University Exams UGC Guidelines 2020: सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को नोटिस जारी कर फाइनल ईयर की परीक्षाएं कराने के विरोध में दायर याचिकाओं को लेकर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि आयोग 29 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
शीर्ष अदालत कोविड-19 के दौर में देश भर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाओं की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के करीब 31 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर यूजीसी द्वारा 6 जुलाई को जारी की गई संशोधित गाइडलाइंस को रद्द करने की मांग की है। यूजीसी ने अपनी संशोधित गाइडलाइंस में देश के सभी विश्वविद्यालयों से कहा है कि वे फाइनल ईयर की परीक्षाएं 30 सिंतबर से पहले करा लें। छात्रों ने अपनी याचिका में मांग की है कि फाइनल ईयर की परीक्षाएं रद्द होनी चाहिए और छात्रों का रिजल्ट उनके पूर्व के प्रदर्शन के आधार पर जारी किया जाना चाहिए।
याचिकाओं में बिहार और असम में बाढ़ की वजह से लाखों छात्रों की परेशानियों और कई राज्यों द्वारा कोविड-19 महामारी की वजह से राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षायें रद्द करने के निर्णय सहित अनेक मुद्दे उठाये गये हैं।
University Exams UGC Guidelines 2020: यूजीसी ने कहा, राज्य को परीक्षा रद्द करने का अधिकार नहीं
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की तीन सदस्यीय पीठ ने इन याचिकाओं पर केन्द्र और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जवाब मांगा है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि विश्विवद्यालयों और कालेजों की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर चिंतित हैं । उन्होने कहा कि देश मे 800 से ज्यादा विश्वविद्यालयों मे से 209 परीक्षाओं को पूरा कर चुके हैं।
मेहता ने कहा कि करीब 390 विश्वविद्यालय इस समय परीक्षायें कराने की प्रक्रिया में हैं। प्राधिकारियों द्वारा जारी दिशा निर्देशों का जिक्र करते हुये उन्होंने कहा कि छात्र ऑन लाइन, ऑफ लाइन या दोनों की मिलीजुली प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।
पीठ ने कहा कि शिव सेना की युवा इकाई ‘युवा सेना सहित इन याचिकाओं पर एक जवाब दाखिल किया जाये। पीठ ने इसके साथ ही इन याचिकाओं की सुनवाई 31 जुलाई के लिये स्थगित कर दी।
याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वकील ने पीठ से कहा कि कई राज्यों ने महामारी के दौरान परीक्षायें आयोजित करने पर आपत्तियां की हैं।
इसी तरह, अंतिम वर्ष के 31 छात्रों ने एक याचिका में सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षायें आयोजित करने के लिये यूजीसी के छह जुलाई के निर्देश निरस्त करने का अनुरोध किया है ।
याचिका में कहा गया है कि महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु पहले ही अंतिम वर्ष की परीक्षायें रद्द कर चुके हैं।
याचिका में दावा किया गया है कि यूजीसी ने यह निर्देश जारी करते समय बाढ़ग्रस्त बिहार, असम और पूर्वोत्तर राज्यों के लाखों छात्रों की स्थिति को ध्यान में रखा ही नहीं है। इन राज्यों में ऑनलाइन, ऑफ लाइन परीक्षायें आयोजित करना संभव नहीं है।
याचिका में प्राधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि मौजूदा हालात को देखते हुये अंतिम वर्ष की परीक्षायें नहीं करायी जायें और छात्रों के पिछले प्रदर्शन या आंतरिक आकलन के आधार पर ही नतीजे घोषित किये जायें।
यूजीसी ने इससे पहले परीक्षाओं को लेकर कहा है कि अंतिम वर्ष की परीक्षाएं निरस्त करने का कोई अधिकार नहीं है। अंतिम वर्ष की परीक्षाएं रद्द करने या बिना परीक्षाओं के छात्रों को डिग्री प्रदान करने का फैसला सीधे तौर पर देश में उच्च शिक्षा के मानकों को प्रभावित करेगा। बिना परीक्षा डिग्री देने से छात्रों के भविष्य पर बुरा असर पड़ेगा। यूजीसी ने कहा है कि बहुत से विश्वविद्यालयों ने उनसे परीक्षाओं का फाइनल स्टेटस जाना है। यूजीसी को 818 विश्वविद्यालयों की प्रतिक्रिया मिली है जिसमें 603 विश्वविद्यालय या तो परीक्षाएं करा चुके हैं या परीक्षाएं कराने की योजना बना रहे हैं। इनमें से 209 विश्वविद्यालय परीक्षाएं करा जुके हैं जबकि 394 विश्वविद्यालय ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षाएं कराने पर विचार कर रहे हैं।







