आपको भले ही प्याज अभी 40-50 रुपए किलो मिल रहा हो, लेकिन किसानों को इसकी कितनी कम कीमत मिल रही है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महाराष्ट्र के सोलापुर में 1123 किलो प्याज बेचने वाले किसान के हाथ में सिर्फ 13 रुपए आए। कमीशन एजेंट ने दावा किया कि फसल की खराब गुणवत्ता की वजह से उसे कम कीमत मिली। 

सोलापुर स्थित कमीशन एजेंट की ओर से दिए गए बिक्री रसीद के मुताबिक, किसान बप्पू कावड़े ने 1,123 किलो प्याज की बिक्री की जिसके बदले उन्हें 1,665.50 रुपए मिले। लेकिन मजदूर खर्च, तौल शुल्क और परिवहन पर 1651.98 रुपए खर्च हो गए। इस तरह किसान के हाथ में 13 रुपए ही बचे। यह भी ध्यान दें कि कावड़े के खर्च में प्याज उत्पादन की लागत भी है। 

स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता और पूर्व लोकसभा सांसद राजू शेट्टी ने कावड़े की रसीद को ट्वीट करते हुए लिखा, ”कोई महज 13 रुपए से क्या करे? यह अस्वीकार्य है। किसान ने प्याज के 24 बैग खेत से कमीशन एजेंट की दुकान में ले जाकर बेचे और इससे 13 रुपए की आमदनी हुई।” उन्होंने आगे लिखा, ”वह कैसे उत्पादन लागत चुकाएगा, जिसमें फसल के लिए मिट्टी तैयार करना, बीज खरीद, खाद और सिंचाई खर्च शामिल है? यदि प्याज की कीमतें आसमान छूतीं तो केंद्र सरकार युद्ध स्तर पर अन्य देशों से उपज का आयात करती। हालांकि अभी कीमतें कम हो गई हैं तो सरकार किसानों की दुर्दशा को नजरअंदजा करेगी।”
 

शेट्टी ने कहा कि कावड़े ने 1512 रुपए परिवहन शुल्क चुकाने के लिए कमाई कर ली, वरना यह भी उसे अपनी जेब से देना पड़ता। कावड़े से प्याज खरीदने वाले कमीशन एजेंट रुद्रेश पाटिल ने कहा, ”मैंने कम कीमत पर प्याज खरीदी, क्योंकि उत्पाद की गुणवत्ता बहुत खराब थी। प्याज गीली थी और पिछले कुछ दिनों में बेमौसम बारिश की वजह से खराब हो गई थी। इसी वजह से इतनी कम कीमत मिली। पाटिल ने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाली प्याज की कीमत ठीक मिल रही है। कावड़े प्रतिक्रिया के लिए उपलब्ध नहीं हो सके।  

 





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