INDIA alliance is being stronger day by day So PM Modi & Shah is very confuse about what to do next
INDIA alliance is being stronger day by day So PM Modi & Shah is very confuse about what to do next

#PM Modi & Shah# India Political Updates# Rahul Gandhi# Arvind Kejrewal# Akhilesh Yaday#UP Politics# Bihar Politics# RJD Leader tejasvi Yadav#

राजनीति के बॉस
पिछले दस की राजनीति पर निगाह डालें तो देश में लगभग आधा दर्जन नेताओं के नाम की तूती बोल रही है। उसमे चाहे पीएम नरेंद्र मोदी हों या अरविंद केजरीवाल। सब सब अपनी अपनी पार्टी में पूजे जाते हैं। दूसरी ओर राहुल गांधी या तेजस्वी यादव इन सबकी पार्टी में इनके मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। या यूं कहा जाये कि लोकतंत्र सिर्फ नाम का ही रह गया है। वैसे तो राजनीति में अनेक युवा तुर्क हैं जो रीजनल पार्टी के उत्तराधिकारी उनमें चिराग पाासवान एलजेपी, जयंत चौधरी आएलडी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और शिवसेना यूबीटी के आदित्य ठाकरे। लेकिन वर्तमान में सबसे ज्यादा लोकप्रिय कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी और आप संयोजक व सीएम अरविंद केजरीवाल से बीजेपी और पीएम मोदी को विशेष चिंता रहती है।

Election Commission given notice to RahulGandhi on panouti issue
PM Modi is feeling heat from Rahul Gandhi on serious publis issues & Problems 

पीएम मोदी का देश पर एकछत्र राज
पिछले दस सालों से नरेंद्र मोदी का देश की राजनीति में एकधिकार चल रहा है। ये कहा जा सकता है अब लोग भाजपा को नहीं सिर्फ पीएम मोदी को जानते हैं। यही वजह है कि देश के साथ साथ बीजेपी में भी मोदी शाह की तूती बोल रही है। जितने भी सीनियर नेता हैं मोदी शाह के आगे मुंह खोलने से डरते हैं। यहां तक कि राजनाथ सिंह, शिवराज, रमन सिंह और वसुंधरा राजे को नितिन गडकरी सरीखे नेताओं को मोदी शाह ने किनारे लगा दिया है। यह माना जा रहा है कि पार्टी और सरकार में जो मोदी शाह ने कह दिया वही अंतिम आदेश माना जाये। किसी ने भी चूं चपड़ की उसे मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया जायेगा। यह हालात 2019 के लोकसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीीत के बाद हुआ है। तीसरी बार पीएम बनने को नरेंद्र मोदी किसी भी स्तर तक गिरने को तैयार है। यही वजह है कि जांच एजेंसियों के सहारे ही वो विपक्षी दलों के नेताओं को घेर कर उन्हें कमजोर करने की जुगत में हैं। लेकिन अब उन्हें लगा है कि उनका यह दबाव राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, हेमंत सोरेन, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव काम नहींं कर रहा है।
राहुल गांधी ने मोदी की नाक में दम किया
भ्पिछले दो सालों से राहुल गांधी की छवि में धमाकेदार परिवर्तन हुआ है। वैसे उनके वजूद में परिवर्तन तो 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से शुरू हो गया था। हार से सबक लेते हुए राहुल गांधी ने पार्टी व संगठन पर ध्यान देना शुरू किया। पहले उन्होंने अध्यक्ष पद ठुकराते हुए गैर गांधी परिवार के नेता को अध्यक्ष बनाने बल दिया और योग्य व वरिष्ठा कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस के अध्यक्ष बने। 2022 में उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा के जरिये लगभग 4 हजार किमी की पद यात्रा की। जिससे न केवल राहुल गांधी की लोकप्रियता में बढ़ावा हुआ साथ ही कांग्रेस की धूमिल छवि भी निखर कर सामने आयी। कमजोर कांग्रेस में जान आ गयी। इसके बाद से राहुल गांधी पीएम मोदी पर सीधे हमले करना शुरू कर दिये। संसद में उन्होंने अडाणी मोदी के संबंधों पर जोरदार तरीके निशाना साधा। संसद में हर दिन वो मोदी सरकार और पीएम को निशाने पर रख रहे थे। ये बात न तो पीएम को पच रही थी और न ही सरकार को वो किसी तरह राहुल को संसद में आने से रोकना चाह रहे थे। भाजपा और मोदी सरकार इसमे सफल भी हुए। मोदी सरनेम केस में फंसा कर राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद भी करा दी गयी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सदस्यता बहाल कराने में अहम् भूमिका निभाई। दूसरी भारत जोड़ो न्याय यात्रा ने तो राहुल गांधी को नरेंद् मोदी के बराबरी पर ला दिया। राजनीतिक जगत में इस बात पर बहस शुरू हो गयी है आगामी लोकसभा चुनाव भाजपा के लिये टेढ़ी खीर होने वाला है। इस बात से मोदी शाह और भाजपा भी समझ गये हैं कि चुनाव फंसता जा रहा है लेकिन वो किसी भी सूरत में आम चुनाव जीतना चाहते हैं उसके लिये वो उस दल के बड़े और प्रभावी नेता को जांच एजेंसियों के जरिये साजिशन जेल के पीछे भेजते जा रहे हैं। राहुल गांधी के भाषणों पर भाजपा और मोदी अपनी रणनीति बना रहे हैं। उनके बयानों पर रिसर्च एडिट कर अपनी सहूलियत के हिसाब से सोशल मीडिया पर वायरल कर कर उनकी छवि को खराब करने की साजिश में जुट गये है।
कांग्रेस के दिन भी बहुरे, मजबूत होगी पार्टी
वैसे तो कांग्रेस देश की सबसे पुरानी और दमदार पार्टी हुआ करती थी। लेकिन पिछले दस सालों से मोदी सरकार और भाजपा ने उसे इस कदर कमजोर और बदनाम कर दिया है कि वो अपने पैरो पर खड़ी होने सफल नहीं हो रही है। 2014 के आम चुनाव में भाजपा से मिली करारी हार से कांग्रेस का संगठन पूरी तरह से टूट गया। हालात और भी ज्यादा खराब तब हो गये जब 2019 में एक बार फिर से मोदी का जादू चला और मोदी फिर पीएम बनने में सफल हो गये। कांग्रेस इस हार का प्रमुख कारण भाजपा की चतुरायी और कांग्रेस का कमजोर संगठन माना गया। यही वजह रही कि देश के अनेक राज्यों में कांग्रेस को भाजपा से हार मिली। लेकिन कहा जाता है कि गिरने वाला ही उठ कर आगे बढ़ता है। राहुल गांधी के सहारे कांग्रेस को उम्मीद जगी है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कांग्रेस थी है और आगे भी रहेगी। इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बेहतर स्थिति में आयेगी।

Rahul Gandhi & Arvind kejriwal are targeted PM Modi on Chandigarh Mayor Election
Rahul Gandhi & Arvind kejriwal are targeted PM Modi on Chandigarh Mayor Election

मोदी के गले की फांस बनते अरविंद केजरीवाल
पिछले दस सालों में पीएम मोदी ने सब की नाक में नकेल कस दी लेकिन वो दिल्ली में अपना विजय रथ जारी नहीं रख पाये। पूरे देश में मोदी लहर ल्लिी में काम न आये। तीन बार आम आदमी पार्टी ने भाजपा को करारी मात दी है। इसके अलावा पिछले साल एमसीडी से भी भाजपा का सफाया हो गया है। पिछले 15 सालों से भाजपा का एमसीडी पर कब्जा कायम था। मोदी शाह को इसी बात का गम है कि देश में उनको टक्कर देने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखायी लेकिन एक नयी पार्टी ने उन्हें दिल्ली में घुसने नहीं दिया है। तीन बार विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी। आम आदमी पार्टी ने दोनों राष्ट्रीय पार्टियों को जोरदार पटखनी दी है। आज भी हालात यह हैं कि मोदी शाह ने लोकसभा चुनाव के देखते हुए दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को कथित शराब घोटाले में फंसा कर जेल भेज दिया है। दिलचस्प बात यह है कि इस चुनाव के लिये आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का समझौता है। पिछले आम चुनाव 2019 में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अलग अलग चुनाव लड़ा था। उन्हें एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी। भाजपा ने दोबारा सात सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार के आम चुनाव मुकाबला दिलचस्प होता दिख रहा है। भाजपा ने अपने छह सांसदों का टिकट काट दिया है। केवल मनोज तिवारी ही हैं जिन्हें तीसरी बार पार्टी टिकट दिया है। भाजपा को इस बात का अहसास हो गया है कि दिल्ली की जनता बीजेपी के सांसदों से नाराज है इसलिये छह नये चेेहरों को पार्टी ने टिकट दिया है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा और पीएम मोदी की नाक में नकेल कस दी है। यही वजह है कि मोदी सरकार और जांच एजेंसियों ने आम आदमी पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं और मंत्रियों को ईडी ने दिल्ली शराब नीति मामले में फंसा कर जेल भेज दिया। 21 मार्च को ईडी ने अरविंद केजरीवाल को भी शराब घोटाले का किंगपिन बताते हुए गिरफ्तार कर जेल भेजा दिया है। लेकिन दिल्ली सरकार और पार्टी के हौसले पस्त नहीं हुए है। चर्चा इस बात की है कि मोदी सरकार की मंशा थी कि केजरीवाल के जेल जाने के बाद दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा कर भाजपा का शासन हो जायेगा। लेकिन फिलहाल दिल्ली सरकार जेल में बंद केजरीवाल से मिल रहे आदेशों के अनुसार सरकार चल रही है।

outh leaders of INDIA alliance are strongly oppose to Modi Shah team in General elections
outh leaders of INDIA alliance are strongly oppose to Modi Shah team in General elections

अखिलेश और तेजस्वी से भी मोदी शाह को परेशानी
यूपी में पीएम मोदी और शाह को सपा से परेशानी महसूस हो रही है। भले ही यूपी में भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार है। इसके बावजूद मोदी शाह को अखिलेश यादव से इसलिये परेशानी हो रही है कि भाजपा के झण्डे तले अखिलेश यादव क्यों नहीं आ रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में मोदी योगी लहर के बावजूद सपा ने 125 विधायकों को जितवा लिया था। यही वजह है कि मोदी शाह को लोकसभा चुनाव में परेशानी होती दिख रही। वैसे तो मोदी शाह 400 पारा का खोखला नारा लगा रहे हैं। लेकिन अ​सलियत तो यह है कि उनको 272 सीटें भी मिलती नजर नहीं आ रही है। यूपी में पिछली बार सहयोगी गठबंधन के साथ 66 सीटें मिली थीं। इस बार उनके हिस्से में 40 सीटें भी संकट में दिख रही है। दूसरी ओर राजद नेता तेजस्वी यादव बिहार राजनीति में सबसे ऊपर दिख रहे है। पिछले विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने अपने बलबूते ही 79 सीट जितवाई थी। युवा नेताओं में लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने की उम्मीद कायम रखी है। यही वजह है कि मोदी शाह को लोकसभा चुनाव में तेजस्वी और महागठबंधन की एकजुटता से खतरा दिख रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here