भारत और पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर और अन्य क्षेत्रों में सीजफायर पर सभी समझौतों का पालन करने पर सहमति जताई है। बुधवार रात से यह फैसला लागू भी कर दिया गया है। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत पाकिस्तान के साथ रिश्ते सामान्य करना चाहता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, ”भारत पाकिस्तान के साथ रिश्ते सामान्य करना चाहता है। हम शांतिपूर्ण तरीके से सभी द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी संबंधों की इच्छा रखता है। प्रमुख मुद्दों पर हमारी स्थिति में अभी भी कोई बदलाव नहीं हुआ है।
मालूम हो कि भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच बैठक में सीजफायर को लेकर फैसला किया गया है। इसके बाद संयुक्त बयान में कहा गया कि सीमाओं पर दोनों देशों के लिए लाभकारी एवं स्थायी शांति स्थापित करने के लिए डीजीएमओ ने उन अहम चिंताओं को दूर करने पर सहमति जताई, जिनसे शांति बाधित हो सकती है और हिंसा हो सकती है। वहीं, पाकिस्तान ने समझौते को कूटनीतिक सफलता बताते हुए कहा है कि इससे और अधिक रास्ते खुल सकेंगे। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के राष्ट्रीय सुरक्षा डिविजन और रणनीतिक नीति नियोजन के विशेष सहायक मोईद यूसुफ ने एक ऑडियो जारी कर कहा है कि सीजफायर जोकि 24 फरवरी की आधी रात से लागू हुआ है, वह काफी ठोस है और सकारात्मक डेवलपमेंट है।
India hasn’t conceded any territory and prevented unilateral change in the status quo. The mutual redeployment should not be misinterpreted and there is absolutely no change with respect to our position on the Line of Actual Control: MEA on India, China disengagement in Ladakh pic.twitter.com/m029mvZwrN
— ANI (@ANI) February 25, 2021
वहीं, पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच डिसइंगेजमेंट पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता श्रीवास्तव ने कहा कि भारत ने किसी भी क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया है और यथास्थिति में एकतरफा बदलाव को रोका है। म्यूचुअल रि-डिप्लोएमेंट की गलत व्याख्या नहीं की जानी चाहिए। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हमारी स्थिति के संबंध में बिल्कुल कोई बदलाव नहीं हुआ है। बता दें कि पिछले दिनों भारत-चीन के बीच पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे पर डिसइंगेजमेंट को लेकर सहमति बनी थी, जिसके तहत दोनों देशों की सेनाएं हथियारों के साथ पीछे चली गईं। सहमति के अनुसार, भारत को फिंगर 3 तक वापस जाना था, जबकि चीन को फिंगर 8 तक वापसी करनी थी।







