है।








