भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर.के.एस. भदौरिया ने शनिवार को कहा कि भारत पूर्वी लद्दाख में चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए तैयार है। पू्र्वी लद्दाख में अप्रैल 2020 से भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने की स्थिति में हैं, जिसकी वजह से दोनों देशों में तनावपूर्ण हालात हैं। वायुसेना प्रमुख ने जोधपुर में मीडिया से बात करते हुए कहा, ”अगर वे (चीन) आक्रामक हो सकते हैं, तो हम भी आक्रामक हो जाएंगे। हमारी पूरी तैयारी है।” इन दिनों जोधपुर में भारत और फ्रांस के बीच संयुक्त वायुसेना अभ्यास चल रहा है।

भदौरिया का यह कॉमेंट लद्दाख में सीमा तनाव को कम करने के लिए चीन के साथ सैन्य बातचीत के नौवें दौर की पूर्व संध्या पर आया है। भारतीय सेना और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच कोर कमांडर-स्तरीय बातचीत रविवार को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के चीनी पक्ष में मोल्डो में आयोजित की जानी है।

वहीं, वरिष्ठ भारतीय और चीनी कमांडर पिछली बार 6 नवंबर को मिले थे। लद्दाख में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और जारी सैन्य बातचीत से कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। अधिकारियों ने बताया कि कम समय में बातचीत से कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिल सकता है, लेकिन बातचीत को जारी रखना होगा। एक्सपर्ट्स भी सैन्य बातचीत से ज्यादा उम्मीद नहीं कर रहे हैं। 

उत्तरी सेना के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा (रिटायर्ड) ने कहा कि यह अच्छी बात है कि बातचीत चल रही है और दोनों पक्षों के बीच कम्युनिकेशन को बनाए रखा जा रहा है। उन्होंने कहा, ”हालांकि, यह संभावना नहीं है कि कोई भी बड़ी सफलता मिलेगी, क्योंकि ऐसा कोई आम आधार नहीं दिखाई देता, जिसके आधार पर एक समझौता हो सके। इसे राजनीतिक या कूटनीतिक स्तर पर ले जाना होगा। चूंकि ऐसा नहीं हो रहा है तो हमें सैन्य बातचीत से ज्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए।”

पिछले महीने वायुसेना प्रमुख भदौरिया ने एक ऑनलाइन सेमिनार में पूर्वी लद्दाख विवाद का जिक्र करते हुए कहा था कि भारत के साथ कोई भी बड़ा संघर्ष चीन की वैश्विक आकांक्षाओं और बड़ी योजनाओं के लिए ठीक नहीं है। सेमिनार का आयोजन थिंक टैंक विवेकानंद फाउंडेशन ने किया था। 

इससे पहले, 12 जनवरी को सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा था कि सैन्य और कूटनीतिक स्तर की वार्ताओं के बीच पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना लंबे समय तक डटे रहने के लिए पूरी तरह से तैयार है। 6 नवंबर को आठवें दौर की वार्ता के दौरान, भारतीय सेना और पीएलए ने कहा कि वे अपने अग्रिम पंक्ति के सैनिकों को एलएसी पर संयम बरतने और गलतफहमी से बचने के लिए कहेंगे।

बता दें कि भारत और चीन, दोनों ही लंबे समय से पूर्वी लद्दाख में डटे रहने के लिए तैयार हैं। दोनों ही देशों के सैनिकों ने कड़ाके की ठंड में भी एलएसी पर तैनाती बनाए रखी है। हालांकि, ठंड की वजह से चीन ने अपने तकरीबन दस हजार सैनिकों को डेप्थ इलाकों से वापस भी बुलाया है।



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