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देश में चुनावी माहौल बनाने में पीएम मोदी और भाजपा जुट गये हैं। पीएम मोदी ने इसी कड़ी में दक्षिण भारत की ओर रुख कर लिया है। उन्हें पूरा विश्वास है कि हिन्दी पट्टी में तो उनका जलवा कायम रहेगा। लेकिन दक्षिण भारत में भाजपा का सूपड़ा बिल्कुल साफ हो गया है। इस स्थिति से उबरने के लिये पीएम मोदी इन प्रदेशों में संघ और बीजेपी के हालात सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। इसका एक कारण और भी है कि एनडीए से अलग होने वाले दलों की एकजुटता भी पीएम मोदी की नींद उड़ा रही है। दिलचस्प बात यह है कि दक्षिण भारत में 128 लोकसभा की सीटें हैं वहां भाजपा की एक भी सीट पर पकड़ नहीं है। पिछले साल कर्नाटक में भी भाजपा सत्ता से बाहर हो गयी है। वहां की 25 सीटें भाजपा के खाते में हैं। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद वहां सीटे बढ़ नहीं सकती बल्कि कम होने की आशंका जरूर है। इसके अलावा तेलंगाना में भी कांग्रेस ने सत्ता हासिल कर ली है। एक तरह से ये कहा जा सकता है कि दक्षिण भारत से भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया है।
बाम सरकार के चलते संघ और बीजेपी बेअसर
हाल ही के दौरे में पीएम मोदी ने केरल के मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद एक संबोधन में संघ और पार्टी के कार्यकर्ताओं का विशेष रूप से आभार जताया। उन्होंने कहा कि विपरीत स्थिति में भी उन्होंने पार्टी को जिंदा रखने का साहस दिखाया है। केरल में वामदलों की सत्ता हमेशा रही है। यही वजह है कि केरल में संघ और बीजेपी की दाल गल नहीं पा रही है। इसका प्रमुख कारण यहां की साक्षरता भी है यहां संघ और बीजेपी का धार्मिक उन्माद और सांप्रदायिकता का जहर काम नहीं करता है। पिछले साल बीजेपी के हाथ से कर्नाटक और हिमाचल निकल गया इससे भी भाजपा की साख गिरी है। इसके साथ ही तेलंगाना में भी कांग्रेस की सरकार बनी है इसके लाावा आंध्र पदेश में भी कांग्रेस के पक्ष में हवा बन गयी है। कांग्रेस को आईएसआर कांग्रेस को शर्मिला रेड्डी की पार्टी का समर्थन मिल गया है। अब कांग्रेस की नजर आन्ध्र पर है वाईएसआर पार्टी ने भी कांग्रेस में विलय कर दिया है। उसकी अध्यक्ष शर्मिला रेड्डी ने हाल ही में कांग्रेस ज्चाइन कर ली है।

बिहार में भी भाजपा का गणित बिगड़ा
एनडीए को नितीश कुमार के साथ छोड़ने से भारी झटका लगा है। पिछली बार आम चुनाव में एनडीए को 39 सीटोंपर सफलता हाथ लगी थी। अब ऐसा कोई चमत्कार नहीं होने वाला हे इसी चिंता में भाजपा घुली जा रही है। यही वजह है कि भाजपा ने सभी मौका परस्त नेताओं उपेंद्र कुशवाहा, जीतनराम मांझी, हम पार्टी, के अलावा अन्य क्षेत्रीय दलों को एनडीए में शामिल किया है। इनमे लोजपा के दोनों दल शामिल हैं। पिछले साल जुलाई में इन दलों ने एनडीए में शामिल हो कर मोदी सरकार के हाथ मजबूत करने का दावा ये सोच कर किया था कि मोदी सरकार में कुछ समय के लिये मंत्री पद मिल जायेगा। लेकिन उनके मंसूबे पूरे नहीं हुए हैं। मंत्री बनने का सपना अधूरा ही रह गया। ये कहना भी मुश्किल है कि ये दल अब एनडीए में रहेंगे भी या नहीं।

महाराष्ट्र में भाजपा की नैया डूबी
महाराष्ट्र में जब से शिवसेना और भाजपा का गठबंधन टूटा है तब से भाजपा की राह कमजोर होती दिख रही है। अब शिवसेना और भाजपा के बीच सांप छछूंदर सी हालत हो गयी है। बीजेपी ने काइंयापन दिखाते हुए शिवसेना में दो फाड करवा दिया है। इस मामले में चुनाव आयोग ने साजिश को अंजाम दिया है। शिवसेना शिंदेगुट को असली पार्टी घोषित कर शिवसेना का झण्डा और सिंबल भी चुनाव आयोग ने आवंटित कर दिया। वैसे शिंदे गुट में 12 सांसद और 38 वियाायकों का समर्थन है। इसी तर्ज पर भाजपा ने एनसीपी को भी तोड़ डाला है। एनसीपी नेता अजित पवार अपने तीेन दर्जन विधायकों और कुछ सांसदों के साथ भाजपा सरकार शामिल हो गये। अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद मिला है। दिलचस्प बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री इस सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाये गये हैं। यहां भी आम चुनाव में टिकट वितरण को लेकर सिर फुटौवल हो रही है। शिवसेना शिंदे गुट ने कहा कि उसे उसकी तीती हुई 23 सीटें चाहिये। वहीं एनसीपी छोड सरकार में शामिल एनसीपी अजित गुट 14 सीटों की मांग कर रहा है। हालात यह है कि महाराष्ट्र में भाजपा के पास 18 सीटें हैं। इस हालात में तो भाजपा को अपनी जीती हुई सीटों में से सीटें छोड़नी पड़ेगी।

पंजाब और हरियाणा में भाजपा संकट में
पंजाब में कभी भी भाजपा का वजूद नहीं रहा है। यहां पर वो अकाली दल के कंघों पर ही सवार होती है। इस बार अकाली दल ने भाजपा से दूरी बना रखी है। यहां वर्तमान में आम आदमी पाटी की सरकार है। ऐसे में यहां अकाली दल और भाजपा की हालत खस्ता है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का समझौता हो गया है। ऐसे में भाजपा को आम चुनाव में कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिये। ऐसा ही कुछ आलम हरियाणा में है वहां की दस सीटों पर भाजपा को झटका लग सकता है। हरियाणा में वैसे भी सरकार की दस सालों का गुस्सा जनता में है। खट्टर सरकार पिछले विधानसभा चुनाव 2019 में हार गयी थी लेकिन जेजेपी के समर्थन से दोबारा भाजपा सरकार बन गयी थी। इस बार हरियाणा में भाजपा को भारी झटका लग सकती है।

वेस्ट बंगाल में ममता का जादू बरकरार
पिछले आम चुनाव में टीएमसी सरकार के रहते भाजपा ने प बंगाल में 18 सीटों पर सफलता प्राप्त की थी। इससे भाजपा के हौसले काफी बुलंद थे। लेकिन इस सफलता के पीछे टीएमसी के असंतुष्ट नेताओं की अहम् भूमिका रही थी। उसके बाद विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से ममता बनर्जी का जादू चल गया। ममता दीदी ने लगातार तीसरी बार सरकार बना कर इतिहास रच दिया। लेकिन भाजपा ने भी कीर्तिमान बनाते हुए 76 विधायकों को जिताने मे सफलता प्राप्त की। इससे पहले प बंगाल में भाजपा के केवल दो या तीन ही विधायक हुआ करते थे। चुनाव के कुछ समय बाद ही भाजपा के तीन सांसद और आधा दर्जन विधायकों ने टीएमसी में वापसी कर ली। आम चुनाव में भी भाजपा को 2019 वाली सफलता मिलती नहीं दिख रही है। पिछली बार प बंगाल में 18 सांसदों को जिताने में भाजपा सफल रही है। लेकिन इस बार आम चुनाव में भाजपा को चुनाव में पापड़ बेलने पड़ेंगे। वहां भाजपा को साख बचाने को लाले पड़ सकते हैं। फिलहाल बंगाल में दीदी का जलवा ही कायम दिख रहा है।








