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गुजरात का नाम जहां व्यापार के लिये जाना जाता है वहीं दूसरी ओर ऐसे उद्योगपतियों के लिये भी जाना जा रहा है जो अरबों रुपये का बैंक लोन लेकर चंपत हो गये हैं। विजय माल्या, मेहुल चौकसे, नीरव मोदी समेत बहुत से व्यापारी घोटाला करके देश छोड़ कर भाग गये हैं। उन्हीं में एक नाम और जुड़ गया है। एबीजी शिपयार्ड के मालिक ऋषि अग्रवाल ने भारतीय बैंकों को 23 हजार का कर्ज लेकर विदेश् भाग गया है। बताया जा रहा है कि यह घोटाला अब तक का सबसे बड़ा बैंक घोटाला है। अग्रवाल ने 28 बैंकों से 23 हजार करोड़ का कर्ज लिया और लापता हो गया। फरवरी 2022 में ऋषि अग्रवाल के खिलाफ सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने इस कंपनी के खिलाफ जांच करने में पांच साल लगा दिये। जबकि कंपनी की खस्ता हालत की जानकारी सरकार और आरबीआई को 2013 में ही हो गयी थी। लेकिन एबीजी शिपयार्ड के नाम पर 2001 में 22,847 करोड़ का लोन लिया। इससे पहले नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने पीएनबी से 14 हजार करोड़ का लोन लिया और फरार हो गये। कांग्रेस ने यह आरोप लगाया है कि अब तक आठ सलों में 8 लाख 37 हजार करोड़ रुपये के घोटाले हुए हैं। साथ ही मोदी सरकार ने लाखों करोड़ रुपये का एनपीए किया है। प्छिले साढ़े सात साल में मोदी सरकार ने 8 लाख 37 हजार करोड़ के बैंक घोटाले हुए हैं। जानकार बताते हैं कि देश में इतने ज्यादा बैंक घोटाले आज तक नहीं हुए हैं। इतने बैंक घोटाले होने
से देश के बैंक कंगाल और बैंक बैंकिंग व्यवस्था बदहाल हो गयी है। मोदी सरकार ने पिछले आठ सालों में 21 लाख करोड़ का एनपीए किया है। चर्चा इस बात की भी है कि पीएम मोदी की जहाजरानी कंपनी में काफी दिलचस्पी थी। यही वजह तो नहीं रही कि उस पर कार्रवाई करने से सरकार ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गयी।
नौ माह बाद भी सीबीआई और सरकार एबीजी कंपनी के मालिक ऋषि अग्रवाल को खोज नहीं पाये हैं। इस मामले में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान है कि हमारी सरकार ने सीबीआई को जांच करने के आदेश दे रखे हैं। सीबीआई पूरी तरह से जांच में जुटी है। पर वो यह नहीं बता पा रही हैं कि ऋषि अग्रवाल इस वक्त देश में है या वो भी अन्य भगोड़े व्यापारियों की तरह देश छोड़ कर भाग गया है।
विपक्ष का कहना है कि जब आरबीआई ने उसकी कंपनी की खस्ता हालत देख कर काली सूची में डालने की सिफारिश की थी तब सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच क्यों नहीं करवाई और एफआईआर दर्ज क्यों नहीं करवाई। नवंबर 2013 में जब बैंकों ने इस कंपनी के कर्ज को एनपीए कर दिया गया। उस समय केन्द्र सरकार ने इस बात की जांच क्यों नहीं करवाई कि क्रूा ये कंपनी फ्राड तो नहीं कर रही है। 23 हजार करोड़ का लोन तो ले लिया गया लेकिन उसको लौटाया नहीं गया।








