रांची में चारा घोटाले में सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने नियुक्ति घोटाले में आरोपी को शिक्षा मंत्री पद दिये जाने को लेकर नीतीश और भाजपा पर हमला बोला। लालू ने ट्वीट कर लिखा कि विडंबना देखिए जो भाजपाई कल तक मेवालाल को खोज रहे थे आज मेवा मिलने पर मौन धारण किए हैं।

लालू यहीं नहीं रूके उन्होंने लिखा कि तेजस्वी जहां पहली कैबिनेट में पहली कलम से 10 लाख नौकरियां देने को प्रतिबद्ध थे वहीं नीतीश ने पहली कैबिनेट में नियुक्ति घोटाला करने वाले मेवालाल को मंत्री बना अपनी प्राथमिकता बता दिया।

 

अब जबकि मुंगेर के तारापुर विधानसभा सीट से जीतकर आए जदयू नेता को जब शिक्षा मंत्री बनाया गया तो एक बार फिर ये मामला गरमा गया है। तमाम विपक्षी दल इसे मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है। सीपीआई एमएल के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने भी कहा कि यदि मेवालाल चौधरी को मंत्रिमंडल से अविलंब बर्खास्त नहीं किया गया तो पार्टी धारावाहिक आंदोलन में उतरेगी। राज्य कमेटी की बैठक में उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को शिक्षा विभाग दिया गया है, जो कृषि विश्वविद्यालय में गड़बड़ी को लेकर कभी खुद सीएम द्वारा ही पार्टी से निकाला गया था।

वहीं राजद ने भी इसे मुद्दा बना लिया है राजद ने ट्वीट कर कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपी और @NitishKumar के नवरत्न नए शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी पर उनकी पत्नी की संदेहास्पद मौत का भी आरोप है। जब मीडिया ने सवाल किया तो उनका पीए धमकाने लगा। एनडीए की गुंडागर्दी चालू है, महाजंगलराज के दिल्ली वाले महाराजा मौन हैं।

इसके अलावा पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ कुमार दास ने मंत्री मेवालाल चौधरी की पत्नी की मौत के मामले में उनसे पूछताछ की मांग की है। इसके लिए उन्होंने डीजीपी एसके सिंघल को पत्र लिखा है। वर्ष 1994 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे श्री दास ने पत्र में लिखा है कि श्री चौधरी की पत्नी नीता चौधरी की जलने से मौत हो गई थी। मुझे सूचना है कि इसके पीछे राजनीतिक षड्यंत्र है। डीजीपी से अनुरोध किया है कि इस मामले में एसआईटी गठित कर मंत्री से पूछताछ की जाए। 

ये है मामला
आपको बता दें कि बिहार चुनाव 2020 में जीत के बाद नीतीश की अगुवाई में एनडीए की जो नवगठित सरकार बनी है उसमें नीतीश सरकार के करीबी और सबौर कृषि यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी रहे मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्री बनाया गया है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू सबौर) भागलपुर में वर्ष 2012-2013 में लगभग 160  सहायक प्राध्यापक व कनीय वैज्ञानिकों की नियुक्ति में अनियमितता बरती गई थी। अभ्यर्थियों की ओर से शिकायत किए जाने के बाद बिहार के तत्कालीन राज्यपाल और वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जांच के निर्देश दिये थे। हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस ने इसकी जांच की थी और नियुक्ति घोटाले में तत्कालीन वीसी और वर्तमान में मंत्री बनाये गये मेवालाल चौधरी पर लगे आरोप सही पाये गये थे। राजभवन के निर्देश पर फरवरी, 2017 में पूर्व कुलपति के खिलाफ सबौर थाना में केस दर्ज किया गया था। पूर्व कुलपति से भी एसआईटी ने पूछताछ की थी। उसके बाद वे भूमिगत हो गये थे और बाद में पता चला कि उन्होंने हाइकोर्ट से बेल भी ले लिया।
 





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