कोरोना महामारी के बाद से बढ़ी बेरोजगारी चिंता का विषय बनी हुई है। देश में बेरोजगारी बढ़ने की वजह बाजार में मांग नहीं निकलने से कंपनियों द्वारा अस्थायी तौर पर कारोबार विस्तार रोकना है। इस बीच रोजगार को लेकर एक दूसरी तस्वीर सामने आई है। सरकार द्वारा जारी तिमाही रोजगार सर्वेक्षण (क्यूईएस) की आंकड़ों के अनुसार, देश के अहम नौ कारोबारी क्षेत्रों में करीब दो लाख रिक्तियां यानी नौकरी के मौके हैं।

क्यूईएस के आंकड़ों के अनुसार, कुशल कामगारों की कमी सहित अन्य वजहों से चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में नौ क्षेत्रों में करीब 1,87,062 रिक्तियां हैं। जिन नौ क्षेत्रों को शामिल किया गया है उनमें विनिर्माण क्षेत्र, निर्माण, व्यापार, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रेस्तरां, आईटी/ बीपीओ और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं। इन अहम क्षेत्रों में 308 लाख लोग काम करते हैं।

यह अप्रैल-जून 2021-22 तक इन संस्थानों द्वारा दी गई कुल नौकरियों के 0.6 फीसदी से थोड़ा ज्यादा है। इन रिक्तियों में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा है क्योंकि इस अवधि के दौरान यहां 99,429 रिक्तियां यानी जॉब के मौके उपलब्ध हैं। विनिर्माण क्षेत्र के करीब 4.5 कंपनियों ने अपने यहां जगह खाली होने की बात बताई हैं। आईटी-बीपीओ में भी इतने ही कंपनियों ने इस अवधि के दौरान रिक्तियां बताई हैं। इस सेक्टर के 2,793 कंपनियों में रिक्तियां हैं।

कुशल कामगार नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी

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कंपिनयों में रिक्तियां की वजह इस्तीफे, सेवानिवृत्ति, कुशल श्रमिकों की उपलब्धता न होना है। विशेषज्ञों का कनहा है कि सर्वे की रिपोर्ट से यह साफ पता चला है कि कुशल श्रमिकों की कमी रिक्तियों की मुख्य वजह है। उसके बाद सेवानिवृत्ति व इस्तीफे आते हैं। इसके देखते हुए आने वाले समय में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय को इस क्षेत्र पर ध्यान देने की जरूरत है जिससे भविष्य में इस तरह का संकट न हो जिससे कारोबार प्रभावित हो। कुशल कामगार होने से रोजगार के मौके भी अधिक उपलब्ध होंगे।

कौशल विकास पर ध्यान नहीं

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ 18 प्रतिशत कंपनियां औपचारिक कौशल विकास कार्यक्रम चलाती हैं जो सिर्फ उनके अपने कर्मचारियों के लिए होता है। वहीं, कौशल प्रशिक्षण देने वाले कंपनियों में आईटी/बीपीओ क्षेत्र पहले स्थान पर (29.9 प्रतिशत) है, जिसके बाद वित्तीय सेवा (22.8 प्रतिशत) और शिक्षा क्षेत्र (21.1 प्रतिशत) का स्थान है। इसको देखते हुए आने वाले समय में कंपनियों को अपने स्तर पर कौशल विकास पर जोर देना होगा।

रोजगार में महिलाओं की हिस्सेदारी घटी

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रोजगार में महिला कामगारों की समग्र भागीदारी 29 फीसदी रही, जो 2013-14 में हुई छठीं आर्थिक जनगणना के दौरान दर्ज की गई 31 फीसदी भागीदारी से थोड़ी कम है। इन नौ क्षेत्रों में नियमित कामगार, कार्यबल का अनुमानित 88 फीसदी हैं। हालांकि, निर्माण क्षेत्र के 18 फीसदी कर्मचारी संविदा कर्मचारी हैं और 13 फीसदी अंशकालिक कर्मचारी हैं। क्यूईएस 12,000 प्रतिष्ठानों पर किया गया। इनमें से लगभग 27% प्रतिष्ठान रोजगार में महामारी की वजह से आई गिरावट से प्रभावित हुए।



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