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पीएम मोदी और शाह आगामी आम चुनाव की तैयारियों में जुट गये हैं। उसे जीतने को दिन रात बिसात बिछाने में लगे है। लेकिन किसमत उनके साथ नहीं है ऐसा लग रहा है। पांच राज्यों में भाजपा ने तीन बड़े हिन्दी भाषी राज्यों में जीत हासिल की है। लेकिन अब हालात यह हैं कि तीन राज्य में भारी जीत हहासिल करने के बाद भी उनके लिये सिरदर्दी बढ़ गयी है।

राजस्थान और मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान व वसुंधरा राजे ने उनके लिये सिरदर्दी बढा दी है। दोनों ही नेताओं ने सत्ता पर काबिज रहने को खेमेबाजी शुरू कर दी है। राजस्थान की बात तो जग जाहिर थी कि वसुंधरा राजे और मोदी शाह एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहा रहे थे। चुनाव परिणाम आये लगभग दस दिन हो चुके हैं। लेकिन मध्यप्रदेश और राजस्थान में सीएम कौन होगा इस बात मोदी शाह फैसला नहीं कर पाये हैं। मामला राजस्थान और मध्यप्रदेश का नहीं है बल्कि मामला 2024 का आम चुनाव है जिसे मोदी शाह हर हाल में जीतना चाह रहे हैं। मोदी शाह और नड्डा एमपी और राजस्थान में रिमोट कंट्रोल वाला सीएम चाह रहे हैं। लेकिन राजस्थान में उनकी दाल गलती नजर नहीं आ रहा है। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे मोदी शाह को बिल्कुल भी तवज्जो देना नहीं चाह रही हैं। दूसरी मोदी शाह हर हाल में वसुंधरा को हाशिये पर रखना चाह रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में सीएम ऐलान
मोदी शाह ने छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय को नया सीएम बनाने की घोषणा कर दी है। वहां मोदी शाह ने पूर्व सीएम रमन सिंह को दरकिनार कर दिया है। रमन सिंह प्रदेश के तीन बार सीएम रह चुके हैं। लेकिन इस बार उन्हें सीएम रेस में भी शामिल नहीं किया गया है। वहां इस बार आदिवासी समाज से आने वाले विष्णुदे साय को पार्टी सीएम पद पर बैठाया है। ऐसा कर मोदी शाह ने दो लक्ष्य साधे एक तरफ यह संदेश दिया कि आदिवासी समाज का सीएम बनाया साथ ही आगामी आम चुनाव में आदिवासियों का वोट भाजपा के पक्ष में होने की संभावना रहेगी। रमन सिंह तो पहले ही मोदी शाह के आगे झुक गये हैं। उन्हें टिकट भी चौथी लिस्ट में दिया गया। लेकिन अंदर अंदर वो मोदी शाह के फैसले से इत्तेफाक नहीं रख रहे हैं लेकिन मुंह खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। सत्ता किसे नहीं प्यारी है। सभी के मन में सीएम बनने की ललक है।
शिवराज चोर दरवाजे से उठा रहे आवाज
प्रचंड बहुमत से जीतने वाले सीएम शिवराज वैसे तो मीडिया के सामने यह बयान दे रहे हैं कि वो सीएम बनने की रेस में नहीं हैं। लेकिन वो जगह जगह जा कर यह कहने से नहीं चूक रहे कि जनता उन्हें सीएम के रूप में देखना चाह रही है। लाडली बहना स्कीम की सातवीं किस्त जारी करने के बाद उन्होंने महिलाओं से संवाद कर यह जताया कि भाई ने आपके खातों में योजना की राशि जमा करवा दी। अगर कोई मुख्यमंत्री बना तो योजना रहती है या बंद होगी इसकी गारंटी सिर्फ मामा ही दे सकते है। जनता के हित साधने को शिवराज को सीएम बनना होगा। आजकल वो पूर्व पीएम अटल जी की कविता मैं हार नहीं मानूंगा का वर्णन करते हैं। ऐसा कर के वो दिल्ली दरबार को भी एक संदेश दे रहे हैं। ये बात दिल्ली दरबार को भी समझ में आ रही है कि यदि एमपी में शिवराज को सीएम नहीं बनाया तो मोदी का तीसरी बार पीएम बनने का सपना धरा रह जायेगा। शिवराज अपने भ्रमण के दौरान वो यह भी संदेश दे रहे हैं कि अगर वो सीएम बने तो बीजेपी के जीत के रथ को कुशलता से संचालित लेंगे। यहां की 29 सीटों पर भगवा ही लहरायेगा। ऐसे में मोदी शाह इस बात पर गहन चिंतन कर रहे हैं कि शिवराज को फिर से सीएम बनाया जाये या नहीं। दोनों ही किसी भी प्रकार का जोखिम आगामी आम चुनाव को लेकर नहीं उठाना चाहते है। वैसे भी देश के हालात 2019 जैसे नहीं रहे हैं जब मोदी शाह को भारी सफलता मिली थी। आज के समय में उनके गठबंधन से पीडीपी, अकाली दल, जेडीयू, शिवसेना, टीडीपी छिटक चुके हैं। ऐसे में हालात उनके पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। इसीलिये वो छुटभैया दलों से गठजोड़ करने से भी नहीं चूक रहे हैं।
वसुंधरा के आगे क्यों नतमस्तक मोदी शाह
दस दिनों बाद भी मोदी शाह राजस्थान के सीएम पद के लिये नेता को नहीं चुन सके हैं। सीएम पद के लिये सबसे प्रभावशाली नाम पूर्व सीएम वसुंधरा का नाम सबसे आगे है। चुनाव परिणाम आने के बाद से वसुंधरा राजे से नये विधायक रोज मिल रहे है। भारी तादाद में जीते हुए विधायक सीएम पद के लिये वसुंधरा को ही अपनी पसंद बता रहे हैं। इससे मोदी शाह की परेशानी बढ़ गयी हैं। केन्द्रीय नेतृत्व चाह रहा है कि वसुंधरा की जगह दीया कुमारी, ओम बिरला, अर्जुनराम मेघवाल या बालकनाथ को सामने लाया जाये। लेकिन नामों पर एकराय नहीं बन पा रही है। उधर वसुंधरा आर पार की लड़ाई के लिये मन बना चुकी हैं। यह चर्चा भी चल रही है कि वसुंधरा राजे की कांग्रेस से बात चल रही है। कांग्रेस भी इस बात के लिये तैयार है कि वसुंधरा कांग्रेस में शामिल हो जायें तो कांग्रेस उन्हें समर्थन दे कर सीएम बनाने को तैयार है। इन सब बातों से मोदी शाह काफी परेशान हैं उनका मिशन 2024 खटाई में पड़ता दिखाई दे रहा है।








