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ज्यौं ज्यौं चुनावों की तारीख करीब आती जा रही है वैसे वैसे राजनेताओं का आयाररम गया राम शुरू हो गया है। खासतौर से उन नेताओं का जिनको यह खतरा है कि इस बार उनका टिकट कट सकता है। ऐसे नेता अन्य दलों में अपनी सेटिंग गेटिंग में जुट गये हैं। यूपी में तीन मंत्रियों और आठ विधायकों ने भाजपा से नाता तोड़ समाजवादी पार्टी से नात जोड़ लिया है। ठीक ऐसा ही कुछ अन्य नेताओं ने भाजपा को ज्चाइन कर लिया। इसमें मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव भी हैं जिन्होंने सपा से दामन छुड़ा बीजेपी का कमल थाम लिया। ये बात और है कि पाला बदलने वालों को इसका कितना फायदा लेकिन बीजेपी यह संदेश देने में सफलता प्राप्त की है कि मुलायम सिंह की बहू को वो तोड़ने में सफल हो गये हैं। भाजपा इन बागियों से कितना लाभ उठा पाते हैं यह डेढ माह बाद ही पता चलेगा।
ताजा मामला उत्तराखंड कांग्रेस में देखने को मिला है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस नेता झकिशोर उपाध्याय ने ठीक चुनाव के चंद दिनों पहले ही पाला बदल लिया। किशोर ने कांग्रेस को छोड़ते हुए भाजपा का दामन थाम लिया। इससे पहले भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को पार्टी से निकालते हुए मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया। इस बात से रावत इतने दुखी व परेशान हुए कि उन्होंने कैमरे के सामने ही आंसू बहा दिया। बीजेपी का आरोप है कि हरक सिंह गुपचुप ढंग से कांग्रेस से डील कर रहे थे। इस बात की भनक लगते ही बीजेपी ने हरक सिंह को पार्टी मंत्रिमंडल से निकाल दिया। साथ यह भी आरोप लगा कि रावत अपनी बहू और समर्थकों के लिये टिकट मांग रहे थे।
यूपी में भाजपा से छिटक कर जाने वाले नेता पूर्वांचल में कितना नुकसान पहुंचायेंगे यह परिणाम बतायेंगे। लेकिन सपा में शामिल होने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी, ओपी राजभर और दारा सिंह चौहान निश्चित रूप से भाजपा को परेशान कर सकते हैं। इन सभी नेताओं का पूर्वांचल में अच्छा खासा प्रभाव है। इससे भाजपा और योगी का खेल बिगाड़ सकते हैं। वैसे भी योगी सरकार से यूपी की जनता काफी नाखुश नजर आ रही है। योगी सरकार विज्ञापन और होर्डिंग्स के जरिये लोगों बरगलाने की कोशिश कर रही है कि आल इज वेल।








