उत्तराखंड में विजिलेंस RTI के दायरे से बाहर हो गई है. विपक्ष त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहा है. ये फैसला भ्रष्टाचारियों से जुड़ी जानकारी को छिपाएगा. यानी इस फैसले के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच का स्टेटस पता नहीं चल सकेगा और न ही भ्रष्टाचारियों के खिलाफ चल रही जांच की जानकारी मिल सकेगी. आखिर भ्रष्टाचार के प्रकरण में जांच छिपाने की जरूरत क्यों? भ्रष्टाचारियों की जानकारी छिपाने से कैसे गंदे चेहरे बेनकाब होंगे?







