भारतीय राजदूत और दूतावास के कर्मचारियों सहित 120 भारतीयों को लेकर वायुसेना का ग्लोबमास्टर हिंडन एयरबेस पहुंच चुका है। इससे पहले काबुल से उड़े विमान को ईंधन भरने के लिए गुजरात के जामनगर एयरबेस पर उतारा गया था। अधिकारियों ने बताया कि 11.15 पर जामनगर पहुंचे विमान में ईंधन भरने के बाद इसे 3 बजे गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस के लिए रवाना किया गया।
भारतीय वायुसेना के विमान ने सुबह करीब 8 बजे काबुल हवाईअड्डे से उड़ान भरी। भारतीयों को वापस लाने के लिए अफगानिस्तान से भारत आने वाला यह दूसरा विमान है। इससे पहले, काबुल में हवाईअड्डा संचालन निलंबित होने से पहले एक अन्य सी-17 विमान के जरिए सोमवार को कुछ भारतीय दूतावास कर्मियों समेत करीब 40 लोगों को अफगानिस्तान से भारत लाया गया था।
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे से पैदा हुई परिस्थितियों के बीच भारत लौटे वहां के राजदूत रुद्रेन्द्र टंडन ने कहा कि अब भी राजधानी काबुल में कुछ भारतीय हैं और एयर इंडिया वहां के हवाई अड्डे के चालू रहने तक अपनी व्यावसायिक सेवाए चालू रखेगा। काबुल स्थित भारतीय दूतावास के कर्मियों के साथ भारत लौटे राजदूत ने असामान्य परिस्थितियों में भी उन्हें और अन्य को स्वदेश वापस लाने के लिए वायु सेना के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की स्थिति पर उच्चतम स्तर से मिनट-दर-मिनट नजर रखी जा रही है और इसी के आधार पर उन्हें और अन्य भारतियों को वहां से वापस लाने की कार्रवाई की गई।
The @IAF_MCC Globemaster which took off from Kabul, made a pit stop at Jamnagar & will now land at Hindon Airbase with about 120 people on board including officials of India’s Embassy in Afghanistan pic.twitter.com/SpRbBkdzzr
— Payal Mehta/પાયલ મેહતા/ पायल मेहता/ পাযেল মেহতা (@payalmehta100) August 17, 2021
उन्होंने कहा कि बदली हुई परिस्थितियों के बावजूद अब भी काबुल में कुछ भारतीय हैं और वहां हवाई अड्डे के फिर से शुरू होने पर उन्हें वापस लाया जाएगा। यह पूछे जाने पर कि ऐसे कितने भारतीय हैं, उन्होंने कहा कि दुभार्ग्यवश वहां ऐसे लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। अफगानिस्तान जैसे देशों में जहां राजनीतिक परिस्थितियां तेज़ी से बदल जाती हैं, भारतीय नागरिकों का ख़ुद को दूतावास में पंजीकृत करना ज़रूरी है।
अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास को अस्थायी तौर पर बंद किए जाने के बारे में पूछे जाने पर टंडन ने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि हमने अफगानिस्तान के लोगों को छोड़ दिया है। उनसे हमारा पुराना नाता और उनका कल्याण अभी भी हमारे मन में है। आगे भी हम उनके साथ अपने संबंध जारी रखने के प्रयास करेंगे। हालांकि मैं यह नहीं कह सकता कि यह किस स्वरूप में होगा क्योंकि स्थितियां बहुत तेजी से बदल रही हैं।”







