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भाजपा के लिये समय काफी परेशानी वाला चल रहा है। पिछले माह में पांच प्रदेशों के विधानसभा चुनावों के रिजल्ट सामने आये जिनमें भाजपा को बुरी तरह हार का सामना करा पड़ा है। चार प्रदेशों में भाजपा की हालत बहुत बुरी रही है। इतना ही नहीं यूपी में भी भाजपा को पंचायत चुनावों में भारी विफलता मिली है। 2022 में यूपी समेत पांच अन्य प्रदेशों में विधानसभा चुनाव होने है। जिनमे यूपी, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब, मणिपुर में चुनाव होना है। गोवा, यूपी और उत्तराखंड में भाजपा की सरकारें है। 2022 के अंत में गुजरात में भी चुनाव होना है।
भाजपा के लिये सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि अभी वो हाल की हार से उबर भी नहीं पायी है कि आगामी चुनावों की जिम्मेदारी सिर पा आ गयी है। पिछले साल बिहार में जेडीयू और बीजेपी की सरकार बनी है। वहां भी सरकार के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सरकार के घटक दल भी सरकार के खिलाफ मीडिया में बयान देने बाज नहीं आ रहे है। हम पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व बिहार के सीएम जीतन राम मंाझी और सरकार में मंत्री मुकेश कुमार सहनी भी नितीश कुमार के बस की बात नहीं है। सरकार बनने में इन दोनों के 8 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। यह भी कह सकते हैं कि सरकार इन्हीं समर्थकोे के बल पर ही टिकी हुई है। भाजपा की लगातार टोका टाकी से भी नितीश कुमार परेशान हो चुके है। हाल ही में भाजपा के दबाव में जनाधिकारी पार्टी अध्यक्ष राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की गिरफ्तारी हुई थी उस मामले में जीतनराम मांझी औ मुकेश साहनी ने विरोध जताया था। इससे नितीश कुमार की काफी किरकिरी हुई थी।
पप्पू यादव की गिरफ्तारी की देशव्यापी निंदा हुई थी। पिछले विधानसभा चुनाव में पप्पू यादव की पार्टी जनाधिकार पार्टी ने काफी मेहनत की थी। लेकिन उनका कोई उम्मीदवार जीत का स्वाद नहीं चख सका लेकिन जतना के बीच पप्पू यादव की साख जरूर बन गयी। इससे भी नितीश कुमार और भाजपा को परेशानी हुई थी। अगर मांझी ओर मुकेश सहनी ने सरकार से समर्थन ले लिया तो सरकार का तख्ता पलट हो सकता है। वैसे भी नितीश कुमार ने साफ कह दिया कि अगर सरकार किसी मुसीबत में पड़़ती है तो वो बचाने के लिये कोई प्रयास नहीं करेंगे।
अगर जीतनराम मांझी और मुकेश सहनी ने राजद से हाथ मिला लिये तो महागठबधन की सरकार बनने में देर नहीं लगेगी। वैसे भी ओवैसी ने पहले ही तेजस्वी के गठबंधन वाली सरकार को समर्थन देने की बात कह रखी है। अन्य समर्थन और संगठन को मजबूत करने के लिये अब लालू यादव भी राजनीति में उतर चुके हैं।
यूपी में भी भाजपा की राह में बहुत से रोड़े हैं। स्वयं योगी भाजपा के लिये भस्मासुर बने हुए है। यह भी चर्चा में है कि मोदी और शाह योगी से खुश नहीं हैं। लेकिन योगी को सीधे तौर पर रिप्लेस करने की बात भी कहने की हिम्मत किसी में भी नहीं है। योगी शायद हालात को बेहतर समझ रहे हैं। इसलिये पहले से किलाबंदी में जुट गये है। यह माना जा रहा है कि योगी ने अपने 200 विधायकों को एकजुट कर लिया है। वहीं मोदी और शाह यूपी की सत्ता पर पकड़ बनाये रखने के लिये जुगत लगा रहे हैं कुछ माह पहले मोदी के एक खास नौकर शाह अरविंद शर्मा को भाजपा में शामिल कराया गया था। अरविंद शर्मा को यूपी सरकार में खास जिम्मेदारी दिलवाने की मंशा थी लेकिन योगी शायद इस बात के लिये तैयार नहीं हुए। तभी से केन्द्र और योगी के बीच तनातनी चल रही है। दिलचस्प बात यह है कि दो दिन पहले योगी के जन्मदिन पर भी मोदी और शाह ने योगी को बधाई नहीं दी। इस बात ने भी मामले को अैार तूल पकडवा दिया। हाल ही में योगी ने एक विज्ञापन नमामि गंगे पर निर्गत कराया जिसमे मोदी और शाह दोनों ही नदारद है। इसके अलावा सपा और आम आदमी पार्टी ने भी चुनाव में ताल ठोक रखी है। कांग्रेस और बसपा भी भाजपा की राह में रोड़े अटकाने से बाज नहीं आयेंगे।
भले ही मोदी और शाह आल इज वे का नारा लगा रहे हैं लेकिन पार्टी के अंदर खाने कलह की बात साफ उबर कर सामने है। कुछ मंत्री और नेता योगी की कार्यप्रणाली और अढ़ियल रवैये से काफ खफा है। ऐसे में चुनाव में कोई सकारात्मक परिणाम आने के आसार बहुत ही कम दिख रहे है। इस बार विपक्ष में सपा काग्रेस और बसपा के साथ आम आदमी पार्टी भी ताल ठोक रही है।







