पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम आयु में बदलाव के संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि अब लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 से बढ़ाकर 21 की जा सकती है। इससे लड़कियों के जीवन में कई बदलाव आएंगे। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि कई देश ऐसे भी हैं जहां लड़कियों के लिए शादी की कोई न्यूनतम उम्र सीमा नहीं है। तो वहीं, कई देशों में लड़कियों को शादी के लिए कम से कम 21 साल का होना अनिवार्य है। आइए, जानते हैं ऐसे देशों के बारे में…

​यहां शादी की कोई न्यूनतम उम्र नहीं

साऊदी अरब, यमन और जिबूती में लड़कियों की शादी की कोई न्यूनतम उम्र तय नहीं है।

​15 साल या उससे कम है शादी की न्यूनतम आयु

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ईरान में 13 साल, लेबनान में 9 साल और सूडान में युवावस्था की शुरुआत लड़कियों की शादी न्यूनतम उम्र है। वहीं चाड और कुवैत में 15 साल की उम्र पार कर लेने के बाद लड़कियों की शादी की जा सकती है।

​यहां 16-17 साल है शादी की मिनिमम एज

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अफगानिस्तान, बहरीन, पाकिस्तान, कतर और यूके समेत दुनिया के सात देशों में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 16 साल है। वहीं नॉर्थ कोरिया, सीरिया और उज्बेकिस्तान में शादी की न्यूनतम उम्र 17 साल है।

​143 देशों में शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल

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अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, इटली, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड, ब्राजील, रूस, साउथ अफ्रीका, सिंगापुर, श्रीलंका और यूएई समेत दुनिया के कुल 143 देशों में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल तय की गई है। इन देशों में भारत भी शामिल है।

​यहां 19-20 साल है शादी की न्यूनतम आयु

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अल्जीरिया, साउथ कोरिया और समोआ में लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु 19 साल तय की गई है। वहीं चीन, जापान, नेपाल और थाइलैंड समेत कुल 6 देशों में लड़कियों को शादी के लिए कम से कम 20 साल का होना जरूरी है।

​20 देशों में शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल

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इंडोनेशिया, मलेशिया, नाइजीरिया और फिलिपींस समेत दुनिया के कुल 20 देशों में लड़कियों को शादी के लिए कम से कम 21 साल का होना अनिवार्य है।

​भारत में बीते 5 साल में हुईं इतनी शादियां

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भारत में बीते 5 सालों में 3 करोड़ 76 लाख लड़कियों की शादियां हुईं। इनमें से 2 करोड़ 55 लाख ग्रामीण क्षेत्र में और 1 करोड़ 21 लाख शहरी क्षेत्र में हुईं। इनमें से 1 करोड़ 37 लाख (1.06 करोड़ ग्रामीण और 31 लाख शहरी) लड़कियों ने 18-19 की उम्र में शादी की। वहीं 75 लाख लड़कियों (49 लाख ग्रामीण और 26 लाख शहरी) ने 20-21 की उम्र में शादी की। ग्रामीण महिलाओं की बात करें तो 5 सालों में 61% ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली लड़कियों ने 18-21 की उम्र के बीच शादी की।

​न्यूनतम आयु में बदलाव से क्या होगा फायदा?

लड़कियों की न्यूनतम उम्र सीमा में बदलाव करने के लिए पीछे उद्देश्य मातृ मृत्युदर (maternal mortality) में कमी लाना है। माना जा रहा है कि सरकार की इस कवायद के पीछ सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला भी हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वैवाहिक बलात्कार (marital rape) से बेटियों को बचाने के लिए बाल विवाह पूरी तरह से अवैध माना जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने विवाह के लिए न्यूनतम उम्र के बारे में फैसला लेने का काम सरकार पर छोड़ दिया था। एक अधिकारी के मुताबिक, शादी के लिए लड़की और लड़के की न्यूनतम उम्र को एकसमान होना चाहिए। अगर मां बनने की कानूनी उम्र 21 साल तय कर दी जाती है तो महिला की बच्चे पैदा करने की क्षमता वाले सालों की संख्या अपने आप घट जाएगी।



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