2017 में भाजपा पूरे प्रचंड बहुमत के साथ यूपी में अपनी विजय पताका लहरायी थी। लेकिन योगी के नेतृत्व बहुत अच्छा काम करने में विफल रही। केवल नारों और विज्ञापनबाजी के अलावा प्रदेश में कुछ भी नहीं हुआ। लेकिन 3.5 साल में सरकार योगी की तारीफ और विघटनकारी गतिविधियों में ही लिप्त रही है। डेढ़ साल में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में अब हर राजनीतिक दल चुनाव की तैयारियों में जट गया है। सरकार भी चुनाव लड़ने के लिये कमर कसती दिख रही है। ऐसे में आम आदमी पार्टी ने भी इस बार चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। यूपी में पहले ही से समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस पहले से ही चुनाव के मैदान में आमने सामने हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी की एण्ट्री से के चुनाव और भी कांटे का होता दिख रहा हैं।
योगी सरकार एक बार फिर से यूपी में शासन करने का मूड बना रही है। वहीं समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव की जनता में अच्छी छवि है। लोग उनके किये गये विकास और जनहित के कार्यों को याद करते है। बसपा के लिये आने वाले चुनाव में कुछ हाथ आयेगा इसे अभी से नहीं कहा जा सकता है। रही बात कांग्रेस की अभी उसका संगठन प्रदेश में काफी कमजोर है। प्रियंका गांधी के कमान संभालने से पार्टी में कुछ अंतर जरूर देखा गया। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी अपने बल पर सरकार बनाने में सफल होगी इसके अभी संशय है। लेकिन इतना तो तय है कि प्रदेश की जनता सत्ता में बदलाव देखना चाह रही है।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह पिछले एक डेढ़ साल से यूपी में काफी सक्रिय है। योगी सरकार की विफलताओं और बढ़ते अपराध पर जबरदस्त तरह से हमलावर हैं। यूपी सरकार ने उनके खिलाफ काफी मुकदमे दर्ज कराये है। लेकिन संजय सिंह आप के संगठन को लगातार बढाने में जुटे हुए हैं। यह भी सुना जा रहा है कि आप पंचायत चुनाव में भी प्रत्याशियों को उतारने जा रही है। विधानसभा चुनाव में भी केजरीवाल ने अपने उम्मीदवारों को उतारने की विधिवत घोषणा कर दी है। इसके बाद से भाजपा सपा, बसपा और कांग्रेस के खेमों में अजीब से बेचेनी देखी जा रही है।
अगर जनता की बात करें तो वो भी आम आदमी पार्टी की खूबिंयों से प्रभावित है। आप का नाम सुनते ही उनके जेहन में सबसे पहले विकास कौंधता है। इसके अलावा दिल्ली में मिल रही मु्फ्त बिजली और पानी की सुविधा भी यूपी के लोगों को अपनी ओर खींचती है। इसके अलावा महिलाओं के लिये डीटीसी में फ्री यात्रा, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा भी एक बड़ी उपलब्धि बताया जा सकता है। यूपी चुनाव में अरविंद केजरीवाल दिल्ली को मिल रही सुविधाओं को हथियार बना सकते है। लोग दिल्ली सरकार उपलब्ध्यिों से काफी प्रभावित हैं। लेकिन यूपी में आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी इस बात पर संशय है। इसके पीछे यह कहा जा रहा है कि अन्य राजनीतिक दलों के मुकाबले आप का संगठन कमतर साबित हो सकता है। अरविंद केजरीवाल ने 2014 में पीएम मोदी के खिलाफ बनारस से चुनाव लड़ा था लेकिन हार का मुंह देखना। अभी आप के लिये यूपी में सरकार बनाना दिवास्वप्न हो सकता है।








