केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के बागपत से आए किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। किसानों से मुलाकात के बात मीडिया से बातचीत में तोमर ने दावा किया कि किसानों ने तीन नए कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए उन्हें अपना पत्र सौंपा है। उन्होंने कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी पर भी निशाना साधा, जिन्होंने हाल ही में राष्ट्रपति से मुलाकात कर उनसे तीनों कानून को वापस लेने के मामले में दखल देने को कहा था।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने कृषि मंत्री तोमर के हवाले से लिखा, “बागपत से आए किसानों ने केंद्र के नए कृषि कानूनों के समर्थन में मुझे पत्र सौंपा। उन्होंने मुझसे कहा कि सरकार को किसी के दबाव में आकर कृषि कानूनों में संशोधन नहीं करना चाहिए।” किसान मजदूर संघ से जुड़े बागपत के 60 किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कृषि भवन में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की थी।

कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन को देखते हुए तोमर ने पिछले कुछ दिनों में कई किसान नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिलकर बातचीत की है और उन्होंने दावा किया है कि ये लोग सुधार के पक्ष में हैं। एक अन्य ट्वीट में एएनआई ने केंद्रीय कृषि मंत्री के हवाले से कहा, “राहुल गांधी जो कुछ भी कहते हैं, उनकी बातों को खुद कांग्रेस भी गंभीरता से नहीं लेती। आज जब वे हस्ताक्षरों के साथ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए राष्ट्रपति के पास गए, तो इन किसानों ने मुझसे कहा कि कांग्रेस का कोई भी नेता हमारे हस्ताक्षर लेने के लिए नहीं आया था।”

दरअसल, कृषि मंत्री उस ज्ञापन का हवाला दे रहे थे जो राहुल गांधी के द्वारा राष्ट्रपति को सौंपा गया है और यह दावा किया गया है कि कृषि कानून के खिलाफ इसमें 2 करोड़ हस्ताक्षर हैं। तोमर ने कहा, “अगर राहुल गांधी को इतनी ही चिंता थी, तो उन्हें किसानों के लिए कुछ करना चाहिए था। कांग्रेस का चरित्र हमेशा से ही किसानों के खिलाफ रहा है।”

गौरतलब है कि तीन कृषि कानूनों के संबंध में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात करने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को संसद का संयुक्त सत्र बुलाना चाहिए और इन कानूनों को वापस लेना चाहिए। इस प्रतिनिधिमंडल में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद और लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी शामिल थे। उन्होंने कहा कि दो करोड़ हस्ताक्षरों के साथ राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया गया है।





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