तीन कृषि कानूनों को लेकर भारी तादाद में किसान दिल्ली की सीमा पर लगभग 100 दिनों से डटे हुए हैं। किसान तीनों
कानूनों की वापसी समेत एमएसपी पर कानून चाहते हैं वहीं मोदी सरकार कानूनों को किसी भी सूरत में वापस लेने को तैयार नहीं। मोदी और उनके मंत्री किसानों को यह समझाने में लगे हैं कि कानूनों से किसानों का अहित नहीं होने वाला है बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ने जा रही है। लेकिन सरकार की बातें किसानों के गले से नीचे नहीं उतर रही है। किसानों का कहना है कि मोदी सरकार ने यह कृषि कानून अंबानी और अडानी को फायदा कराने के लिये बनाये हैं। अब तक किसान नेताओं और मोदी सरकार के मंत्रियों के बीच 12 बैठकें हुईं सब की सब बेनतीजा रही है। बैठकों में किसान कानूनों की वापसी के लिये जिद पर अड़े रहे तो वहीं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल बिलों के समर्थन पर कायम रहे। इस वजह से आज किसानों और सरकार के बीच बीच का कोई रास्ता नहीं निकला। इस बीच किसान संगठनों के नेताओं ने यह फैसला किया है कि वो उन राज्यों में जायेंगे जहां चुनाव होने हैं। वहां किसान नेता बीजेपी के खिलाफ प्रचार करेंगे। यह बीजेपी और मोदी सरकार के लिये एक नया संकट पैदा हो गया है। केन्द्र सरकार और बीजेपी के लिये इस समस्या से निपटने को कोई हल नहीं निकलता दिख रहा है।
एक सवाल में किसान नेता राकेश टिकैत से पूछा गया कि किसान आन्दोलन कब खत्म होगा, सरकार और उनके बीच बातचीत किस स्तर पर है। इस पर श्री टिकैत ने काहा कि किससे बात करें। केनद्र के सारे मंत्री और पीएम मोदी तो चुनाव प्रचार में लगे हैं। उन्हें किसानों कीे समस्याओं की कोई फिक्र नहीं। सरकार तो पांच प्रदेशों में अपनी पार्टी का विस्तार करने में जुटी हई है। किसान इन राजनीतिक दलों को इस बार समझा देंगे कि जो लोग सत्ता तक पहुंचा सकते हैं वहीं उन्हें सत्ता से हटा भी सकते हैं।








