कुछ दिनों से यह कयास लगाया जा रहा था कि उत्तराखंड में सियासत में बदलाव देखा जा सकता है। इसी कड़ी में सीएम रावत ने दिल्लगौत ी में आ कर नड्डा से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने देहरादून में राज्यपाल को अपना सौंप दिया है। राज्यपाल ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया है। डा. रमन सिंह और दुष्यंत गौतम देहरादून जा कर नये सीएम के नाम की घोषणा की जायेगी। वैसे मुख्यमंत्री की रेस में अनेक लोग शामिल हैं उनमें धन सिंह रावत का नाम सबसे आगे चल रहा है। रावत सरकार में भी कुछ बीजेपी के नेता या विधायक है लेकिन जो लोग कांग्रेस से बगावत कर बीजेपी में शामिल हुए उन्हें नाराज करना भी नेतृत्व हटाना नहीं चाहेगी जिनकी वजह से यूके सरकार सुरक्षित है।
उत्तराखंड में ंअगले साल विधानसभा चुनाव होने वाला है। इस बार आम आदमी पार्टी भी उत्तराखंड में ताल ठोकती नजर आ रही है। बीजेपी के काफी विधायक भी मुख्यमंत्री से नाराज चल रहे हैं। उन्होंने केन्द्रीय नेतृत्व से इस बात की शिकायत की है। पार्टी अध्यक्ष जेपेी नड्डा ने त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत असंतुष्ट विधायकों को दिल्ली अपने आवास पर बुलाया। दोनों पक्षों को बात सुुन कर यह फैसला लिया गया कि उत्तराखंड में सत्ता संभालने के लिये उत्तराधिकारी चुनना चाहिये। वैसे भी अगले साल चुनाव होना है जहां कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी से भी बीजेपी को मुकाबला करना होगा। पिछले चार सालों में रावत सरकार ने कुछ खास नहीं किया जिसके बल पर पुनः सत्ता पाना हो सके।
वैसे भी आम आदमी पार्टी ने पिछले कई सालों से उत्तराखंड में अपनी पार्टी का संगठन मजबूत कर लिया है। आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेताओं ने भी बीजेपी सरकार की नींव को हिला कर रख दिया है। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने त्रिवेंद्र सरकार को खुली बहस की चुनौती दे डाली कि सरकार उनसे शिक्षा, स्वास्थ्य बिजली पानी और परिवहन के क्षेत्र में बहस कर लें। लेकिन सरकार का कोई भी मंत्री खुली बहस में भाग लेने नहीं तैयार हुआ। पार्टी नेतृत्व को यह समझ में आ गया कि इन हालातों में सरकार बनाना संभव नहीं होगा। इसलिये यह तय हुआ कि सरकार में नेतृत्व में बदलाव करना जरूरी होगा। चुनाव के लिये एक साल ही बचा है चुनाव जीतने के लिये एड़ी चोटी का दम लगाना होगा।
इस मौके को आम आदमी पार्टी किसी भी सूरत में भुनाना चाहेंगा। आप ने भाजपा सरकार पर यह आरोप लगाया कि त्रिेवंद्र सरकार ने पिछले चार सालों में कुछ भी नहीं किया है। उनकी प्रोग्रेस रिपार्ट जीरो है। आप सरकार की विफलता ही विपक्ष चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा।








