धनतेरस और दिवाली के दिन सोना खरीदना शुभ माना जाता है। इसके चलते भारत में इस अवसर पर सोने की जमकर खरीदारी होती है। हालांकि, सोना खरीदने की इस परंपरा का लोगों को फायदा भी मिलता आया है। सोने से बीते 10 साल में निवेशकों को सालाना 6.56 फीसदी रिटर्न मिला है। यह पिछले 10 वर्षों में लागत मुद्रास्फीति सूचकांक (सीआईआई) में 5.6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि से अधिक है। सीआईआई महंगाई के कारण माल और संपत्ति की लागत में वृद्धि को इंगित करता है।

इस तरह सोना पिछले एक दशक में महंगाई को मात देने में कामयाब रहा है। वहीं, अक्तूबर 2011 से बीएसई सेंसेक्स सालाना लगभग 13% बढ़ा है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले 10 साल की अवधि में, 2015 और 2020 के बीच खरीदे गए सोने ने दोहरे अंकों में रिटर्न दिया है लेकिन करीब एक साल से सोने ने निवेशकों को निराश किया है। सोने ने निवेशकों को नकारात्मक रिटर्न दिया है।

बीते 5 साल में दिया 56% का रिटर्न

भारत में सोने का दाम 1970 की तुलना में अभी 261 गुना ज्यादा है। 1970 में सोना 184 रुपए प्रति 10 ग्राम के भाव से बिक रहा था जो अब करीब 48 हजार पर है। अगस्त 2020 में सोने ने 56,200 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर छुआ था। वैक्सीन आने के बाद मार्च 2021 में ये 43 हजार पर आ गया था। बीते 5 सालों की बात करें तो सोने ने 56% का रिटर्न दिया है यानी सालाना 11% से भी ज्यादा।

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पोर्टफोलियो में सोना ज्यादा ठीक नहीं

यह सही है कि एक दशक में सोने ने महंगाई को मात देते हुए रिटर्न दिया है। इसके बावजूद वित्तीय योजनाकारों का कहना है कि किसी के पोर्टफोलिया में अधिक सोना होना ठीक नहीं है। सोने में निवेश केवल मुद्रास्फीति के खिलाफ बचाव और बाजार की अस्थिरता के खिलाफ बचने के लिए किया जाना चाहिए। यह देखा गया है कि कमजोर आर्थिक दृष्टिकोण से सोने की कीमतों में तेजी आती है और जब बाजार में उथल-पुथल होती है तो एक परिसंपत्ति वर्ग के रूप में सोना अच्छा करता है। दोनों कारण 2020 में सोने की कीमतों में तेज उछाल आया। हालांकि, ऐसा बराबर नहीं होता है। इसलिए पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी 10 से 15 फीसदी रखनी चाहिए।

गोल्ड ईटीएफ में निवेश करना फायदे का सौदा

गोल्ड ईटीएफ म्यूचुअल फंड की एक स्कीम है। इसमें निवेशक सोने की खरीद यूनिट के अनुसार कर सकते हैं। जब निवेशक सोना बेचते हैं तो उन्हें उस समय के बाजार मूल्य पर पैसा का भुगतान किया जाता है। देश की कई म्यूचुअल फंड कंपनियां गोल्ड ईटीएफ में निवेश की सुविधा देती है। वित्तीय योजनाकारों का कहना है कि छोटे निवेशकों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है। निवेशक लंबी अवधि के लिए गोल्ड ईटीएफ में निवेश कर शानदार रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं। गोल्ड ईटीएफ की खरीद-फरोख्त से पहले सोने की कीमतों के रुझान पर नजर रखें। स्टॉक की तरह ही, आप गोल्ड ईटीएफ को कम कीमतों पर खरीदना और कीमतें बढ़ने पर बेच सकते हैं।

 



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