Edited By Sudhakar Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:
लखनऊ
कोरोना संकट के बीच कंपनियां निवेश से बच रही हैं। आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में के लिए गुड न्यूज है। यहां आधे दर्जन से ज्यादा जापानी कंपनियों ने निवेश की इच्छा जताई है। अंग्रेजी अखबार फाइनैंशल एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक मियाची कॉर्प और टोकाची कॉर्प जैसी जापानी कंपनियों ने निवेश के लिए उत्सुकता जाहिर की है।
सूत्रों के मुताबिक निवेश प्रस्ताव के तहत मछली पालन की पांच यूनिट, सिंचाई के लिए 100 मेगावॉट क्षमता वाला सोलर पार्क के साथ-साथ एग्री प्रॉसेसिंग पार्क की योजना है। बताया जा रहा है कि ये प्रस्ताव उत्तर प्रदेश एमएसएमई, सूक्ष्म लघु और मध्य उद्यम मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और जापानी कंपनियों के बीच मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सामने आया। इस कॉन्फ्रेंस में जापान में भारतीय राजदूत संजय वर्मा ने भी हिस्सा लिया।
यूपी सरकार अलग-अलग हिस्सों में मौजूद जीआईएस मैपिंग (ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम) वाली एक लाख एकड़ जमीन में निवेश कराने की कवायद में जुटी है। इसके साथ ही एक्सप्रेस-वे और एयर कनेक्टिविटी के बड़े नेटवर्क का भी निवेश में बेहतर इस्तेमाल करने की जुगत है। मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना है कि कोरोना वायरस के बीच दूसरे देशों की मल्टि नैशनल कंपनियां चीन से से हटना चाहती हैं। ऐसे में इस कवायद के जरिए विदेशी कंपनियों से निवेश कराने की तैयारी है।
मंत्री का कहना है कि हम अलग-अलग देशों के साथ चर्चा कर रहे हैं। जापानी कंपनियों के साथ कॉन्फ्रेंसिंग में कुछ ठोस प्रस्ताव मिले हैं, हमें उम्मीद है कि ये जल्द फलीभूत होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे देशों के साथ एक्सपोर्ट बढ़ाने बढ़ाने के प्रति राज्य सरकार गंभीर है और इसे सुनियोजित तरीके से अमल में लाया जाएगा।
जापान से एक्सपोर्ट बढ़ने की संभावना पर सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि अभी चीन जापान में सालाना 173 अरब डॉलर का निर्यात करता है। इसके मुकाबले भारत अभी जापान में सालाना 4.8 अरब डॉलर का ही निर्यात करता है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश का जापान में 103 मिलियन डॉलर से ज्यादा का एक्सपोर्ट है। इसमें मशीन पार्ट्स, जरूरी तेल, गारमेंट, फुटवियर और कालीन शामिल हैं।
मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना है कि सभी देशों के साथ चर्चा के दौरान कंपनियों की तरफ से मुख्य सवाल था कि क्या जमीन उपलब्ध है। मंत्री ने बताया कि इस मुद्दे पर हमने निवेशकों को बड़े लैंड बैंक ऑफर (बड़े क्षेत्रफल की जमीन) किए। हमने राज्य के पूर्वी इलाके में उद्योगों के लिए पहले ही 85 हजार एकड़ जमीन चिह्नित की है। सेंट्रल रीजन में 3 हजार एकड़ रेडी टू मूव जमीन निवेशकों के लिए उपलब्ध है। जो कंपनियां डिफेंस कॉरिडोर में इंवेस्ट करना चाहती हैं उनके लिए 3 हजार एकड़ जमीन हमारे पास है। पश्चिमी क्षेत्र में मेरठ के पास 3 हजार एकड़ और जेवर एयरपोर्ट के पास 5 हजार एकड़ जमीन उपलब्ध है।







