चुन चुन कर विरोधियों को निपटा रही मोदी सरकार
जब से मोदी सरकार पार्ट2 ने सत्ता संभाली है तभी से बीजेपी अपने राजनीतिक विरोधियों को निपटाने पर लगी है। सबसे पहला शिकार बनाया गया जम्मू कश्मीर के क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को। पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस और अन्य छोटे मोटे दलों को इस कदर ईडी और सीबीआई के जाल में फंसाया कि वो केन्द्र सरकार का विरोध करने के बजाय अपनी गर्दन बचाने प्रयास में जुट गये। रही सही कसर देश के गृहमंत्री ने धारा 370 के अनुच्छेद और 35 ए को संसद के दोनों सदनों में सहमति से हटवाया। इससे जम्मू कश्मीर के क्षेत्रीय दलों की सारी हेकड़ी ही निकल गयी।
मॉबलिंचिस्तान बनता हिन्दुस्तान
हिन्दुस्तान को विश्व का सबसे बड़ा ‘लोकतांत्रिक देश कहते हैं और कुछ लोग तो कहते हैं कि ’हम विश्व गुरू बनेंगे, दुनिया को रास्ता दिखाने वाले हैं’। इस देश में रोज ऐसी-घटनाएं घट रही हैं जहां लगता है कि हम देश को रिवर्स गियर में डाल कर एक्सलेटर दबा रहे हैं। जुलाई, 2017 को बंगाल के मुर्शिदाबाद से एक विडियो वायरल हुई थी जिसमें एक महिला को ट्रैक्टर से बांध कर पीटा जा रहा था, वह तस्वीर आज भी हमारे जेहन में बैठी हुई है। महिला को ट्रैक्टर पर बैठा कर उसके दोनों हाथों और कमर को रस्सियों से बांधा गया है।
…अरुण जेटली ऐसे ही इतने पॉपुलर नहीं थे
पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली के निधन के बाद अब लोगों को उनकी खासियत और काबिलियत के किस्से याद आ रहे हैं। एक राजनेता और वित्तमंत्री के रूप में तो लोग याद रखेंगे ही लेकिन उनकी मानवीय संवेदनाओं और इंसानियत के किस्से भी लोग भुला न पायेंगे। पेश है उनके कालेज के समय का एक संवेदशील वाकया। एक कमरे के किराये के घर में, मां बाप और 7 बहनों के साथ रहने वाला एक गरीब लड़का अपने ग्रेजुएशन में काउंसिलिंग के समय से 1 घण्टा लेट पहुँचा...हाँफते हुए वो काउंटर के पास गया तो समय निकल चुका था..!!
जीएसटी और नोटबंदी के लिये भी याद किये जायेंगे जेटली
वित्त मंत्री अरुण जेटली हमेशा कोर कमेटी के अहम् सदस्य रहते थे चाहे पीएम मोदी हों या अटल दोनों की सरकारों में वो अहम् पोर्ट फोलियो को संभालत थे। लेकिन असली काम तो जेटली ने मोदी सरकार में रह कर किया। उन्होंने वित्त मंत्री रहते जो दो महत्वपूर्ण कार्य किये उनमें नोटबंदी और जीएसटी है। इन दोनों कामों को बीजेपी अपनी उपलब्धि बताती है तो विपक्ष इन दोनों को देश का काला इतिहास बताते हैं।
जम्मू कश्मीर के किस्से से विपक्ष क्यों नहीं चेत रहा है
मोदी शाह की जोड़ी ने दोबारा सत्ता में आते ही अपनी करामात दिखाना शुरू कर दी है। मई में मोदी सरकार पार्ट 2 ने दोबारा काम करना शुरू कर दिया। इसी के तहत मोदी ने इस बार शाह को होम मिनिस्टर बनाया और राजनाथ को डिफेंस मंत्री। यह सब इसलिये किया गया कि राजनाथ की इमेज नरमपंथी के तौर पर जानी जाती है। वहीं शाह अपनी जिद और दबंगई के बारे में कुख्यात हैं। मोदी सरकार पार्ट की शुरू से ही अमित शाह ने कर्नाटक पर अपनी वक्र दृष्टि डाली और वहां का तख्ता पलट करवा भाजपा की सरकार बनवाने सफल हुए।
विश्व विजयी तिरंगा प्यारा, झण्डा ऊंचा रहे हमारा
ये गीत हमने और बहुत से लोगों ने अपने बचपन में सुना होगा। हाथ में तिरंगा लेकर भागते रहे होंगे। उन दिनों आज की तरह तिरंगा हाथ में लेने की प्रथा नहीं थी। केवल गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर ही हम लोग झण्डा फहरा सकते थे। लेकिन आज आप किसी भी दिन किसी समय अपनी इच्छा के अनुसार झण्डा फहरा सकते हैं और तो और अपनी गाड़ी पर प्रतिष्ठा बनाकर शान से गुजर सकते हैं।
मॉब लिंचिंग को ले कर चल रहा है चिटठी —चिटठी का खेल
पिछले सप्ताह मॉब लिंचिंग को लेकर 49 फिल्मी कलाकारों और साहित्यकारों ने एक चिट्ठी लिखी। उस चिटठी में यह कहा गया कि जिस तरीके से देश के अनेक इलाकों में अनियंत्रित भीड़ समुदाय विशेष, दलित और आदिवासी लोगों का अपना शिकार बना रहे हैं इससे साफ जाहिर होता है कि इन हादसों की आड़ में उपरोक्त लोगों से बदला लिया जाता है। यह देखा जाता है कि यह सभी हादसे उन प्रदेशों में हो रही है जहां बीजेपी की सरकारें हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि पिछल पांच सालों में लगभग 840 लोग मॉबलिंचिंग के शिकार हुए है।
आजम खान तो बहाना है विरोधियों को निपटाना है
आज के समय में आजम खान नाम काफी चर्चा में है। सत्ताधारी दल के साथ एनडीए के सभी घटक इस फिराक में हैं कि किसी तरह विरोधी खेमों को किसी तरह कमजोर किया जा रहा है। जब से यूपी में सीएम योगी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी है तभी से सपा और बसपा के तेज तर्रार नेताओं को निशाने पर रखा जा रहा है। बसपा के नेता आनंद कुमार जो मायावती के भाई हैं उनकी भी 400 करोड़ की संपत्ति ईडी में जब्त की है। इससे मायावती काफी भड़की हुई हैं।
शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि—मानो कांग्रेस का किला दरक गया
कांग्रेस की दिग्गज नेता और दिल्ली में 15 तक जनता के दिलों और सत्ता पर राज करने वाली शीला दीक्षित का चला जाना हर किसी के दिलो दिमाग को झकझोर गया। कांग्रेस की सबसे वयोवृद्ध महिला नेता शीला दीक्षित की मौत से पार्टी की नींव ही हिल गयी। सोनिया, राहुल गांधी से लेकर प्रियंका तक को इनकी मौत ने अंदर से हिला कर रख दिया। न केवल कांग्रेस बल्कि विपक्षी नेता भी उनकी इज्जत करते थे।
नेताओं का जेल जाना सजा है या मजा
सामान्यतौर पर जब किसी के जेल जाने की नौबत आती है तो लोग इससे निपटने के लिये हरसंभव प्रयास करते हैं कि जेल न जाना पड़े लेकिन शायद नेताओं के लिये जेल जाना किसी पिकनिक मनाने जैसा होता है। फिलहाल ऐसे उदाहरण देखने को मिल रहे हैं जिससे साफ झलकता है कि नेता तो बस नाम के लिये जेल जाते हैं। उनके रहन सहन, खानपान और मुलाकातियों पर कोई रोकटोक नहीं लगती है।
















