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राज्यसभा अध्यक्ष और बीजेपी के सांसद वैंकेया नायडू ने विप़क्ष के विरोध को शर्मसार करने वाला बताया साथ ही यह कहा कि मैं इससे काफी दुखी हूं। मोदी सरकार के आधा दर्जन मंत्रियों ने सरकार का बचाव करते हुए विपक्ष को असंसदीय और अमर्यादित बताते हुए कहा कि लोकतंत्र को बदनाम किया जा रहा है। यह नहीं समझ में आया कि नायडू जी इतने क्यों भावुक हो गये कि उनकी आंखें भ
र आयीं। इसलिये कि उनकी पार्टी के खास बिलों को वो पास नहीं करा पाये। बिना चर्चा कराये ही सरकार ने 21 बिल पास करा लिये। अब वो राष्ट्रपति के पास भेजे जायेंगे। और वहंा से बिना किसी ना नुकुर के बिल को मंजूरी दे दी जायेगी। नायडू जी का मन तब भावुक नहीं हुआ जब 800 से ज्यादा किसानों की जान प्रदर्शन करते हुए चली गयी। तब नायडू जी ने कोई भावुकता नहीं जतायी। न उनकी आंखें नम हुईं। तब किसी ने कोई ट्वीट का दुखी परिवारों को सांत्वना दी। और तो और छोटी छोटी बातों पर ट्वीट करने वाले पीएम मोदी का मन भी नहीं पसीजा। वैसे तो भाषणों में वो किसानों को अन्नदाता कहा करते हैं सैकड़ों की संख्या में किसान मरते रहे और भाजपा उसके दल किसानों को आतंकवादी खालिस्तानी और मवाली कह डालते हैं। सरकार के मंत्री और प्रधानमंत्री मुंह में दही जमाये रहते है। तब श्री वैंकेया नायडू जी दुखी ओर भावुक नहीं होते हैं। उस पर तुर्रा यह कि मोदी सरकार किसानों के भले के लिये तीन नये कानून लायी है।
नायडू जी तब भावुक नहीं हुए जब भारी संख्या में लोगों ने आक्सीजन के अभाव में जान गंवाई। यूपी में भारी संख्या कोरोना के कहर से लोगों ने जान गंवा दी। लोगों को न दवा मिली ओर न ही अस्पतालों में बेड। कोरोना से मरे लोगों को अंतिम संस्कार के लिये जलाने के लिये लकड़ी और श्मशान घाट न मिले और उन्हें गंगा में अनाथों की तरह बहा दिया गया। तब श्री नायडू का दिल नहीं पसीजा। तब वो भावुक नहीं हुए। हां राज्य सभा में विपक्षी दलों के सांसदों ने अपनी आवाज बुलंद रखी तो नायडू जी दुखी हो गये। उनका दिल भावुक हो गये। भाजपा और मोदी सरकार विपक्षी दल के सांसदों को इस तरह कोस रहे हैं जैसे उन्होंने जघन्य पाप कर दिया या अपराध कर दिया। सरकार के मंत्री गोदी मीडिया में जमकर विप्क्ष पर निशाना साध रहे है। दूसरी ओर राहुल गांधी के नेतृत्व में सारा विपक्ष लामबंद हो कर मोदी सरकार की मनमानी काा जबरदस्त विरोध जता रहे हैं।








