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सुप्रीम कोर्ट ने एक सामूहिक बलात्कार और युवती की हत्या के परिजन काफी दुखी हो गये हैं। उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ ने तीन बलात्कार और हत्या के दरिंदों को रिहा करने का आदेश जारी किया है। इससे पहले दिल्ली हाइकोर्ट ने इस केस के सभी आरोपियों फांसी की सजा सुनायी थी। परिजनों को सुप्रीम कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट से इस प्रकार के निर्णय की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ न्याय की लड़ाई जारी रहेगी। पीड़िता के परिजनों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमारे पिछले 10 सालों के संघर्ष और वेदना को नहीं समझा हमने पिछले दस सालों से अपनी बेटी के बलात्कारी और हत्यारों को सजा दिलवाने के लिये कितना संघर्ष किया है। जेल में बंद रहने के बावजूद उन्हें मुजरिमों के घरवाले जान से मारने की धमकियां देते रहते थे। अब जब ये आजाद घूमेंगे तब तो वो जीना ही हराम कर देंगे। इस केस की पैरवी करने वाली वकील और सामाजिक संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय पर अपनी नाखुशी जतायी है।
मालूम हो कि दिल्ली के छावला इलाके से 19 साल की एक युवती का तीन लोगों ने अपहरण कर लिया था जो पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली थी। तीन चार दिनों तक उसके साथ सामूहिक रेप किया। इसके बाद उस्की निर्मम हत्या कर दी थी। कुछ दिनों के बाद उसकी क्षत विक्षत लाश बरामद हुई थी। दस साल तक इस नृशंस हत्या व सामूहिक बलात्कार का मामला अदालत में चला। दिल्ली हाईकोर्ट ने इन सभी अपराधियों रवि, विनोद और राहुल को सजाये मौेत सुनायी थी।
इस मामले में दोषियों ने लड़की के साथ रेप के साथ उसे असहनीय  यातना भी दी थी. लड़की को कार में इस्तेमाल होने वाले औजारों से पीटा गया, उसके शरीर को जगह जगह सिग्रेट से जलाया गया था। रेप करने के बाद अभियुकतों ने पीड़िता की आंखों में तेजाब डाल दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार 7 नवंबर को इस मामले की सुनवायी हुई। सुनवायी के बाद चीफ जस्टिस आफ इंडिया यूयू ललित ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया। तीन सदस्यीय बेंच ने इन तीनों दुर्दांत अपराधियों को रिहा करने का आदेश सुना दिया। लोगों में इस फैसले की काफी चर्चा हो रही है। अभी संबंधित वकीलों को पूरा जजमेंट की काफी नहीं मिली है। ये बात तय है कि पीडिता का पक्ष इस फैसले के रिव्यू करने की रिट दायर जरूर करेगा।

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