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पूरे देश में एक ही बात की चर्चा है कि हत्या व रेपिस्ट राम रहीम को
9वीं बार फरलो और परोल किस वजह से मिली है। दिलचस्प बात यह है 2022 से
2024 तक राम रहीम को नौ बार परोल मिली है वो भी तब जब हरियाणा के विधानभा
के चुनाव होने हैं। जब जब हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल में चुनाव
हुए हैं तब तब राम रहीम जेल से रिहा किया गया है। इस बार उसे 21 दिनों की
परोल मिली है। चर्चा इस बात की है कि अक्टूबर में हरियाणा में विधानसभा
के चुनाव होने हैं।
इसके साथ यूपी में 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी
होने हैं। परोल के समय राम रहीम यूपी के बागपत स्थित बरनावा आश्रम में रह
कर सत्संग करने वाला है। इससे उसकी परोल के पीछे राजनीमि फायदा और नुकसान
की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि कोई भी
प्रमुख राजनीतिक दल राम रहीम की परोल का खुलकर विरोध नहीं कर रहा है सबके
चुनावी नफा नुकसान की चिंता है। इससे पहले भी डेरा प्रमुख के स्प में सजा
काट रहा अपराधी कांग्रेस और बीजेपी को राजनीतिक फायदे दिला चुका है।
राजनीति दल इस तरह के मामले पर अक्सर बचाव में अनेक दलीलें देते हैं।
सरकार और जेल प्रशासन कहता है जो भी हो रहा है वो कानून के दायरे में
करते हैं। सवाल यह उठता है क्या ये कानून सिर्फ विशेष लोगों को लाभ देने
के लिया बनाया गया है। लाखों की संख्या में ऐसे लोग जेलों में सड़ रहे
हैं। क्या सरकार कभी उनके बारे में सोचती है कि इन्हें भी फरलो के आधार
पर परोल पर रिहा किया जाये। सरकारों के पास इस बात का कोई रिकार्ड नहीं
है।
न्यायालय की भूमिका पर भी सवालिया निशान
हरियाणा सरकार ने पिछले सात सालों में बलात्कारी राम रहीम को नौर बार
फरलो के आधार पर नौ बार परोल दी। यानि दो साल के भीतर सरकार के इशारों परजेल प्रशासन ने लगभग दस माह सअधिक बाबा जेल से बाहर रहा है।
पिछले साल
जब सजा काट रहे मुजमि ने 21 दिन के परोल की अर्जी लगायी तो हरियाणा पंजाब हाईकोर्ट उसकी अर्जी खारिज करते हुए सरकार को फटकारते हुए कहा कि जब भी राम रहीम को परोल दी जाये तो हाईकोर्ट से अनुमति ली जाये। दिलचस्प बात यह है कि शिरोमणि गुरुद्वारे की ओर से राम रहीम को मिल रही परोल पर सरकार की भूमिका पर शक जताते हुए याचिका दायर की। इस पर हरियाणा पंजाब हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। साथ ही राम रहीम पर परोल संबंधी बैन को भी हटा दिया। इन्हीं सब मामलों के देखते हुए अब लोगों को लगने लगा है कि न्यायप्रणाली भी अन्य संस्थाओं की तरह प्रदूषित हो चुकी है। ऐसे बहुत से मामले सामने आये हैं जिसमे जजों ने अपने स्वार्थ के लिये ऐसे फैसले दिये जिससे सत्ताधारी दल को राजनीतिक दलों को फायदा हुआ। पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने राम मंदिर मामले में सरकार के हिसाब से फैसला दिया। इसका ईनाम उन्हें रिटायर होने के तीन माह बाद बीजेपी ने राज्यसभा भेज दिया था। बाबरी मस्जिद राममंदिर मामले जिन पांच जजों ने अपना फैसला दिया था। उनमें रंजन
गोगोई को राज्यसभा भेजा। पूर्व जज अशोक भूषण को एनसीएलटी का अध्यक्ष बना दिया गया। पूर्व जज एस अब्दुल नजीर को मोदी सरकार ने राज्यपाल बना दिया। पूर्व जजा अरविंद एस बोबडे ने कोई पद नहीं लिया अन्य को मोदी सरकार ने
विभिन्न संस्थाओं पर नियुक् कर एहसान चुका दिया है।
सत्ता का चहेता रहा है रेपिस्ट और हत्यारा
दिलचस्प बात यह है कि 2022 में प्रदेश की बीजेपी सरकार ने एक कानून पास
किया कि अच्छे आचरण के आधार पर किसी भी दुर्दांत व खूंखार अपराधी को परोल
दी जा सकती है। इसी आधार पर सजा काट रहे राम रहीम को सरकार के इशारों पर
जेल की ओर से उसे फरलो स्वीकार कर परोल दी जा चुकी यानि इसे अवैध भी नहीं
कहा जा सकता है। अब सवाल यह है कि क्या यह कानून सभी के लिये लागू होता
है या सिर्फ उन्हें ही विशेष सुविधा मुहैया करायी जाती है जिससे
सत्ताधारी दल को राजनीतक फायदे की उम्मीद होती है।
सुनेरिया जेल में सजा काट रहा राम रहीम
राम रहीम पर दो हत्याओं और दो रेप के मामले में 30 साल की सजा दी गयी है। 2017 से राम रहीम को भारी मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया था। एक सप्ताह तक सिरसा और आसपास के जिलों में भारी उत्पात और आगजनी हुई थी। राम रहीम डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख भी है। जानकारी के अनुसार देश के अनेक हिस्सों में डेरा सच्चा सौदा के समर्थक और प्रशंसक हैं जो अभी भी उसे अपना आदर्श मानते
हैं। उसे बेगुनाह मानते हैं। जब भी राम रहीम परोल पर बाहर आता है तो भारी
संख्या में भक्त और समर्थक उसके सत्संग में शिरकत करते हैं।
सात साल में नौ बार राम रहीम को परोल मिली। चर्चा है कि इस बार राम रहीम
को परोल देने के पीछे हरियाणा विधानसभा का चुनाव का मुद्दा है। हरियाणा
में भाजपा की हालत बहुत ही ज्यादा नाजुक है। यहां कांग्रेस की हालत बेहतर
बतायी जा रही है। यहां पिछले दस सालों से भाजपा की सरकार है जिससे जनता
में भारी असंतोष दिख रहा है।








