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लालू यादव जेल से रिहा होने के बाद धीरे धीरे सक्रिय हो रहे है। पहले उन्होंने राजद कार्यकर्ताओं से वर्चुअल मीटिंग की। इससे कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने बिहार की राजनीति में सक्रिय होना शुरू कर दिया है। हाल ही में उन्होंने समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह से मुलाकात की। उनसे से भी आगामी आम चुनाव की रणनीति पर चर्चा हुई। इसके बाद उन्होंने चिराग पासवान के समर्थन में बयान दिया कि चिराग पासवान ही लोजपा के असली नेता हैं। लालू ने कहा कि बिहार के सुरक्षित भविष्य और विकास के लिये चिराग और तेजस्वी का एक साथ आना बहुत जरूरी है।
लालू का इस तरह सक्रिय होना बिहार सरकार और नितीश कुमार दोनों के लिये ही खतरे की घंटी है। जेल से रिहा होने के बाद पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने भी राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की है। इन सब के बीच नितीश कुमार के बदले सुर भी इस बात का संकेत दे रहे हैं कि बिहार की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है। नितीश और मोदी सरकार के बीच कुछ खटास सी देखी जा रही है। सरकार मे बीजेपी के मंत्री भी नितीश कुमार पर गाहे बगाहे तानाकशी करते रहते हैं। इससे सीएम नितीश भी कंफर्टेबल नहीं हैं। ताजा मामला पेगासस जासूसी कांड और जातिगत जनगणना को लेकर मोदी सरकार और नितीश कुमार के बीच मतभेद देखे जा रहे हैं। इस मामले में नितीश कुमार ने पीएम मोदी का पत्र भी लिखा है। नितीश कुमार जातिगत जनगणना के पक्ष में हैं। इस मामले मंे नितीश के साथ तेजस्वी और चिराग भी साथ खड़े हैं।
लालू के इस बयान पर चिराग पासवान ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन यह बात तो है कि चिराग पासवान भी बीजेपी के रवैये से खुश नही हैं। लोजपा टूटने में जितना हाथ जेडीयू का है उतना ही भाजपा का भी है। मोदी सरकार और लोकसभा स्पीकर ने पशुपति कुमार के गुट को मान्यता देने में जो जल्दबाजी दिखाई इससे साफ जाहिर है कि लोजपा को तोड़ने में कहीं न कहीं भाजपा की भी रजामंदी थी।








