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राजस्थान और मध्यप्रदेश की जीत के बाद भी मोदी शाह के बुरे दिन शुरू हो गये है। मध्यप्रदेश में सीएम शिवराज और राजस्थान में वसुंधरा राजे सिंधिया ने मोदी शाह की नींदें उड़ा रखी हैं। यह पहला मौका है कि कोई बीजेपी नेता मोदी शाह के फरमान को ठेगा दिखा रहा है। शिवराज ने वैसे तो यह कहा कि वो सीएम की रेस में नहीं हैं। लेकिन मन ही मन वो इस बात से परेशान है कि उनसे उनका मध्यप्रदेश छिनता जा रहा है। वो भी मोदी शाह की दबंगई से नाखुश हैं। वहीं मोदी शाह शिवराज के बढ़ते प्रभाव से चिंताग्रस्त थे कि कहीं शिवराज आगामी आम चुनाव में पीएम पद के लिये बगावत न कर दें। वैसे भी शिवराज लोकप्रियता के मामले मे मोदी से बीस बैठते हैं। शिवराज पहले भी संघ की पसंदीदा नेता रह चुके हैं। ऐसा होने पर मोदी की राह में शिवराज रोड़ा बन सकते हैं।
आखिर क्या क्या है शिवराज की बेचैनी का राज
18 साल की बादशाहत छिनने से राजा को परेशानी तो होती है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में रमन सिंह ने पहले ही मोदी शाह के आगे सिर झुका दिया है। वहां मोदी शाह किसी को भी सीएम की गद्दी सौंप सकते है। सबसे ज्यादा दिक्कत तो राजस्थान में महारानी के तेवरों ने मोदी शाह को बेचैन कर रखा है। लेकिन हालात ऐसे हैं कि मोदी शाह चाह कर वसुंधरा के खिलाफ कुछ कर नहीं पा रहे है। उनके आगे कुआं पीछे खाई है। अगर वो वसुंधरा को सीएम नहीं बनाते हैं तो वसुंधरा बगावत कर सकती हैं। इसके पूरे आसार नजर आ रहे हैं।

वसुंधरा और गुजरात लॉबी के बीच तनातनी
चुनाव से पहले ही गुजरात लॉबी और वसुंधरा के बीच टग आफ वार दिख रही थी। मोदी शाह ने वसुंधरा को हाशिये पे रखते हुए अन्य नेताओं को आगे कर चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी। प्रभारी के अलावा टिकट वितरण कमेटी से भी वसुंधरा को किनारे रखा। इसके अलावा किसी भी बड़े कार्यक्रम में वसुंधरा को अहमियत नहीं दी गयी। इससे अंदर अंदर वसुंधरा को परेशानी हो रही थी। लेकिन वो सही मौके और वक्त का इंतजार कर रही थी। चौथी लिस्ट में उनका और उनके समर्थक नेताओं को टिकट दिया गया। चुनाव परिणाम आने पर साफ हो गया कि लगभग 60 ऐसे विधायक जीत कर आये जो वसुंधरा समर्थक बताये जाते है। मोदी शाह को चिंता है कि अगर वसुंधरा बागी हो गयी तो उनके सामने से राजस्थान में परसी हुई थाली छिन जायेगी। वो हर हाल में ऐसा होने नहीं देना चाहते हैं। लेकिन वसुंधरा उनके आगे कोई बात मानने को तैयार नहीं हैं। राजे समझ गयी हैं कि मोदी शाह उनके राजनीतिक जीवन पर ग्रहण लगाने की साजिश रच चुके हैं। इसलिये वो उनके झांसे में आने वाली नहीं हैं। इस प्रकार के संकेत मोदी शाह की राजनीति के लिये शुभ नहीं हैं।







