लद्दाख सेक्टर में के-9 वज्र हॉवित्जर (K-9 Vajra Howitzers) को सफलतापूर्वक तैनात और परीक्षण करने के बाद, भारतीय सेना अब चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के मध्य और पूर्वी क्षेत्र में उच्च ऊंचाई वाले पहाड़ों में भी के-9 वज्र हॉवित्जर तैनात करने की योजना बना रही है।
भारतीय सेना ने पिछले साल मार्च-अप्रैल की समय सीमा में पूर्वी लद्दाख सेक्टर के साथ लद्दाख में मेड इन इंडिया तोपों को तैनात किया था। माना जाता है कि भारतीय सेना के इस कदम को उन क्षेत्रों में बहुत प्रभावी पाया गया जहां वे तेज गति से आगे बढ़ सकते हैं और अग्रिम क्षेत्रों में जल्दी पहुंच सकते हैं।
उत्तराखंड के अलावा सिक्किम और अरुणाचल में होगी तैनाती
सरकारी सूत्रों ने एएनआई को बताया, “तोपों का परीक्षण बहुत सफल रहा है। अब योजना है कि ऐसी ही 200 और हॉवित्जर का ऑर्डर दिया जाए और उन्हें उत्तराखंड सहित मध्य सेक्टर में उच्च ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र और सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित पूर्वी सेक्टर में उन क्षेत्रों में तैनात किया जाए जहां बख्तरबंद वाहनों को तेजी से ले जाया जा सकता है।”
सेना की जरूरतों को पूरा करती हैं होवित्जर तोपें
सूत्रों ने कहा कि होवित्जर का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है और ये तोपें ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करती हैं। हाल ही में सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने एएनआई को बताया था कि रेगिस्तान और मैदानी इलाकों में तैनाती के लिए हासिल की गई तोपों को चीन के साथ संघर्ष को देखते हुए कुछ संशोधनों के साथ अन्य जगहों पर भी तैनात किया गया था।
क्या है इन मेड इन इंडिया तोपों की खासियत?
लद्दाख में रेजीमेंटों ने अत्यधिक सर्दियों की परिस्थितियों में हॉवित्जर संचालित करने के लिए विशेष टेंट और सुविधाओं का निर्माण किया है। जनरल नरवणे गुजरात में सूरत के पास हजीरा में लार्सन एंड टुब्रो फैसिलिटी में बनीं हॉवित्जर के इंडक्शन और संचालन की निगरानी कर रहे हैं। सेल्फ प्रोपेल्ड गन की मारक क्षमता 38 किलोमीटर है लेकिन ये पूर्वी लद्दाख में 16,000 फीट की ऊंचाई तक के पहाड़ों में 50 किलोमीटर की दूरी पर लक्ष्य को सफलतापूर्वक मार सकती हैं।







