Edited By Shatakshi Asthana | एजेंसियां | Updated:

कमला हैरिस पर रहा है मां का प्रभाव

वॉशिंगटन

डेमोक्रैटिक पार्टी की ओर से उपराष्ट्रपति पद उम्मीदवार के तौर पर चुने जाने के बाद भारतीय-अमेरिकी कमला हैरिस ने अपने पहले भाषण में अपनी मां श्यामला गोपालन को याद किया। कमला पर उनकी मां का गहरा प्रभाव रहा है। कमला ने कहा कि उनकी मां ने कभी उन्हें परेशानी के वक्त में बैठकर शिकायत करना नहीं सिखाया बल्कि हालात सुधारने के लिए प्रेरित किया।

‘मां ने सिखाया, शिकायत नहीं, समाधान करो’

डेमोक्रैटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन ने हैरिस को उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर चुना है। इसके साथ ही कमला ऐसा मौका हासिल करने वाली पहली अश्वेत महिला बन गई हैं। इसके बाद डेलवेयर के विलमिंगटन में बाइडेन के साथ पहली बार नजर आईं कमला ने कहा कि उनके जीवन में उनकी मां की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने कहा, ‘मेरी मां श्यामला ने मेरी बहन माया और मुझे यह सिखाते हुए बड़ा किया कि आगे बढ़ते रहना हमारे और अमेरिका की हर पीढ़ी के हाथ में हैं। वह बताती थीं कि बैठकर चीजों के बारे में शिकायत मत करो, कुछ करो।’

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‘दुनिया के अलग-अलग कोनों से आकर US में मिले पैरंट्स’

हैरिस की मां भारतीय तमिल मूल की थीं और पितान जमैकन। उन्होंने बताया, ‘मेरे माता-पिता विश्व-स्तर की शिक्षा के लिए दुनिया के अलग-अलग कोनों से अमेरिका पहुंचे, एक भारत से और एक अमेरिका से।’ हैरिस की मां श्यामला ब्रेस्ट कैंसर स्पेशलिस्ट थीं और 1960 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कली से डॉक्टरेट करने आई थीं। उनके पिता डोनाल्ड हैरिस 1961 में ब्रिटिश जमैका से आए थे। वह स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी में इकॉनमिक्स के प्रफेसर थे।

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हार्वर्ड के दिनों में ऐक्टिविज्म में शामिल होती थीं कमला

‘बचपन से विरोध प्रदर्शनों में साथ ले जाते थे’

कमला ने आगे बताया कि उनके माता-पिता 1960 के दशक में सिविल राइट्स मूवमेंट के दौरान साथ आए और ओकलैंड की सड़कों पर न्याय के लिए चिल्लाते और मार्च करते हुए एक-दूसरे से मिले। कमला ने कहा कि वह संघर्ष आज भी जारी है। वह बताती हैं, ‘मेरे पैरंट्स मुझे प्रदर्शनों में साथ ले जाते थे।’ कमला ने कहा कि मां से प्रभावित होकर उन्होंने कानून में समान अधिकार को लेकर लड़ाई लड़ने का फैसला किया। इसके बाद कमला डिस्ट्रिक्ट अटर्नी और अटर्नी जनरल बनीं।

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अश्वेत समुदाय पर अच्छी पकड़, कही जाती हैं ‘फीमेल ओबामा’

अपने माता-पिता के कारण हैरिस की भारतीय और जमैकन, दोनों ही कम्युनिटी के बीच अच्छी पकड़ है। जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद से अश्वेतों में सरकार के खिलाफ गुस्सा है। ऐसे में डेमोक्रेटिक पार्टी उन्हें अपनी ओर खींचना चाहती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उस दौरान उन्हें अफ्रीकी और अश्वेत समुदाय से अच्छा-खासा समर्थन मिला। इसी वजह से कमला को ‘फीमेल ओबामा’ भी कहा जाता है। कमला ने प्राइमरी चुनावों के दौरान एक आर्टिकल लिखा था, जिसमें उन्होंने खुद के अश्वेत होने पर गर्व जताया था। साथ ही भारतीय संस्कृति की भी तारीफ की थी।

बचपन में नाना से प्रभावित

  • बचपन में नाना से प्रभावित

    1960 के दशक में हैरिस ने अपना काफी वक्त अपने नाना पीवी गोपालन के घर में लूसाका, जांबिया में बिताया था। गोपालन भारत सरकार में सिविल सर्वेंट थे और उन्हें रोडेशिया (अब जिंबाब्वे) के शरणार्थियों की एंट्री मैनेज करने के लिए भेजा गया था। जिंबाब्वे अभी-अभी ब्रिटेन के शासन से आजाद हुआ था। यह उनके करियर की एक बड़ी निर्णायक उपलब्धि थी और कमला पर इसका काफी असर रहा। वह बताती हैं, ‘मेरे नाना दुनिया में मेरे सबसे फेवरिट लोगों में से एक थे।’ (तस्वीर में पिता के साथ कमला, दायें)

  • मां से मिला आवाज उठाने का जज्बा

    कमला की मां श्यामला गोपालन हमेशा से यह चाहती थीं कि उनके बच्चे अपनी भारतीय जड़ों से जुड़े रहें। तमिल मूल की भारतीय-अमेरिकन श्यामला एक जानी-मानी कैंसर रिसर्चर और ऐक्टिविस्ट थीं। उन्होंने अपनी बेटियों के नाम संस्कृत में रखे थे। उनका कमला पर काफी प्रभाव था और इमिग्रेशन और समान अधिकार जैसे मुद्दों पर कमला की राय नींव काफी हद तक श्यामला की वजह से रखी थी। श्यामला ने अपना ग्रैजुएशन भी दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया था। इसके बाद UC बर्कली से PhD करने के बाद ब्रेस्ट कैंसर पर रिसर्च की। फिर वह यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉई और यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉनिसन होते हुए स्पेशल कमीशन ऑन ब्रेस्ट कैंसर का हिस्सा भी बनीं। श्यामला सिर्फ एक रिसर्चर के तौर पर नहीं, सिविल राइट्स ऐक्टिविस्ट्स के तौर पर भी अपनी आवाज बुलंद कर रही थीं। इसका असर आगे चलकर कमला पर काफी ज्यादा रहा।

  • पढ़ाई के दौरान ऐक्टिविज्म

    कमला ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस और इकनॉमिक्स की पढ़ाई भी कि जिस दौरान वह दक्षिण अफ्रीका में अपार्थीड के खिलाफ मुखर रहीं। हार्वर्ड में पढ़ाई के दौरान उन्होंने कैलिफोर्निया के तत्कालीन सीनेटर ऐलन क्रैंस्टन के लिए मेलरूम क्लर्क के तौर पर काम किया जो उस वक्त खुद राष्ट्रपति पद के लिए दौड़ने की कोशिश में थे। फिर वह कैलिफोर्निया लौटीं जहां उन्होंने 1990 में वकालत की पढ़ाई पूरी की और डेप्युटी डिस्ट्रिक्ट अटर्नी के तौर पर काम शुरू किया।

  • 2016 में रचा था इतिहास

    2003 से 2011 तक वह सन फ्रैंसिस्को की डिस्ट्रिक्ट अटर्नी रहीं। 2016 में उन्होंने रिपब्लिकन सीनेटर लोरेटा सानशेज को हराकर अमेरिकी सीनेट में जूनियर रिप्रजेंटेटिव का पद अपने नाम किया था। हैरिस दूसरी अश्वेत और पहली दक्षिण एशियाई-अमेरिकी महिला थीं जो अमेरिकी कांग्रेस के अपर चेंबर तक पहुंची थीं। सीनेटर के तौर पर वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ मुखर रही हैं। हालांकि, विदेश नीति पर उन्होंने ट्रंप का समर्थन भी किया है।

ऐसे मिल सकता है बाइडेन को फायदा

अमेरिकी सेंसस ब्यूरो के अनुसार, 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में 13.75 करोड़ लोगों ने वोट डाला था लेकिन, पिछले 20 वर्षों में पहली बार अश्वेत वोट में गिरावट दर्ज की गई थी। 2012 में जब ओबामा राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे थे, तो 66.6 फीसदी अश्वेतों ने वोट डाला था, जबकि 2016 में यह गिरकर 59.6 फीसदी हो गया। ओबामा जब राष्ट्रपति बने, तो उन्हें सबसे ज्यादा अश्वेत वोट मिले। रिपोर्ट के मुताबिक, 2012 में अश्वेतों के वोटों का प्रतिशत श्वेत वोटरों से अधिक था। ऐसे में माना जा रहा है कि कमला हैरिस के चुनावी मैदान में आने का फायदा बाइडेन को मिल सकता है।

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अमेरिकी राजनीति में महिलाओं का अहम स्थान

वहीं, जानकारों का कहना है कि एक महिला होने के नाते भी महिला मतदाताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय अमेरिकी महिलाओं का प्रभाव कुछ अरसे से काफी दिखा है। डेमोक्रैट कमला हैरिस इस समुदाय से पहली सीनेटर हैं, जो उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनी हैं। भारतीय अमेरिकी महिलाओं की इस उपलब्धि को हिलेरी क्लिंटन और साउथ कैरोलिना की गवर्नर रह चुकीं निक्की हेली के दो कार्यकाल की सफलता के सीधे प्रभाव के तौर पर देखा जा सकता है। निक्की हेली राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ने वाली पहली भारतीय अमेरिकी महिला गवर्नर रह चुकी हैं। कमला हैरिस के अलावा प्रमिला जयपाल का भी नाम इसी सूची में आता है।

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रिपब्लिकन पार्टी में भी महिलाएं आगे

रिपब्लिकन पार्टी में भी भारतीय अमेरिकी महिलाएं पीछे नहीं हैं। कैलिफोर्निया की हरमीत ढिल्लन ‘रिपब्लिकन नैशनल कमेटी’ में हैं। जुलाई में हुए सम्मेलन में उन्होंने ‘अरदास’ (सिखों की प्रार्थना) की थी। किसी भी दल में ऐसा करने वाली हरमीत पहली महिला हैं। इससे पहले राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय मूल की महिला नेता तुलसी गेबार्ड का भी नाम लिया जा रहा था। तुलसी हिंदू धर्म पर अपने विचारों को लेकर काफी मशहूर हैं।



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