वेस्ट बंगाल में हाई प्रोफाइल विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम के अलावा मिदनापुर की देबरा सीट है जहंा दो आईपीएस अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिये चुनावी समर में ताल ठो रहे है। बीजेपी ने पूर्व आईपीएस भारती घोष को देबरा से टिकट दिया है। वहीं टीएमसी ने पूर्व आईपीएस हुमांयू कबीर को देबरा से विधानसभा का उम्मीदवार बनाया है। दो आईपीएस के बीच चुनावी जंग से यहां का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है।
भारती घोष ने 2017 में पुलिस की नौकरी छोड़ दी और 2019 भाजपा में शामिल हो गयीं। लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने टिकट पर घाटल से चुनाव लड़वाया लेकिन वो चुनाव हार गयीं। कंुछ समय उन्होंने यूएन संगठन में भी कार्य किया। चुनाव प्रचार के दौरान भारती घोष के पास से 1.3 लाख रुपये बरामद किये थे। जिसका वो विवरण नहीं दे सकीं। टीएमसी ने यह आरोप लगाया कि वो इन रुपयों से मतदाताओं को लुभाने में उपयोग करना चाह रही थी। एक समय था जब भारती घोष ममता दीदी की करीबी माना जाता था। लेकिन पुलिस ने भारती घोष पर भ्रष्टाचार के रूप में मामला दर्ज कर दिया। यहीं से भारती घोष और ममता के बीच दूरियां बढ़ती चली गयीं। 2भाजपा की सदस्यता ले ली और भाजपा में अपनी अच्छी पकड़ बना ली।
हुमांयू कबीर ने चुनाव के कुछ वक्त पहले ही पुलिस की नौकरी से इस्तीफा देते हुए टीएमसी की सदस्यता ले ली। टीएमस ने उन्हें देबरा से विधानसभा चुनाव लड़ने के टिकट दे दिया है। इस एरिया से कबीर काफी जानकार है उन्हें पूरी उम्मीद है कि वो यहां से एमएलए चुने जायंेगे। इलाके में पूर्व आईपीएस कबीर की छवि साफ सुथरी है। 2016 में यहां से टीएमसी की सेलिमा बेगम ने सीपीएम के जहांगीर को हरा कर जीत हासिल की थी।








