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गुजरात, हिमाचल और एमसीडी चुनावों में मतदाताओं ने सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को खुश कर दिया है। हिमाचल में कांग्रेस ने भाजपा को बाहर का रास्ता दिखाया तो गुजरात में बीजेपी ने शानदार ऐतिहासिक जीत दर्ज की। लोगों का मानना है कि यह जीत मोदी जी की वजह से भाजपा को मिली है। जीत का एक कारण मोदी मैजिक माना जा सकता है लेकिन गुजरात में कांग्रेस का निकम्मापन और आम आदमी पार्टी का अति उत्साह भाजपा के लिये वरदान साबित हुआ है। अगर कांग्रेस पूरे जोर शोर से चुनाव लड़ती तो आज भाजपा के लिये अपनी साख बचाना मुश्किल हो जाता। वैसे सही मायने में तो भाजपा को नुकसान ही हुआ है हिमाचल में उनकी सरकार गयी और दिल्ली एमसीडी से भी बेदखल हो गयी है।
विपक्ष के बिखराव से भाजापा की बल्ले बल्ले

वहीं आम आदमी पार्टी जो सरकार बनाने के मंसूबे पाले हुई थी किसी तरह पांच सीट ही जीत पायी। वहीं कांग्रेस को ये चुनाव काफी महंगा पड़ा। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 77 सीटें मिली थी। इस बार उसकी 60 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया है। हिमाचल की जीत ने कांग्रेस के जख्मों पर जरूर मरहम लगाया है। लेकिन एमसीडी में भी कांग्रेस ने कोई जोर नहीं लगाया नतीजा यह रहा कि मात्र 9 पार्षद ही जीत सके। उनमें भी आम आदमी पार्टी ज्वाइन करने की होड़ लग रही है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष अली मेहंदी खान व दो पार्षद तो आम आदमी पार्टी में शामिल हुए। लेकिन कुछ घंटों में ही वापस कांग्रेस में चले गये। लेकिन जीतने वाले पार्षद भी सत्तारूढ़ दल के साथ जाने में ही अपना भला जान रहे हैं। वैसे भी दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने साफ कह दिया है कि जीतने वाले सभी 250 पार्षद अब किसी पार्टी के नहीं बल्कि दिल्ली की जनता के हैं। उन सभी को दिल्लीवासियों की सेवा करनी है। ऐसा लग रहा है कांग्रेस के जीते हुए सभी पार्षद आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ही लेंगे। वैसे कांग्रेस का दिल्ली में न तो कोई सांसद है और न ही कोई एमएलए। किस बूते पर अपनी जीत का दावा करेगी। कांग्रेसी बस शीला दीक्षित के नाम पर वोट मांगने का काम कर रहे है। एमसीडी के चुनाव में भी कांग्रेस ने चुनाव में काफी अनमने ढंग से प्रचार किया। जो भी उम्मीदवार जीते वो अपनी निजी पहचान और काम की वजह से ही जीते हैं।
एक अनार कई बीमार
हिमाचल मेंं कांग्रेस ने जीत तो हासिल कर ली है लेकिन अब सारा चकल्लस सीएम पद के लिये चल रहा है। सीएम पद की सबसे प्रबल दावेदारी पूर्व सीएम वीरभ्ज्ञद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह हैं। उन्होंने भी अपनी दावेदारी पेश कर दी है। उनका मानना है कि कांग्रेस की जीत में पूर्व और दिवंगत सीएम वीरभद्र का अहम् रोल है। कांग्रेस आला कमान को इस बात का ध्यान रखना होगा। इसके अलावा सुखविंदर सिंह सुक्खू और मुकेश अग्निहोत्री के नाम भी सीएम रेस में बताये जा रहे हैं। वैसे सभी ने आलाकमान के निर्णय पर सहमति जतायी है।








