आगरा: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां आयुष्मान योजना को गरीबों के लिए गौरवशाली योजना बता रहे हैं तो वहीं इसी योजना को आगरा में निजी अस्पतालों ने मजाक बना दिया है. अस्पताल मुख्यमंत्री के सस्ते और सुलभ इलाज के आदेशों की भी धज्जियां उड़ा रहे हैं.
दरअसल, आगरा के एमजी रोड स्थित राम रघु हॉस्पिटल अपनी मनमानी पर उतर आया है. राम रघु हॉस्पिटल लगातार मरीजों को लूटने का काम कर रहा है. शिकोहाबाद के रहने वाले नीरज अग्रवाल को उनके परिजनों ने कोविड-19 होने पर राम रघु हॉस्पिटल में भर्ती कराया था. मरीज के भाई का आरोप है कि हॉस्पिटल संचालकों ने इलाज के नाम पर उनसे 8 दिनों के अंदर साढ़े 3 लाख रुपए जमा करा लिए और 2 लाख का बकाया बिल का पर्चा हाथ में थमा दिया.
पीड़ित के भाई धीरज अग्रवाल ने बताया कि उनके भाई का आयुष्मान योजना के तहत कार्ड बना हुआ है लेकिन राम रघु हॉस्पिटल प्रशासन ने ये कहते हुए कार्ड लेने से इनकार कर दिया कि हॉस्पिटल का प्रबंधन बदल गया है लिहाजा अब ये कार्ड हॉस्पिटल में नहीं चलेगा. गौरतलब है कि, देश के प्रधानमंत्री जहां गरीबों को 5 लाख तक का मुफ्त इलाज देने का दावा करते हों लेकिन जमीनी स्तर पर निजी अस्पताल इसका कितना पालन करते हैं ये उसका जीता जागता उदाहरण है.
इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने भी कोविड-19 के लिए नियमावली जारी की है, जिसके तहत 10,000 से लेकर 18000 रुपए तक हॉस्पिटल संचालक एक दिन का खर्चा वसूल कर सकते हैं लेकिन आगरा के राम रघु हॉस्पिटल ने महज 8 दिनों का खर्चा करीब 6 लाख तक पहुंचा दिया जो ये बताने के लिए काफी है कि राम रघु हॉस्पिटल संचालक न देश के प्रधानमंत्री के आदेशों की परवाह करते हैं और न ही प्रदेश के मुख्यमंत्री के आदेशों को तवज्जो दे रहे हैं. इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन अपना पक्ष भी रखना नहीं चाह रहा है.
मामले पर एडीएम सिटी डॉ प्रभाकांत अवस्थी ने बोलने से इनकार कर दिया. हालांकि, उनका कहना था कि अगर पीड़ित शिकायत करता है तो आरोपी हॉस्पिटल पर कार्रवाई की जाएगी. अब सवाल उठता है कि जिस शासनादेश को पालन कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन पर होती है अगर वही शिकायत का इंतजार करे तो ऐसे निजी अस्पतालों पर अंकुश कैसे लग पाएगा.
सूत्रों की मानें तो विवादों में रहने वाले राम रघु हॉस्पिटल पर जिला प्रशासन के एक बड़े अधिकारी का संरक्षण है जिसकी वजह से स्वास्थ्य महकमा और मुख्य चिकित्सा अधिकारी राम रघु हॉस्पिटल पर कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं. आपको याद दिला दें कि करीब 3 माहीने पहले भी एक बुजुर्ग की ऑक्सीजन न मिलने की वजह से इसी हॉस्पिटल में मौत हो गई थी जिसकी 3 महीने से जांच चल रही है. 3 महीने गुजर जाने के बाद भी आज तक स्वास्थ्य विभाग जांच पूरी नहीं कर पाया है.
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